ख़ास रिपोर्ट

अपने 5 बच्चों की जान नहीं बचा पाएं लेकिन कर दिया कुछ ऐसा कि अब नहीं होगी किसी मासूम की मौत!

icon अमितेष युवराज सिंह | 1
569
| जुलाई 9 , 2017 , 12:34 IST | नई दिल्ली

वो शख्स जिसने अपने पांच बच्चों की जान बिमारी का इलाज ना करा पाने की वजह से गंवा दी, उसी शख्स ने आज सैकड़ों लोगों के लिए मुफ्त इलाज का इंतजाम करा दिया है। इस शख्स की पहल का ही नतीजा है कि आज गौचर जैसी 7000 तरह की आनुवांशिक बीमारी के मुफ्त इलाज के लिए कानून बन गया है। अब किसी की भी जान पैसे की कमी और उचित इलाज ना मिल पाने की वजह से नहीं जाएगी।

Visceral leish boy

सिराजुद्दीन के पांच बच्चों की हुई मौत

आज हम जिस शख्स की बात कर रहे हैं उसका नाम है सिराजुद्दीन। आपको जान कर हैरानी होगी कि दिल्ली के रहने वाले सिराजुद्दीन के पांच बच्चों की मौत गंभीर आनुवांशिक बीमारी ‘गौचर’ की वजह से हुई है। सिराजुद्दीन अपने बीमार बच्चों को लेकर जब भी अस्पताल गए, उन्हें सिर्फ इतना बताया गया कि इलाज पर हर माह लाखों का खर्च होगा। पैसों के अभाव के चलते सिराजुद्दीन के पांच बच्चों की एक के बाद एक मौत हो गई। सिराजुद्दीन को उस वक्त अपनी दुनिया उजड़ती नजर आई जब उन्हें पता चला कि उनकी आखिरी संतान अहमद भी ‘गौचर’ से पीड़ित है।

Sirajuddin_1499563642

सिराजुद्दीन ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया

सिराजुद्दीन ने अपने बेटे की जिंदगी बचाने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। एक अधिवक्ता की मदद से केंद्र व दिल्ली सरकार के खिलाफ कानूनी जंग छेड़ते हुए उन्होंने बेटे के निशुल्क इलाज की मांग की। उनकी इस कानूनी जंग का नतीजा यह हुआ कि न सिर्फ उनका बेटा ठीक हो गया, बल्कि 7000 रोगों के निशुल्क इलाज का कानून भी बन गया।

Bolezn_goshe

गौचर बीमारी क्या

गौचर एक जन्मजात बीमारी है। इसमें मरीज का लिवर बढ़ जाता है। इलाज के लिए एन्जाइम का इंजेक्शन दिया जाता है। मौजूदा समय में इलाज पर 5 से 7 लाख रुपये का खर्च आता है। इसकी सभी दवाइयां विदेशों से मंगानी पड़ती हैं।

Gaucher-disease-type-1case-presentation-10-728

हाईकोर्ट के आदेश के बाद बना कानून

सिराजुद्दीन की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने 17 जनवरी, 2014 को गौचर व अन्य आनुवांशिक व दुर्लभ बीमारियों से ग्रसित मरीजों के निशुल्क इलाज के लिए केंद्र व दिल्ली सरकार को नीति बनाने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट के आदेश के बाद 25 मई, 2017 को केंद्र ने कानून बनाते हुए इन बीमारियों से लड़ने के लिए 100 करोड़ का कोष तैयार किया। मरीजों के इलाज पर 60%रकम केंद्र, जबकि 40% खर्च राज्य सरकार द्वारा गठित कोष से दिया जाएगा। सिराजुद्दीन की कोशिशों का ही नतीजा है कि आज अब देशभर में गौचर, फेबरी,पाम्पे, एमपीएस-1 सहित हजारों तरह की बीमारियों के निशुल्क इलाज हो सकेगा। आम तौर पर इन बीमारियों का इलाज कराने के लिए लाखों खर्च होते हैं।


author
अमितेष युवराज सिंह

लेखक न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर हैं

कमेंट करें