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सेबी कोर्ट में सुब्रत राय को नहीं मिलेगी पेशी से छूट, मेडिकल ग्राउंड पर मांगी थी अनुमति

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मई 18 , 2017 , 13:42 IST | नई दिल्ली

सहारा ग्रुप के प्रमुख सुब्रत रॉय गुरुवार को सेबी कोर्ट के सामने पेश नहीं हुए। रॉय ने मेडिकल ग्राउंड पर पेशी से छूट के लिए अपील किया था। कोर्ट ने उनकी इस अर्जी को खारिज कर दिया। बता दें कि इसके पहले 21 अप्रैल को मुंबई की सेबी कोर्ट में सुनवाई के दौरान अगली पेशी की ताऱीख 18 ताऱीख रखी गई थी।

माना जा रहा था कि 18 मई यानी गुरूवार को सेबी एक्ट और कंपनी एक्ट का उलंघन करने के इस मुकदमे में सुब्रत रॉय पर आरोप तय हो सकते थे।

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कोर्ट ने कहा था- जब जरूरत होगी सहारा चीफ को हाजिर होना होगा

हालांकि, इसी मामले मेु सुब्रत रॉय ने कोर्ट से पेशी की छूट मांगी थी, जिसे कोर्ट ने निरस्त कर दिया। 21 अप्रैल को ही पेशी के बाद कोर्ट ने उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट निरस्त कर दिया था, जो 31 मार्च को जारी किया गया था। कोर्ट ने तब यह शर्त रखी थी कि जब भी जरूरत होगी सुब्रत रॉय सुब्रत रॉय को अदालत में हाजिर रहना होगा।

क्‍या है सहारा-सेबी विवाद

सहारा की दो सहयोगी कंपनियों सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉरपोरेशन लिमिटेड (SIRECL) और सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (SHICL) पर रियल एस्टेट में इन्वेस्टमेंट के नाम पर गलत तरीके से 3 करोड़ से ज्यादा इन्वेस्टर्स से 17,400 करोड़ रुपए जुटाने के आरोप हैं।

सितंबर, 2009 में सहारा प्राइम सिटी ने आईपीओ लाने के लिए सेबी के पास दस्तावेज जमा किए, जिसके बाद सेबी ने अगस्त 2010 में दोनों कंपनियों की जांच के आदेश दिए थे। कंपनियों में गड़बड़ी मिलने पर विवाद बढ़ता गया और मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह की दोनों कंपनियों को निवेशकों के 36 हजार करोड़ रुपए लौटाने का आदेश दिया था।

कब हुई जेल,कब मिली पैरोल

सुब्रत रॉय 4 मार्च 2014 को जेल गए थे। इसके बाद 6 मई 2016 को उनकी मां की मौत हो गई थी। उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए उन्हें पैरोल दी गई थी। रॉय की पैरोल तभी से बढ़ती रही है।

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सेबी ने कब दर्ज किया था मामला

गौरतलब है कि सेबी ने 2012 में सहारा इंडिया रियल इस्टेट कॉर्पोरेशन, सहारा हाउजिंग इन्वेस्टमेंट और उनके प्रमोटर सुब्रत रॉय और तीन निदेशकों के विरुद्ध मामला दायर किया था। इन सभी कंपनियों ने अपने शेयरों को स्टॉक ऐक्सचेंजों पर लिस्ट कराए बिना निवेशकों से भारी राशि उगाह ली थी।

यह कितनी राशि थी, इसका उल्लेख सेबी ने नहीं किया है लेकिन माना जाता है कि यह रकम 24,000 करोड़ रुपये थी। सेबी के वकील ओमप्रकाश झा और पूर्णिमा अडवाणी ने कहा कि यदि उन पर आरोप सिद्ध हो जाता है तो इन सभी को 10 साल की कैद और 25 करोड़ रुपये का जुर्माना भरना पड़ सकता है।

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