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जब आधार को वैकल्पिक रखा गया तो सरकार जरूरी कैसे बना रही है: सुप्रीम कोर्ट

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अप्रैल 21 , 2017 , 18:34 IST | नयी दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड पर सवाल करते हुए कहा कि जब आधार को वैकल्पिक रखने का आदेश दिया जा चुका है तो केंद्र सरकार उसे जरूरी कैसे बना सकती है? आधार पर पिछले महीने सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा था कि सरकार और उससे जुड़ी एजेंसियां आधार कार्ड को सोशल वेलफेयर स्कीम्स के लिए जरूरी नहीं कर सकती हैं।

शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल ने बताया कि सरकार ने यह पाया है कि शेल कंपनियों को फंड्स डायवर्ड करने के लिए कई पैन कार्ड का उपयोग किया गया था और ऐसी चीजों को रोकने के लिए एक ही विकल्प है कि आधार कार्ड को जरूरी किया जाए।

दरअसल, शेल कंपनियां वो होती है जो सिर्फ कागजों पर चलती हैं और ये किसी तरह से कोई आधिकारिक कारोबार नहीं करती हैं, इन कंपनियों का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया जाता है।

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बता दें कि वर्तमान में केंद्र सरकार के 19 मंत्रालयों की 92 योजनाओं में आधार कार्ड का इस्तेमाल किया जा रहा है। जिसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को फटकार लगाते हुए कहा कि आधार को वैकल्पिक रखने का आदेश देने के बाद भी केंद्र सरकार इसे जरूरी कैसे कर सकती है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 26 अप्रैल को होगी।

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पिछली सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर, न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और एसके कौल ने कहा था कि,

आधार को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई के लिए 7 जजों की एक पीठ का गठन किया जाना है, लेकिन फिलहाल अभी ऐसा संभव नहीं है, इसके बारे में फैसला बाद में किया जाएगा। बता दें कि इस याचिका के पीछे नागरिकों की निजिता के अधिकारों के उल्लघंन का हवाला दिया गया है।


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