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24 जून को शनि अमावस्या और गुप्त नवरात्रि के शुभ योग पर करें पूजा, दूर होंगे ये कष्ट

कीर्ति सक्सेना, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जून 23 , 2017 , 19:18 IST | नयी दिल्ली

शनिवार 24 जून को अमावस्या तिथि है। शनिवार के दिन जब अमावस्या तिथि आती है तो इसका महत्व कई गुणा बढ़ जाता है। यह संयोग इस वर्ष दो बार हो रहा है पहला 24 जून को और दूसरा 18 नवंबर को है। शनिश्चरी (शनिवार) की अमावस, प्रात: 8 बजकर एक मिनट के बाद आषाढ़ शुक्ल पक्ष प्रारम्भ एवं आषाढ़ महीने के माता के गुप्त नवरात्र प्रारम्भ हो जाएंगे, जो दो जुलाई तक रहेंगे। इसके साथ-साथ मां ज्वाला के परम प्रिय भक्त श्री ध्यानूं भगत जी की जयंती भी है।

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साल की पहली शनिश्चरी अमावस्या का महत्व इसलिए खास है क्योंकि प्रतिपदा तिथि के क्षय हो जाने के कारण इसी दिन गुप्त नवरात्र भी आरंभ हो रहा है। शास्त्रों में बताया गया है कि गुप्तनवरात्र में किया गया जप तप बहुत अधिक फलदायी होता है। ऐसे में कई राशियों के लिए यह शनिश्चरी अमावस्या बेहद खास है।

21 जून को शनि महाराज वक्री चाल से वृश्चिक राशि में आए हैं जहां अगले चार महीने यानी 25 अक्तूबर तक शनि मौजूद रहेंगे। शनि की इस बदली स्थिति से धनु और वृश्चिक राशि वाले व्यक्ति साढ़ेसाती के पहले और दूसरे चरण के प्रभाव का फल भोगेंगे और तुला राशि वाले शनि के अंतिम चरण के प्रभाव में रहेंगे। मेष और सिंह राशि वाले एक बार फिर से ढैय्या के फल को प्राप्त करेंगे। ऐसे में इन 5 राशियों के व्यक्तियों को शनि के अशुभ फल को दूर करने के लिए शनिश्चरी अमावस्या का लाभ उठाना चाहिए।

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विद्वानों का कहना है, प्रतिपदा से लेकर नवमी तक नवदुर्गा के नौ रूपों की पूजा का विधान है। गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं (मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुन्दरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्न महता, त्रिपुरी भैरवीं, मां धूमावती, माता बगुला मुखी, मातंगी व कमला देवी) की साधना से अभिष्ट सिद्धियां पाई जा सकती हैं। सतयुग में चैत्र नवरात्रि, द्वापर में माघ नवरात्रि, कलयुग में अश्विनी नवरात्रि और त्रेता युग में आषाढ़ नवरात्रि की प्राथमिकता रहती है।

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शनि अमावस्या और गुप्त नवरात्रि का अद्भुत योग निसंतान दंपत्तियों को संतान देगा, पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होगी। 24 जून को किया गया व्रत-उपवास लाभ प्रदान करेगा। वर्तमान समय में वृश्चिक, धनु और मकर पर साढ़ेसाती वृषभ और कन्या राशि पर ढैय्या का प्रभाव चल रहा है। शनि पीड़ा से राहत के लिए किए गए उपाय बहुत लाभ देंगे।

यदि इस दिन ये उपाय न कर सकें तो प्रत्येक शनिवार को भी कर सकते हैं।

शनिदेव का तेल से अभिषेक करें।

काला तिल, उड़द और कपड़ा नीले फूलों के साथ दान करना चाहिए।

काले कुत्ते को कुछ खिलाना भी लाभदायक रहेगा।


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