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IIT में दाखिले का रास्ता साफ, सुप्रीम कोर्ट ने एडमिशन और काउंसलिंग से रोक हटाई

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जुलाई 10 , 2017 , 16:55 IST | नयी दिल्ली

आईआईटी और एनआईटी में काउंसलिंग और दाखिले का रास्ता साफ हो गया है। सोमवार को इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने दाखिले से जुड़ी प्रक्रियाओं पर लगी रोक हटा ली। कोर्ट के इस फैसले से उन हजारों छात्रों को राहत मिली है जो इस मामले में कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहे थे।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में एक छात्र ने ग्रेस मार्क्स को लेकर याचिका दाखिल की थी, जिसमें उसने कहा था कि दो गलत जवाब दिये जाने पर सभी छात्रों को ग्रेस मार्क्स दिए जाने चाहिए, भले ही छात्र का जवाब गलत हो लेकिन उसकी कोशिश के आधार पर उसे मार्क्स मिलने चाहिए। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने बोनस अंक देने के विवाद पर सुनवाई करते हुए शुक्रवार को आईआईटी और एनआईटी में होने वाली काउंसलिंग पर अगले आदेश तक रोक लगा दी थी।

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सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से इन संस्थानों में दाखिला ले चुके 23,000 छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया था। कोर्ट ने आईआईटी में काउंसलिंग और दाखिले के संबंध में दायर होने वाली किसी भी रिट याचिका को स्वीकार करने पर भी सभी उच्च न्यायालयों पर प्रतिबंध लगा दिया था। कोर्ट ने कहा था कि जब तक बोनस अंक देने की वैधता के बारे में फैसला नहीं होता तब तक दाखिला ले चुके छात्रों का भविष्य अधर में रहेगा।

कोर्ट ने सभी उच्च न्यायालयों के समक्ष लंबित याचिकाओं और आईआईटी-जेईई 2017 की रैंक लिस्ट तथा परीक्षा में शामिल होने वाले सभी अभ्यथिर्यों को अतिरिक्त अंक देने को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं की जानकारी मांगी थी। आईआईटी-जेईई, 2017 की रैंक सूची रद्द करने संबंधी अर्जी पर न्यायालय ने 30 जून को मानव संसाधन विकास मंत्रालय को नोटिस जारी किया था।

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पिछली सुनवाई में IIT में दाखिले के लिए JEE परीक्षा के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और IIT को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। दरअसल IIT ने कैमिस्ट्री के एक गलत सवाल के लिए 3 ग्रेस अंक और गणित के एक गलत सवाल के लिए 4 ग्रेस अंक दिए हैं जो सभी को दिए गए हैं।

तमिलनाडु के वेल्लोर इलाके के एक छात्र ने सुप्रीम कोर्ट में ग्रेस अंक को चुनौती दी है और मांग की है कि मेरिट लिस्ट फिर से तैयार की जाए। याचिका में कहा गया है कि IIT ने उन छात्रों को भी ग्रेस अंक दिए हैं जिन्होंने उन सवालों को हल करने का प्रयास ही नहीं किया जबकि ग्रेस अंक सिर्फ उन्हें मिलने चाहिए जिन्होंने इन सवालों को छोड़ने की बजाए हल करने की कोशिश की। छात्र के मुताबिक इस ग्रेस अंकों की वजह से मेरिट लिस्ट प्रभावित हुई है और बहुत छात्रों को फर्क पड़ा है इसलिए दोबारा से मेरिट लिस्ट तैयार की जाए।


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