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SC ने कहा- फांसी देना बर्बरता, मौत की सजा के तरीके पर केंद्र से मांगा जवाब

सतीश वर्मा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अक्टूबर 7 , 2017 , 08:52 IST | नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सजा-ए-मौत में फांसी दिए जाने को चुनौती देने वाली PIL पर सुनवाई की। SC ने इस पर केंद्र से 3 हफ्तों के भीतर जवाब मांगा है। पिटीशन में कहा गया कि सम्मानजनक मौत जीने के अधिकार का हिस्सा है और इसमें मुजरिम भी शामिल है। फांसी देने में लंबा दर्द और यातना झेलनी पड़ती है। फांसी दिया जाना बर्बरता है।
सुप्रीम कोर्ट ने सजा-ए-मौत के तरीके पर क्या कहा?

Supreme court

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने केंद्र को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। चीफ जस्टिस ने कहा, "कानून बनाने वाले इसमें बदलाव पर विचार कर सकते हैं, ताकि आरोपी जिसे मौत की सजा दी गई है... उसे शांति और बिना दर्द के मौत की सजा दी जा सके।

पिटीशन में क्या कहा गया

मुजरिम को भी सम्मानजनक मौत का हक

एडवोकेट ऋषि मल्होत्रा ने सुप्रीम कोर्ट में PIL दाखिल की है। उन्होंने कहा, "लॉ कमीशन ने भी अपनी 187th रिपोर्ट में मौजूदा मौत की सजा के तरीके को हटाने की बात कही है। कॉन्स्टिट्यूशन के आर्टिकल 21 (राइट टू लाइफ) में मुजरिम का भी अधिकार शामिल है कि उसे सम्मानजनक तरीके से मौत दी जाए, ताकि उसकी मौत कम दर्दनाक हो।'

Fansi

दूसरे तरीके इस्तेमाल करने वाले देशों में इजाफा

लॉ कमीशन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ऐसे देशों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है, जिन्होंने मौत की सजा में फांसी के तरीके को खत्म कर दिया है। वहां बिजली के झटके, गोली मारने और इंजेक्शन देने जैसे तरीके अपनाए जा रहे हैं। साफ तौर पर ये माना जाता है कि फांसी में बहुत ज्यादा फिजिकल टॉर्चर और दर्द है।'

फांसी को बदल कर नए तरीके अपनाए जा सकते हैं

सम्मानजनक तरीके से मौत जीने के अधिकार का हिस्सा है और मौजूदा मौत की सजा के तरीके में मुजरिम को फांसी दी जाती है। जिसमें लंबा दर्द और यातना झेलनी पड़ती है। मौजूदा प्रक्रिया को इंजेक्शन के जरिए मौत देने, गोली मारने, बिजली के झटकों या गैस चैम्बर्स में मौत देने से बदला जा सकता है। इसमें मौत बस चंद मिनटों में हो जाएगी।'

ये तरीका अमानवीय है

PIL में कहा गया, "CPC के सेक्शन 354 (5) को खत्म कर देना चाहिए, जिसमें कहा गया है कि जब किसी शख्स को मौत की सजा सुनाई जाए तो सजा में निर्देश दिए जाएं कि उसे मौत होने तक फांसी पर लटकाया जाए। मौत देने का ये तरीका अमानवीय, बर्बर और क्रूर है। ये यूनाइटेड नेशंस इकोनॉमिक एंड सोशल काउंसिल के रिजोल्यूशन के भी खिलाफ है।'

40 मिनट लगते हैं फांसी के पूरे प्रॉसेस में

मौत की सजा मेें मुजरिम की मौत बहुत जल्द और बहुत सीधे तरीके से होनी चाहिए। मौजूदा तरीके में कैदी को डेड डिक्लेयर करने में 40 मिनट लगते हैं। शूटिंग की प्रॉसेस में चंद मिनट भी नहीं लगते। इंजेक्शन देने में सबकुछ 5 मिनट में हो जाता है।"

 

 


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