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बाबू मोशाय! ज़िंदगी बड़ी होनी चाहिए लंबी नहीं...(राजेश खन्ना स्पेशल)

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जनवरी 1 , 1970 , 05:30 IST | मुंबई

बॉलीवुड इंडस्ट्री के पहले 'सुपरस्टार' राजेश खन्ना भले ही हमारे बीच ना हों, लेकिन उनकी यादें आज भी सबके जहन में तारो-ताजा हैं। 'काका' के नाम से ख्याति बटोरने वाले मशहूर राजेश खन्ना का जन्म 29 दिसंबर 1942 को हुआ। पंजाब के अमृतसर में जन्में जतिन खन्ना उर्फ राजेश खन्ना का रुझान बचपन से ही फिल्मों की ओर था।

वो एक्टर तो बनना चाहते थे लेकिन अपने पिता की मर्जी से। क्योंकि उनके पिता इस बात के सख्त खिलाफ थे। करियर के शुरुआती दौर में राजेश खन्ना रंगमंच से जुड़े और बाद में ऑल इंडिया टैलेंट कॉन्टेस्ट में हिस्सा लिया और फर्स्ट आए। राजेश खन्ना की सिने करियर की शुरुआत 1966 में चेतन आंनद की फिल्म 'आखिरी खत' से हुई।

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उसके बाद से फिल्म इंडस्ट्री में संघर्षो से भरा रहा उनका फ़िल्मी करियर। साल 1966 से 1969 तक राजेश खन्ना को सबसे ज्यादा संघर्ष करना पड़ा। इसके बाद राजेश खन्ना की एक्टिंग का सितारा फिल्म 'अराधना' से चमका। बेहतरीन गीत-संगीत और अभिनय से सजी राजेश की इस फिल्म को गोल्डन जुबली से नवाज़ा गया।

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इस फिल्म की कामयाबी ने राजेश खन्ना को स्टार बनाकर स्थापित कर दिया। इसके बाद राजेश खन्ना की फिल्मे हिट पर हिट होती चली गई। इन फिल्मो में 'कटी पतंग', 'अमर प्रेम', 'अनुराग', 'अजनबी', 'अनुरोध' और 'आवाज' फिल्मे शामिल हैं। 70 के दशक में राजेश खन्ना अपनी लोकप्रियता के शिखर पर जा पहुंचे और हिंदी फिल्म जगत के पहले सुपरस्टार के तौर पर उनको सम्मानित किया गया।

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उनके अभिनय के कायल सभी थे लेकिन टीनएज लड़कियों के बीच उनका क्रेज सबसे ज्यादा था। लड़कियों में राजेश का दीवानापन इस कदर चढ़ा की वें अपने खून से लव लेटर लिखा करती थीं और उससे ही अपनी मांग भी भर लिया करती थीं।1972 में उनकी फिल्म 'आनंद' आई।  इसमें राजेश खन्ना की एक्टिंग का नया रूप सामने आया।

इस फिल्म के एक डायलॉग 'बाबूमोशाय... हम सब रंगमंच की कठपुतलियां है जिसकी डोर ऊपर वाले की उंगलियों से बंधी हुई है कौन कब किसकी डोर खिंच जाए ये कोई नहीं बता सकता...' ने हर किसी के दिल पर आज तक राज कर रहा है।

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1969 से 1976 तक राजेश खन्ना का सबसे सुनहरा दौर गुजरा इस दौर में राजेश खन्ना ने जिन फिल्मों में भी काम किया उनमें से ज्यादातर फिल्में हिट ही साबित हुईं। लेकिन इसके बाद बॉलीवुड में अपना सिक्का आजमाने पहुंच चुके थे अमिताभ बच्चन।

बच्चन के आने के बाद परदे पर रोमांस का जादू फीका पड़ने लगा और उनकी फिल्में असफल होने लगीं। इसके बाद अभिनय में आयी एकरूपता से बचने के लिए राजेश खन्ना ने 80 के दशक से खुद को विभिन्न भूमिकाओं में पेश किया। साल 1980 में आई फिल्म 'रेडरोज' में उन्होंने उल्लेखनीय कार्य किया।

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इस फिल्म में राजेश खन्ना ने नेगेटिव किरदार निभाकर दर्शकों का ध्यान अपने ओर खींचा।राजेश खन्ना को उनके सिने करियर में कुल तीन बार फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया। राजेश खन्ना समाज सेवा के लिए राजनीति में अपना किस्मत आजमाने लगे और साल 1991 में कांग्रेस के टिकट मिलने पर नई दिल्ली की लोकसभा सीट से चुने गए।

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जनकरी के लिए बता दें राजेश खन्ना अपने चार दशक लंबे करियर में लगभग 125 फिल्मों में काम किया। अपनी एक्टिंग की जादू से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करने वाले किंग ऑफ रोमांस का 18 जुलाई 2012 को देहावसान हो गया।

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छुप गए सारे नज़ारे,राजेश खन्ना के उन गितों में है, जिसको आज भी हर कोई गुनगुनाता है...

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राजेश खन्ना के वो गाने जो हिट थे, हिट हैं और हिट रहेंगें...

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राजेश खन्ना के वो गाने जो हिट थे, हिट हैं और हिट रहेंगें...


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