ख़ास रिपोर्ट

एमपी में छिपे हैं बापू की मर्डर 'मिस्ट्री' के गहरे रहस्य?

ललिता सेन, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अक्टूबर 5 , 2017 , 14:30 IST | भोपाल

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 148वीं जन्मतिथि पर उनकी हत्या से जुड़े कुछ सवाल उठ रहे हैं। आखिर बापू को मारने के लिए कौन-सी पिस्तौल का इस्तेमाल किया गया था? ये पिस्तौल आई कहां से? कितनी गोलियां चलाई गई थीं? क्या कोई दूसरा शूटर भी उस दौराव वहां मौजूद था?

महात्मा गांधी की हत्या में इस्तेमाल हुए हथियारों की पहले मध्य प्रदेश के ग्वालियर से होकर गुजरती है। दरअसल, हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया के पास 1948 के पुलिस दस्तावेज की एक कॉपी मिली है। इन दस्तावेजों से पता चला है कि ग्वालियर के डॉ. दत्तात्रेय परचुरे ने वह पिस्तौल मुहैया करवाई थी और इसी पिस्तौल से गोडसे ने महात्मा गांधी पर तीन गोलियां चलाई थीं। डॉ. दत्तात्रेय परचुरे के पास दूसरी पिस्तौल भी थी, जिसका रिजस्ट्रेशन नंबर 719791 था। इससे जुड़ी एक चौकाने वाली बात भी सामने आई है कि ऐसी ही एक ओर पिस्तौल उसी समय ग्वालियर के ही उदय चंद के पास भी थी।

जिस पिस्तौल से महात्मा गांधी की हत्या की गई, वह पिस्तौल डॉ. परचुरे ने दी थी। उसका रजिस्ट्रेशन नंबर 606824 था। डॉ. परचुरे के पास दो पिस्तौल थी। गांधी की हत्या के बाद दोनों पिस्तौल जब्त कर ली गई थीं। एक पिस्तौल मौका-ए-वारदात से मिली थी, जबकि दूसरी डॉ. परचुरे के घर से मिली थी।

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टाइम्स ऑफ इंडिया के पास 15 फरवरी 1948 में ग्वालियर स्टेट के मध्य प्रदेश का हस्ताक्षर किया हुए दस्तावेज मिले हैं, जिसमें लिखा है कि परचुरे और उदयचंद के पास एक ही सीरियल नंबर की पिस्तौल थी। इस सिलसिल में जब परचुरे के बेटे उपेंद्र और ग्रैंडसन मेघदूत से बात करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने बात करने से इनकार कर दिया।

सावरकर का समर्थक बताने वाले डॉ. पंकज फडनीस ('अभिनव भारत' के संस्थापक) ने सुप्रीम कोर्ट में PIL दाखिल कर इस बात पर सवाल उठाया है कि महात्मा गांधी जी पर तीन गोलियां चलाई गईं थीं। फडनीस का कहना है कि गांधी जी पर चार गोलियां चलाई गई थीं और चौथी गोली ने ही गांधी जी जान ली थी। बता दें कि इससे पहले भी फडनीस ने गांधी जी की हत्या के केस को फिर से खोलने को कहा था, लेकिन हाई कोर्ट ने उनकी मांग को ठुकरा दिया था।

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फडनीस ने दावा किया है, 'दुनिया भर के अधिकतर अखबारों ने अपनी खबर में लिखा था कि गांधी जी पर चार गोलियां चलाई गईं थीं। चौथी गोली की गुत्थी अभी तक अनसुलझी है।'

फडनीस ने महात्मा गांधी की मृत्यु के समय उनके साथ रहने वाली मनुबेन की डायरी का हवाला देते हुए कहा कि, 'लगभग 1 बजे बापू को बाथरूम में ले जाया गया। सब लोग रो रहे थे। बापू की धोती, शॉल पूरी तरह खून में लथपथ थी। एक बुलेट उनके कपड़ों से निकली थी।'

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फडनीस जानना चाहते हैं कि वह चौथी बुलेट कहां से आई और किसने चलाई। उनकी इस याचिका पर 6 अक्टूबर को सुनवाई होनी है।

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जिस पिस्तौल को गोडसे के पास से जब्त किया गया उससे बुलेट मैच नहीं कर रही है। हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया के पास इस लेटर की एक कॉपी भी है। अब सवाल उठता है कि पुलिस को दूसरी पिस्तौल को भी चेक करने की जरूरत क्यों महसूस नहीं हुई?

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फडनीस ने सवाल उठाया है कि यूएस एंबेसी के वाइस कौसुल हार्बर्ट 'टॉम' रेनर को गवाह क्यों नहीं बनाया गया, क्योंकि गोली चलने के बाद गोडसे को पकड़ने वाले और उसके हाथ से हथियार छीनने वाले रेनर ही थे। फडनीस जानना चाहते हैं कि क्या गांधी जी की हत्या का उनकी पाकिस्तान यात्रा से कुछ लेना-देना था?


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