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पशु खरीद फरोख्त अधिसूचना पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, 4 हफ्तों में केन्द्र से मांगा जवाब

गोपाल कृष्ण, संवाददाता, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जून 15 , 2017 , 13:39 IST | नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने पशुओं के वध के लिए खरीद-फरोख्त रोकने संबंधी अधिसूचना पर नोटिस जारी कर चार सप्ताह में केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। हालांकि अदालत ने 23 मई को जारी अधिसूचना पर रोक लगाने से फ़िलहाल इनकार कर दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 11 जुलाई को होगी।

जस्टिस आर.के. अग्रवाल एवं जस्टिस संजय किशन कौल की अवकाशकालीन बेंच ने ऑल इंडिया जमायत-उल-कुरैश ऐक्शन कमेटी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।

 

याचिका का विरोध करते हुए केंद्र सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता पी.एस. नरसिम्हा ने कहा कि यह अधिसूचना अवैध तरीके से पशुओं के खरीद-फरोख्त पर रोक लगाने के लिए जारी की गई है, न कि कानून के दायरे में रहकर काम करने वाले कारोबारियों को परेशान करने के लिए।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने अधिसूचना जारी कर बाजारों से वध के लिए मवेशियों की खरीद-फरोख्त पर रोक लगाई है। जिसे देश की विभिन्न अदालतों में चुनौती दी जा रही है। इस संदर्भ में केरल हाईकोर्ट ने कहा है कि मवेशियों की खरीद-फरोख्त के संबंध में जारी नई अधिसूचना को कई लोगों ने गलत समझ लिया है।

कोर्ट ने अपने अवलोकन (Observation) में पाया कि 'मवेशियों के मांस खाने पर कोई प्रतिबंध नहीं है, लेकिन केंद्र सरकार की नई अधिसूचना (notification) केवल बड़े बाजारों के माध्यम से पशुओं के बड़े पैमाने की बिक्री पर रोक लगाता है। इसके साथ ही केरल हाईकोर्ट ने इस मामले में दखल देने से इनकार कर दिया लेकिन मद्रास हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए इस नई अधिसूचना पर रोक लगा दी और केंद्र-राज्य सरकारों को 4 हफ्ते में जवाब दाखिल करने को कहा है। देश भर में बीफ पर राजनीति गरम है।

दक्षिण भारत के कई शहरों में बीफ पार्टी का आयोजन कर कई राजनीतिक दल सरकार के इस नोटिफिकेशन पर विरोध जता चुके हैं। ऐसी ही एक बीफ पार्टी तमिलनाडु के कोयंबटूर में आयोजित की गई है। इतना ही नहीं, केंद्रीय शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू ने खुद के मांसाहारी होने का दावा करते हुए कहा है कि केंद्र सरकार की मंशा किसी को शाकाहारी बनाने की नहीं है। ये लोगों की इच्छा है कि वे क्या खाना चाहते हैं? इसे राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए। भारत विश्व के अग्रणी मांस निर्यातक देशों में से एक है।

क्या है अधिसूचना?

पशु क्रूरता निवारण अधिनियम-1960 के तहत केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने हाल में पशुओं की खरीद-फरोख्त के नए नियम बनाए हैं। इसमें प्रावधान किया गया है कि पशु बाजारों से मवेशी खरीदने वाले व्यक्ति को लिखित में वादा करना होगा कि वह उनका इस्तेमाल खेती में करेगा न कि उनका वध करेगा। इन मवेशियों में गाय, बैल, सांड, बछड़े-बछिया, भैंस, ऊंट आदि शामिल हैं। नई अधिसूचना में अंतरराज्यीय सीमा के 25 और अंतरराष्ट्रीय सीमा के 50 किलोमीटर के दायरे में पशु बाजार लगाने पर भी रोक लगाई गई है।


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