बिज़नेस

सुभाष चंद्रा से जुड़ी कंपनियों ने किया 11,808 करोड़ का लॉटरी घोटाला!

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 19
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| जून 28 , 2017 , 16:17 IST | नई दिल्ली

पूर्वोत्तर के राज्य मिजोरम में 11, 808 करोड़ रुपए के लॉटरी घोटाले में राज्यसभा सांसद सुभाष चंद्रा के एस्सेल समूह से जुड़ी कंपनियां जांच के घेरे में हैं। दिसंबर 2016 को मिजोरम विधानसभा में पेश सीएजी (comptroller and auditor general of india) की रिपोर्ट के अनुसार साल 2012 से 2015 के बीच राज्य सरकार के लॉटरी संचालन में बड़ी लापरवाही और गड़बड़ियां देखी गईं, रिपोर्ट के मुताबिक सुभाष चंद्रा के एस्सेल सूमह से जुड़ी कंपनियों ने वित्तीय गड़बड़ियां कर राज्य सरकार को 11,000 करोड़ से ज्यादा के राजस्व का चूना लगाया। 

लॉटरी घोटाले की CBI जांच जरुरी- विपक्ष 

दिसंबर 2016 में पेश सीएजी रिपोर्ट के बाद राज्य की प्रमुख विपक्षी पार्टी मिजो नेशनल फ्रंट पूरे मामले पर सीबीआई जांच करवाने की मांग कर रही है। सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक राज्य सरकार के लचर रवैये ने लॉटरी वितरकों को आयकर बचाने के रास्ते दे दिए और भारी वित्तीय घाटा उठाया। 

सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक राज्य सरकार ने लॉटरी वितरक कंपनियों के साथ मिलकर ऐसा रेवन्यू शेयर मॉडल लागू किया जिससे लॉटरी वितरक कंपनियों को अप्रत्याशित लाभ मिला और राज्य सरकार को 11,000 करोड़ से ज्यादा का घाटा हुआ जो उसके एक साल के बजट से भी कहीं ज्यादा है। 

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टेंडर देने में हुई गड़बड़ी!

सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक लॉटरी वितरण करने वाली कंपनियों को टेंडर देने में भी सही प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी अधिकारियों की सांठगांठ से लॉटरी वितरक कंपनियों ने लॉटरी रेग्यूलेशन एक्ट 1998 और लॉटरी रेग्यूलेशन रुल्स 2010 के नियमों का जमकर उल्लंघन किया। सीएजी ने मिजोरम में साल 2010-11 से साल 2014-15 के बीच लॉटरी संचालन और राजस्व को हुए घाटे का अध्य्यन किया है। सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक टेंडर मनमाने तरीके से कंपनियों को दिए गए, इस प्रक्रिया में इस बात का ख्याल नहीं रखा गया कि टेंडर उन कंपनियों को दिए जाएं जो राज्य सरकार को लॉटरी संचालन की एवज़ में सबसे ज्यादा रेवेन्यू देने का लिखित करार करने को तैयार हों। 

 

कैसे हुआ घोटाला?

इस ख़बर को पढ़ने के बाद आप ये सोच रहे होंगे कि आखिर देश के पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम में 11,808 करोड़ का लॉटरी घोटाला हुआ कैसे? सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक सेंट्रल विजलेंस कमीशन की गाइडलाइन्स को दरकिनार करते हुए राज्य सरकार ने ऑनलाइन और पेपर लॉटरी बिजनेस करने वाली 4 कंपनियों को टेंडर बांट दिए, ये कंपनियां थीं M/S तीस्ता डिस्ट्रीब्यूटर्स, ई-कूल गेमिंग सॉल्यूशन्स प्राइवेट लिमिटेड, M/S एनवी इंटरनेशनल और समिट ऑनलाइन ट्रे़ड सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड। रिपोर्ट के मुताबिक टेंडर लेने वाली एक कंपनी M/S एनवी इंटरनेशनल के पास ऑनलाइन लॉटरी संचालित करने का इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं था तब भी उसे टेंडर दिया गया बाद में इस कंपनी ने टेंडर को सबलेट कर दिया और लॉटरी ड्रॉ के राइट्स ई-कूल गेमिंग सॉल्यूशन्स प्राइवेट लिमिटेड और समिट ऑनलाइन कंपनी को दे दिए जो कि राज्य सरकार से किए गए कॉन्ट्रेक्ट का सीधा सीधा उल्लंघन है। सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक ई-कूल गेमिंग सॉल्यूशन्स प्राइवेट लिमिटेड राज्य सभा सांसद और जी समूह के पूर्व चेयरमेन सुभाष चंद्रा से जुड़ी हुई कंपनी है जिसके बड़े शेयरधारक सुभाष चंद्रा के बेटे अमित गोयनका और भाई अशोक गोयल हैं। 

रिपोर्ट में ई-कूल गेमिंग सॉल्यूशन्स प्राइवेट लिमिटेड और पैन इंडिया नेटवर्क लिमिटेड कंपनी के बीच करीबी रिश्ता बताया गया है, बता दें पैन इंडिया नेटवर्क लिमिटेड सुभाष चंद्रा से जुड़े एस्सेल समूह की प्रमुख कंपनियों में से एक है। सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक मिजोरम में लॉटरी वितरण टेंडर लेने के बाद ई-कूल गेमिंग सॉल्यूशन्स प्राइवेट लिमिटेड ने ड्रॉ निकालने के अधिकार और ठेका पैन इंडिया नेटवर्क लिमिटेड को सबलेट कर दिया। सीएजी की रिपोर्ट से ये तथ्य भी बाहर आया कि पैन इंडिया नेटवर्क लिमिटेड लॉटरी बेचने से हो रही आय का हिस्सा महाराष्ट्र और सिक्किम सरकार को दे रही थी। सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक चारो कंपनियों ने लॉटरी आय से हुई कमाई 11,834.22 करोड़ मेें से महज़ 25.45 करोड़ रुपए राज्य सरकार को जमा कराए जबकि 11,808 करोड़ रुपए का कोई हिसाब नहीं दिया गया जो कि लॉटरी रेग्यूलेशन एक्ट और नियमों का सीधा उल्लंघन था। 

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एस्सेल समूह का लॉटरी बिजनेस

साल 2016 में  बीजेपी के सपोर्ट से राज्यसभा सांसद बनने वाले सुभाष चंद्रा के एस्सेल समूह का ऑनलाइन लॉटरी से पुराना नाता है। 90 के दशक के अंत और 20वीं सदी के शुरुआती वर्षों में भारत में लॉटरी बिजनेस ने अपने पैर फैलाना शुरु किए, चंद्रा ने ऑनलाइन लॉटरी बिजनेस की शुरुआत प्लेविन ब्रॉंड के बैनर तले शुरु की और सिक्किम में सबसे पहले ऑनलाइन लॉटरी वितरण का टेंडर हासिल किया। चंद्रा के ज़ी समूह के चैनलो ने 'खेलो इंडिया खेलो' की टैगलाइन के साथ प्लेविन और ऑनलाइन लॉटरी का टीवी पर खूब प्रचार किया। 

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जांच में लेटलतीफी

दिसंबर 2016 में मिजोरम विधानसभा में सीएजी रिपोर्ट टेबल होने के बाद से लगातार सिविल राइट्स ग्रुप और विपक्षी दल मामले की सीबीआई जांच करवाने की मांग कर रहे हैं लेकिन राज्य सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। सरकार के एक मंत्री ने तो सीएजी रिपोर्ट की सत्यता पर ही सवाल उठा दिए थे। 

ख़बर न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया ने ईमेल के ज़रिए पूरे मामले पर पुनीत गोयनका,सुभाष चंद्रा और एस्सेल समूह अधिकारियों से उनका पक्ष जानने की कोशिश की है जवाब मिलने पर स्टोरी में उनका पक्ष सम्मिलित कर अपडेट किया जाएगा।


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