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दिसंबर में 92% बढ़ा स्टील निर्यात, बजट में कम हो सकता है कोकिंग-कोल पर आयात शुल्क

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जनवरी 9 , 2017 , 16:40 IST | नई दिल्ली

इस्पात मंत्रालय ने कोकिंग कोयला तथा निकेल दोनों पर आयात शुल्क में कमी की मांग की है। यह मांग 2017-18 के बजट पेश किये जाने से ठीक पहले की गयी है। ये दोनों उत्पाद इस्पात निर्माण के लिये महत्वपूर्ण है और इससे क्षेत्र को गति मिल सकती है।

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इस्पात सचिव अरूणा शर्मा ने कहा है कि निकेल, कोकिंग कोयला तथा गैस के मामले मे आयात पर निर्भरता काफी अधिक है।

उन्होंने कहा,

हम इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि क्या सीमा शुल्क तथा आयात शुल्क पर गौर करने की जरूरत है। इस पर अभी चर्चा जारी है। देखते हैं बजट में यह कैसे रहता है।

सचिव ने कहा कि इस्पात मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय को दी अपनी सिफारिश में कोकिंग कोयला, निकेल एवं गैस पर आयात शुल्क में कमी लाने को कहा है।



जहां निकेल पर आयात शुल्क पांच प्रतिशत है, वहीं कोकिंग कोयले के मामले में यह 2.5 प्रतिशत है।


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उन्होंने कहा कि भविष्य में पैलेट के विनिर्माण में गैस की जरूरत बढ़ेगी और प्रधानमंत्री ने जैसा कि कहा है कि अर्थव्यवस्था गैस आधारित होने जा रही है।

पैलेट लौह अयस्क का छोटा बॉल है और इसका उपयोग इस्पात बनाने में किया जाता है।

कोकिंग कोयला के आयात में कमी लाने के लिये अरूणा ने कहा कि उनका मंत्रालय वॉशरीज में निवेश के लिये कोयला मंत्रालय से बातचीत कर रहा है।

 

देश में 92% बढ़ा स्टील निर्यात 

भारत का इस्पात निर्यात दिसंबर में 92 प्रतिशत बढ़ गया और देश से अप्रैल से दिसंबर की अवधि में 49.77 लाख टन इस्पात का निर्यात किया गया जो पिछले वर्ष इसी अवधि में हुए निर्यात से 57.8 प्रतिशत अधिक है। इस्पात मंत्रालय की रिपोर्ट में यह बात कही गई है।

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ज्वाइंट प्लांट कमेटी की रिपोर्ट में कहा गया है, अप्रैल से दिसंबर तक कुल तैयार इस्पात के निर्यात में इससे पहले के वर्ष में इसी अवधि में हुए निर्यात के मुकाबले चालू वित्त वर्ष में यह 57.8 प्रतिशत बढ़कर यह 49.77 लाख टन रहा। दिसंबर में वर्ष 2016 में निर्यात में उसी वर्ष के नवंबर की तुलना में 13 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

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तैयार इस्पात के आयात में चालू वित्तीय वर्ष के पहले नौ माह में इससे पहले के वर्ष की तुलना में 37.4 प्रतिशत की कमी हुई है जबकि दिसंबर में आयात में पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 23.2 प्रतिशत की कमी हुई है। खपत में 5.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।