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राज्यसभा चुनाव में NOTA पर रोक नहीं, SC ने कांग्रेस से पूछा- देरी से क्यों आए?

गोपाल कृष्ण, संवाददाता, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 1
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| अगस्त 3 , 2017 , 12:52 IST | नयी दिल्ली

राज्यसभा चुनाव में नोटा पर रोक नहीं लगेगी। गुजरात की 3 सीटों पर 8 अगस्त को होने वाले चुनावों में नोटा के इस्तेमाल पर स्टे लगाने की कांग्रेस की अर्जी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है। मतलब अब राज्यसभा चुनाव के लिए वोटिंग नोटा के विकल्प के साथ ही होगी। इससे पहले, कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के सामने दलील दी थी कि अगर नोटा पर स्टे नहीं दिया गया तो विधायकों के वोट दूसरे पक्ष के लोग खरीद लेंगे और उसके कैंडिडेंट्स चुनाव हार जाएंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि चुनाव आयोग ने राज्यसभा चुनाव में नोटा के इस्तेमाल से जुड़ा नोटिफिकेशन काफी पहले 2014 में जारी किया था, ऐसे में कांग्रेस को इसकी खामियां इस वक्त क्यों नजर आ रही है? सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक, यह एक संवैधानिक मुद्दा है, जिसपर बहस की जरूरत है। कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा कि वह कांग्रेस की याचिका पर 2 हफ्ते में जवाब दे।

आपको बता दें कि बीजेपी भले ही नोटा का इस्तेमाल नहीं किए जाने के पक्ष में है, लेकिन एनडीए सरकार ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में रणनीतिक चुप्पी साध रखी है। अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि गुजरात चुनाव में नोटा के इस्तेमाल को लेकर ईसी की ओर से 24 जुलाई को जारी नोटिफिकेशन से सरकार का कोई संबंध नहीं है।

Supreme-Court-of-India

वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने गुजरात कांग्रेस की ओर से जस्टिस दीपक मिश्रा की पीठ से कहा कि संविधान में 'नोटा' का कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए राज्यसभा चुनाव के मतपत्र में इस तरह का कोई विकल्प नहीं रखा जा सकता। गुजरात विधानसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक शैलेष मनुभाई परमार ने अपनी याचिका में विधानसभा सचिव के 1 अगस्त के परिपत्र को रद्द करने की मांग की है।

सचिव ने परिपत्र में कहा है कि राज्यसभा चुनाव में 'नोटा' का विकल्प रहेगा। याचिकाकर्ता का कहना है कि नोटा का विकल्प जनप्रतिनिधित्व कानून 1951 और चुनाव संचालन नियम 1961 का उल्लंघन है। कानून में आवश्यक संशोधन के बगैर इसे लागू करना अवैध, मनमाना व गलत इरादे वाला है। याचिका में चुनाव आयोग द्वारा नोटा का विकल्प लागू करने के 24 जनवरी 2014 और 12 नवंबर 2015 को जारी सर्कुलर रद्द करने का आग्रह किया गया है।

Nota

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में ईवीएम में 'नोटा' का बटन अनिवार्य किया था। इसे जनवरी 2014 से लागू कर दिया गया। राज्यसभा चुनाव में वोटर (विधायक) को अपना मतपत्र पेटी में डालने से पहले पार्टी के अधिकृत एजेंट को दिखाना पड़ता है। यदि नोटा लागू रहा तो किसी दूसरे को वोट देने या नोटा का उपयोग करने पर विधायक को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकेगा। हालांकि पार्टी उसे निकालने और निलंबित करने जैसी अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकेगी, लेकिन वह विधायक बना रहेगा तथा उसका वोट पार्टी लाइन तोड़ने पर भी अवैध नहीं माना जाएगा।

गुजरात की सीटों के लिए होने जा रहे राज्यसभा चुनाव में नोटा के विकल्प का इस्तेमाल होने जा रहा है। बीजेपी ने पार्टी अध्यक्ष अमित शाह, केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी और बलवंत सिंह राजपूत को उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस की तरफ से एकमात्र उम्मीदवार अहमद पटेल हैं। कांग्रेस ने नोटा के इस्तेमाल पर ऐतराज जताया है। कांग्रेस ने कहा है कि चुनाव आयोग बिना संवैधानिक संशोधन के राज्यसभा चुनाव में नोटा के विकल्प का इस्तेमाल नहीं कर सकता। कांग्रेस ने कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 84 का उल्लंघन है।


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