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चंद्रमा की सतह के नीचे है पानी, शोधकर्ताओं ने किया दावा

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जुलाई 27 , 2017 , 15:07 IST | न्यूयॉर्क

शोधकर्ताओं का कहना है कि चांद की सतह के नीच अंदरूनी हिस्से में बड़ी मात्रा में पानी हो सकता है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, उपग्रह से प्राप्त आंकड़ों के विश्लेषण से अमेरिका के ब्राउन विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने ज्वालामुखी संग्रहों में या प्राचीन ज्वालामुखी के कारण चंद्रमा की सतह पर फैली चट्टानों के अंदरूनी स्तरों में प्राकृतिक रूप से पानी की पर्याप्त मात्रा होने का पता लगाया है।



पत्रिका जियोसाइंस में प्रकाशित शोध में कहा गया है कि यह बताता है कि चंद्रमा की ऊपरी सतह और अंदरूनी हिस्से के बीच में पर्याप्त मात्रा में पानी है।

शोध के प्रमुख लेखक राल्फ मिलिकेन ने कहा कि चंद्रमा पर पानी के पाए जाने के पहले के निष्कर्षो में आंतरिक स्रोतों से पानी होने का पता नहीं चलता है।

चंद्रयान ने की भी थी चंद्रमा पर पानी खोजने में नासा की मदद 

भारत के चंद्रयान मिशन द्वारा एकत्र डाटा की मदद से ही अमेरिकी अंतरिक एजेंसी नासा को चंद्रमा की सतह में पानी की मौजूदगी का पता लगाने में कामयाबी मिली थी। नासा के शोधकर्ताओं का कहना है कि पहली बार चंद्रमा की सतह के काफी गराई में पानी की मौजूदगी का पता लगा है। अपोलो अंतरिक्ष कार्यक्रम के दौरान भी चंद्रमा की सतह में पानी की मौजूदगी की बात की गई थी।

नासा के अनुसार मून मिनरलॉजी मैपर उपकरण की मदद से हासिल डाटा का इस्तेमाल करके चंद्रमा की सतह में पानी की मौजूदगी का पता लगाया गया। एम3 को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के चंद्रयान-1 के साथ भेजा गया था।

जॉन होपकिंग्स यूनिवर्सिटी अप्लाइड फिजिक्स लैबोरेटरी से जुड़ी वैज्ञानिक रचेल क्लीमा ने कहा कि चंद्रमा से निकाली गई चटटान सामान्य रूप से सतह के नीचे होती हैं और इसके प्रभाव से ही बुलियाल्डस क्षेत्र का निर्माण हुआ।

उन्होंने कहा कि हमने पाया कि इस क्षेत्र में अच्छी खासी मात्रा में हाइड्राक्सिल है जिसमें ऑक्सीजन और हाइड्रोजन के परमाणु हैं। यह इस बात का सबूत है कि इस गडढे में मौजूद चट्टान के साथ पानी भी है।


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