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गंगा-यमुना को नहीं मिलेगा जीवित होने का दर्जा, सुप्रीम कोर्ट का फैसला

अनुराग गुप्ता, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जुलाई 7 , 2017 , 16:08 IST | नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उत्तराखंड हाईकोर्ट के गंगा-यमुना नदी को जीवित मानने के फैसले पर रोक लगा दी है। बता दें कि उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कुछ दिन पहले अपने फैसले में गंगा और यमुना नदी को जीवित और वैधानिक वस्तु माना था जिसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए रोक लगा दी है। 

20 मार्च को उत्तराखंड हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए देश की दो पवित्र नदियों गंगा ओैर यमुना को 'जीवित' होने का दर्जा देने का आदेश दिया था। बता दें कि उत्तराखंड हाईकोर्ट के जस्टिस राजीव शर्मा और जस्टिस आलोक सिंह की पीठ ने इन नदियों के साथ जीवित इंसान की तरह व्यवहार किए जाने का आदेश सुनाया था।

बता दें कि सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि गंगा और यमुना सिर्फ उत्तराखंड में नहीं बहती बल्कि कई राज्यों में बहती हैं। ऐसे में उत्तराखंड को दूसरे राज्यों में इन नदियों की जिम्मेदारी नहीं दी जा सकती। इसके लिए कदम उठाना केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है।

हाईकोर्ट ने नमामी गंगे के डायरेक्टर, उत्तराखंड के चीफ सेक्रेट्री और राज्य के एडवोकेट जनरल को राज्य में बहने वाली गंगा-यमुना का कानूनी संरक्षक घोषित किया था। इस पर प्रदेश सरकार ने दलील दी थी क्या दूसरे प्रदेशों में अगर इसका दुरुपयोग होता है तो उत्तराखंड का चीफ सेक्रेट्री राज्य या केंद्र सरकार को आदेश जारी कर सकता है?

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सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दाखिल याचिक में कहा गया है बाढ़ जैसी आपदा में किसी की मृत्यु होने या जानमाल का नुकसान होने पर मुआवजे और किसी तरह के नुकसान की भरपाई का मुकदमा दाखिल किया जा सकता है। ऐसे में प्रदेश के चीफ सेक्रेट्री पर ही मुकदमा दाखिल होगा, इस मुकदमें में जो खर्च होगा क्या उसका खर्च प्रदेश सरकार झेल पाएगी?

इसके अलावा अगर किसी प्रदेश में बाढ़ जैसी आपदा या इससे जुड़ी अन्य घटना होती है तो क्या इसके लिए उत्तराखंड का ही चीफ सेकेट्री जवाब देगा? वहीं हाईकोर्ट ने आदेश देते हुए गंगा के आसपास से अतिक्रमण हटाने की बात कहीं।


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