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सिनेमा हॉल में अब राष्ट्गान बजते वक्त दिव्यांगों को खड़े होने की जरूरत नहीं: सुप्रीम कोर्ट

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अप्रैल 18 , 2017 , 18:03 IST | नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने सिनेमा हॉल में राष्ट्रगान के वक्त सम्मान में खड़े होने वाले मामले में दिव्यांगों को राहत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शारीरिक रुप से कमजोर लोगों का सिनेमा हॉल के अंदर खड़ा होना जरूरी नहीं है। पिछले साल नवंबर में कोर्ट ने आदेश देते हुए कहा था कि सिनेमा हॉल में मूवी से पहले राष्ट्रगान बजाया जाना और वहां पर मौजूद सभी लोगों को राष्ट्रगान के सम्मान में खड़े होना अनिवार्य है। तो वहीं वंदे मातरम को राष्ट्रीय गीत घोषित करने और स्कूलों में जरूरी करने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए 4 हफ्तों में जवाब मागा है।

इस मामले की अगली सुनवाई 23 अगस्त को होगी। जिसमें सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि सिनेमा हॉल में राष्ट्रीय गान वाले आदेश को वापस ले या नहीं। वहीं केरल फिल्मकारों ने कहा कि कोर्ट को यह आदेश वापस लेना चाहिए क्योंकि लोगों को इसके लिए विवश नहीं किया जा सकता है। कोर्ट को यह तय नहीं करना चाहिए।

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भोपाल के श्याम नारायण चौकसे ने सिनेमा हॉल में राष्ट्रगान को सम्मान दिलाने के लिए जनहित याचिका दायर की थी। जिसकी सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मूवी के पहले राष्ट्रगान बजाए जाने का आदेश दिया और कहा कि, देशभर के सभी सिनेमा हॉलों में मूवी शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बजाना अनिवार्य है और इस दौरान हॉल की स्क्रीन पर तिरंगा नजर आना चाहिए और वहां पर मौजूद सारे लोगों को राष्ट्रगान के सम्मान में खड़े होना होगा।

वहीं महाराष्ट्र और राजस्थान सरकार भी सुप्रीम कोर्ट पहुंची और महाराष्ट्र सरकार ने सिनेमा हॉल में राष्ट्रगान बजाए जाने वाले आदेश का समर्थन किया। इसी के साथ महाराष्ट्र सरकार ने अर्जी दाखिल कर कहा
दुर्भाग्यपूर्ण है कि राष्ट्रगान के प्रति सम्मान दिखाने के लिए किसी नागरिक को संवैधानिक कोर्ट आना पड़ा

सुप्रीम कोर्ट ने कहा

राष्ट्रीय गान राष्ट्रीय पहचान, राष्ट्रीय एकता और संवैधानिक देशभक्ति से जुड़ा है।
एक बार राष्ट्रगान शुरू होने पर इसे बीच में नहीं रोकना चाहिए।

गौरतलब है कि साल 1960 के वक्त में सिनेमा हॉल में राष्ट्रगान बजाने की शुरूआत हुई। दरअसल राष्ट्रगान की शुरूआत इसलिए हुई थी क्योंकि लोगों के भीतर राष्ट्रप्रेम की भावना जगाई जा सके और सैनिकों का सम्मान किया जाए।


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