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ऐसे लगी कुलभूषण जाधव की फांसी पर रोक, हरीश साल्वे ने की भारत की तरफ से पैरवी

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मई 10 , 2017 , 14:15 IST | हेग

भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान में फांसी की सज़ा सुनाए जाने के मामले में भारत ने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया है। भारत की तरफ से पैरवी कर रहे हैं सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील और पूर्व सॉलीसिटर जनरल हरीश साल्वे।

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हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने इस मामले में पाकिस्तान से ये सुनिश्चित करने को कहा है कि कुलभूषण सुधीर जाधव को सभी विकल्पों पर विचार करने से पहले फांसी न दी जाए।

भारतीय अख़बार द हिंदू ने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के प्रेसिडेंट रॉन अब्राहम के हवाले से लिखा है कि उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ को निर्देश दिया है कि वो भारत की अपील पर गौर करें और जब तक न्यायालय मामले पर सुनवाई नहीं कर लेता और आदेश पारित नहीं कर देता, तब तक कुलभूषण जाधव की फांसी पर रोक रहेगी।

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सीनियर वकील हरीश साल्वे कर रहे हैं पैरवी

वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। साल्वे ने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में अपनी अपील में कहा था कि कुलभूषण जाधव को ईरान में अगवा किया गया था जहां वो भारतीय नौसेना से रिटायर होने के बाद व्यापार कर रहे थे। उनके पास ईरान का वैध वीजा था। भारत ने इस अपील में कहा है कि उसे कुलभूषण को फांसी की सज़ा सुनाने के बारे में जानकारी प्रेस रिलीज़ से मिली थी।

हरीश सालवे रह चुके हैं भारत के सॉलीसिटर जनरल

हरीश साल्वे सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील हैं। अंतरराष्ट्रीय विवादों पर भारत की तरफ से पैरवी करने में इनकी अच्छी पकड़ है। 1999 से 2002 तक यह भारत के सॉलिसीटर जनरल ऑफ इंडिया भी रह चुके हैं। 2003 में गुजरात दंगे के दौरान इन्होंने चर्चित बिलकिस बानो केस की भी पैरवी मानवाधिकार संगठन की तरफ से किया था। मुकेश अंबानी, वोडाफोन समेत कई कॉरपोरेट हाउस के तरफ से कॉरपोरेट मामले में पैरवी करते हैं।

भारत ने 15 बार कॉन्सुलर एक्सेस की मांग की है

वहीं पाकिस्तान ने पिछले साल तीन मार्च को बलूचिस्तान से उनकी गिरफ्तारी दिखाई है और इसके बारे में भारत को 25 मार्च 2016 को इस बारे में आधिकारिक जानकारी दी गई। भारत ने उसी वक्त कॉन्सुलर एक्सेस की मांग की थी, लेकिन पाकिस्तान ने इनकार कर दिया था। भारत ने 15 से ज़्यादा बार कुलभूषण जाधव को क़ानूनी मदद देने के लिए कॉन्सुलर एक्सेस की मांग की है, लेकिन पाकिस्तान ने अभी तक इसकी मंज़ूरी नहीं दी है।

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कुलभूषण की मां भी पाक सरकार से लगा चुकी है गुहार

कुलभूषण जाधव की मां भी पाकिस्तान से कुलभूषण की सज़ा पर फिर से विचार करने की अपील कर चुकी हैं। जाधव की मां ने पाकिस्तान सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप का आग्रह किया था। इसके साथ ही उन्होंने अपने बेटे से मिलने की इच्छा जताई थी।
गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की तरफ़ से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार भारत ने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में कहा कि फांसी के ख़िलाफ़ अपील करने के लिए बहुत कम समय है और पाकिस्तान में सभी विकल्प पर विचार करने के लिए भी समय नहीं है।

पाकिस्तान ने जारी किया था जाधव के कबूलनामे का वीडियो

मार्च, 2016 में पाकिस्तान आर्मी ने जाधव के कथित कबूलनामे का वीडियो जारी किया था। आर्मी ने कहा था कि,

कुलभूषण जाधव ने कबूल किया है कि वह रॉ के लिए बलूचिस्तान में काम कर रहा था और टेररिस्ट एक्टिविटीज में शामिल रहा।

भारत ने इस वीडियो को खारिज कर सवाल उठाया था। भारत ने शक जताया था कि जाधव को ईरान से किडनैप किया गया है।

पाक का आरोप- कुलभूषण इंडियन नेवी का सर्विंग ऑफिसर

पाकिस्तान ने आरोप लगाया था - "जाधव इंडियन नेवी का सर्विंग अफसर है। उसे सीधे रॉ चीफ हैंडल करते हैं। वो एनएसए के भी संपर्क में है। आपका जासूस हमारे पास है। उसने वो कोड भी बताया है, जिससे वह रॉ से कॉन्टैक्ट करता था। जाधव अब भी इंडियन नेवी का अफसर है। वह 2022 में रिटायर होने वाला है।

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एक पासपोर्ट (No. L9630722) भी जारी किया गया था। जिसके बारे में कहा गया था कि यह बलूचिस्तान में गिरफ्तार भारतीय शख्स का ही है।

पासपोर्ट में उसका नाम हुसैन मुबारक पटेल लिखा है। जन्मस्थान महाराष्ट्र का सांगली बताया गया है। पाकिस्तान ने उसके पास ईरान का वैध वीजा होने का भी दावा किया था।

विदेश मंत्रालय की दलील- इरान में बिजनेस करता था जाधव

मिनिस्ट्री ने कहा था, ''जाधव कानूनी तौर पर ईरान में बिजनेस करता था। उसे कस्टडी में हैरेस किया गया है। पाकिस्तान में उसकी मौजूदगी सवाल खड़े करती है। इससे ये शक पैदा होता है कि कहीं उसे ईरान से किडनैप तो नहीं किया गया।Ss

 


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