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सदी के सबसे बड़े ठग मिथिलेश कुमार उर्फ 'नटवरलाल' की कहानी

icon अमितेष युवराज सिंह | 0
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| जुलाई 8 , 2017 , 14:40 IST | नई दिल्ली

आज कहानी उस शख्स की जिसने 3 बार ताजमहल, दो बार लाल किला, एक बार राष्ट्रपति भवन और एक बार संसद भवन तक को बेच डाला। कहानी उस शख्स कि जिसे 8 राज्यों की पुलिस 100 से ज्यादा मामलों में खोज रही थी। कहानी उस शख्स की जिसे पुलिस ने गिरफ्तार तो किया लेकिन वो 8 बार पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया। हम बताने जा रहे हैं सदी के सबसे बड़े ठग नटवरलाल की कहानी।

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नटवरलाल का जन्म बिहरा के सीवान जिले के जीरादेई गांव से 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित गांव बंगरा में हुआ था। सिवान के लोग आज भी नटवरलाल की कहानियां सुनाते हैं। नटवरलाल का असली नाम मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव था। बचपन में नटवरलाल पढ़ाई में कमजोर थे। लोग बताते हैं कि मैट्रिक की परीक्षा फेल होने के बाद वो कोलकाता भाग गए और वहां स्ट्रीट लाइट के नीचे पढ़ाई करने लगे। सेठ केशवराम नाम के एक शख्स ने नटवरलाल को अपने बेटे को पढ़ाने के लिए रख लिया। कुछ दिन बाद नटवरलाल ने अपने सेठ से कॉलेज की फीस के लिए पैसे उधार मांगे जिसे देने से सेठ ने इंकार कर दिया। सेठ के इनकार करने से मिथिलेश इतना चिढ़ गया कि उसने रुई की गांठ खरीदने के नाम पर सेठ से 4.5 लाख ठग लिया। जिसके बाद से कहानी शुरू हुई मिथलेश के सबसे बड़े ठग नटवरलाल बनने की।

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नटवरलाल उसके 52 ज्ञात नामों में से एक था। कहा जाता है कि नटवरलाल ने धीरूभाई अम्बानी, टाटा और बिरला जेसे उद्योगपतियों के अलावा सरकारी अधिकारियों से भी ठगी की थी। एक बार नटवरलाल ने खुद को पूर्व वित्तमंत्री एनडी तिवारी का पर्सनल स्टाफ बताकर एक दुकान से 93 घड़ियां खरीदता है और बदले में दुकानदार को 32,829 का बैंक ड्राफ्ट दिया। दो दिन बाद जब दुकानदार ने उस ड्राफ्ट को बैंक में लगाया तो पता चला की वो फर्जी है। सिर्फ इतना ही नहीं वो कभी खुद को पीएम का स्टाफ तो कभी किसी जज का रिश्तेदार बताता और लोगों को ठगता था।

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उसने 3 बार ताजमहल, दो बार लाल किला, एक बार राष्ट्रपति भवन और एक बार संसद भवन तक को बेच दिया था। राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद के फर्जी साइन करके नटवर लाल ने संसद को बेच दिया था। जिस समय संसद भवन को बेचा था, उस समय सारे सांसद वहीं मौजूद थे। कहते हैं कि नटवर लाल के 52 नाम थे, उनमें से एक नाम नटवर लाल था। सरकारी कर्मचारी का वेश धरकर नटवर लाल ने विदेशियों को ये सारे स्मारक बेचे थे।

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मोस्ट वान्टेड अपराधियों में की लिस्ट में शुमार नटवरलाल के खिलाफ 8 राज्यों में 100 से अधिक मामले दर्ज थे। वह अपने जीवनकाल में 9 बार गिरफ्तार हुआ, लेकिन प्रत्येक बार किसी न किसी तरह पुलिस की चंगुल से भाग निकला। अंतिम बार जब वह पुलिस की पकड़ से भागा, तब उसकी आयु 84 साल थी। 24 जून 1996 को उसे कानपुर जेल से एम्स(AIIMS) अस्पताल लाया जा रहा था। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर पुलिस टीम को चकमा देकर वह भाग निकला। इस घटना के बाद उसे फिर कभी देखा नहीं जा सका।

नटवरलाल के जीवन से प्रेरित होकर बॉलीवुड में एक फिल्म बनी, मिस्टर नटवरलाल। इस फिल्म में मुख्य भूमिका में थे अमिताभ बच्चन। अभी हाल ही में राजा नटवरलाल नामक एक फिल्म बनी है, जिसमें मुख्य भूमिका निभाई है इमरान हाशमी ने।

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आपराधिक वारदातों को अन्जाम देने के बावजूद नटवरलाल के प्रशंसकों की संख्या कम नहीं थी। बिहार में उसके गांव के लोगों की मांग थी कि यहां नटवरलाल के नाम एक स्मारक की स्थापना की जाए। यहां लोग मानते हैं कि नटवरलाल एक भला आदमी था और लोगों की मदद करता था। नटवरलाल से प्रभावित होकर कई लोग उसके शागिर्द बने। लेकिन कोई भी उसके सरीखा नहीं हुआ।


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अमितेष युवराज सिंह

लेखक न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर हैं

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