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BCCI की बैठक में भाग लेने पर श्रीनिवासन और निरंजन शाह को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

श्वेता बाजपेई, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जुलाई 14 , 2017 , 18:52 IST | नयी दिल्ली

बीसीसीआई की हाल ही में हुई एसजीएम (स्पेशल जनरल मीटिंग) में राज्य क्रिकेट एसोसिएशन के प्रतिनिधि के रूप में एन श्रीनिवासन और निरंजन शाह के शामिल होने का मामला शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट की जांच के दायरे में आ गया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त क्रिकेट प्रशासक समिति (सीओए) ने स्टेटस रिपोर्ट दायर की है। इस रिपोर्ट में सीओए ने बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष एन. श्रीनिवासन पर पारदर्शिता में खलल डालने का आरोप लगाया है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने एन. श्रीनिवासन और निरंजन शाह को नोटिस जारी किया है। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व बीसीसीआई अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने बिना शर्त के माफी स्वीकार कर ली है। 

सीओए ने आरोप लगाया है कि एन श्रीनिवासन बीसीसीआई की किसी भी राज्य असोसिएशन के सदस्य बनने योग्य नहीं हैं फिर भी उन्होंने तमिलनाडु क्रिकेट असोसिएशन के प्रतिनिधि के तौर पर बोर्ड की एसजीएम (स्पेशल जनरल मीटिंग) में भाग लिया।

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रिपोर्ट में आगे कहा गया कि पूर्व बीसीसीआई अध्यक्ष ने बैठक का एक तिहाई वक्त खराब किया। इसके साथ ही उन्होंने अन्य लोगों सीएओ की पारदर्शिता रेज्योल्युशन का विरोध करने के लिए भी उकसाया। उन्होंने निरंजन शाह के साथ मिलकर बैठक में अराजकता पैदा करने की कोशिश की। सुप्रीम कोर्ट ने हैरानी जताई कि आखिर कैसे किसी भी राज्य के एसोसिएशन का सदस्य बनने के लिए अयोग्य घोषित किए जा चुका व्यक्ति तमिलनाडु क्रिकेट असोसिएशन का नुमाइंदा बन सकता है।

ये दोनों ही 70 वर्ष से ज्यादा के हैं और लोढ़ा कमिटी की सिफारिशों के अनुसार बीसीसीआई में कोई पद धारण नहीं कर सकते। बावजूद इसके इन दोनों ने बोर्ड की एजीएम में हिस्सा लिया था। बोर्ड की एजीएम में सिर्फ बोर्ड के राज्यों के प्रतिनिधि ही हिस्सा ले सकते हैं।

जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस ए एम खानविलकर और जस्टिस धनन्जय वाई चन्द्रचूड की तीन सदस्यीय पीठ ने इस मुद्दे पर दोनों से जवाब मांगते हुए कहा कि अयोग्य घोषित किया गया कोई भी सदस्य मनोनीत सदस्य के रूप में भी इस तरह की बैठक में शामिल नहीं हो सकता है। पीठ ने श्रीनिवासन और शाह को नोटिस जारी किये और इस मामले को 24 जुलाई के लिये सूचीबद्ध कर दिया। वहीं कुछ संघटनों द्वारा श्रीनिवासन और शाह को बोर्ड के स्थाई सदस्यों के तौर पर पूर्णतया प्रतिबंधित किए जाने की याचिका पर 5 सितंबर को सुनवाई होगी।


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