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सबरीमाला मंदिर केस: सुप्रीम कोर्ट ने मामला संवैधानिक पीठ को सौंपा

ललिता सेन, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अक्टूबर 13 , 2017 , 12:58 IST | नई दिल्ली

केरल के सबरीमाला मंदिर में 10-50 आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर लगे प्रतिबंध के मामले को सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को संवैधानिक पीठ को भेज दिया। अब संविधान पीठ इस पर फैसला करेगी कि क्या इस आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध भेदभावपूर्ण है और अनुच्छेद-14 के तहत मिलने वाले समानता के अधिकार का उल्लंघन है। 


मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति आर. भानुमति और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की सदस्यता वाली पीठ ने छह सवाल भी तैयार किए, जिन पर संवैधानिक पीठ विचार करेगी। 

संविधान पीठ यह तय करेगी कि क्या 10-50 आयु वर्ग की महिलाओं को मौजूदा प्रथा के तहत मंदिर में प्रवेश ना करने देना उचित है और क्या जैविक कारक महिलाओं को मंदिर में प्रवेश करने से रोकने का पर्याप्त आधार हैं। 

संवैधानिक पीठ यह भी जांच करेगी कि क्या यह प्रतिबंध केरल हिंदू सार्वजनिक स्थान पर पूजा अधिनियम का उल्लंघन है, जिसके तहत सभी महिलाओं को मंदिर में प्रवेश का अधिकार है। 

बता दें कि, सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी, 2017 में इस मामले पर फैसला सुरक्षित रखा था। कोर्ट में जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली 3 जजों की पीठ ने अमीकस क्युरी सहित संबंधित पक्षों से संवैधानिक पीठ से पूछे जाने वाले सवालों की सूची तैयार करने को कहा।

पीठ ने उस वक्त कहा था, 'सभी पक्षों के वकील सवाल तैयार करें जो कि संवैधानिक रूपरेखा के अनुरूप होने चाहिए। उन्हें संवैधानिक पीठ को भेजा जा सकता है।' कोर्ट ने शुक्रवार को इस महत्वपूर्ण केस पर फैसला सुनाते हुए इसे संवैधानिक पीठ के पास सुनवाई के लिए भेज दिया है।

SABRIMALA

सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हो रही है। याचिका में कहा गया है कि मंदिर में महिलाओं को प्रवेश ना करने देना उनके साथ भेदभाव करना है। 7 नवंबर, 2016 को केरल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी थी कि सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के समर्थन में है। शुरुआत में राज्य की एलडीएफ सरकार ने 2007 में महिलाओं के प्रवेश पर प्रगतिशील रुख बनाए रखा था जबकि कांग्रेस नेतृत्व वाली यूडीएफ सरकार ने इस फैसले को रद्द कर दिया था।

बता दें कि, सबरीमाला मंदिर में परंपरा के अनुसार, 10 से 50 साल की महिलाओं की प्रवेश पर रोक है। मंदिर के ट्रस्ट का कहना है कि 1500 साल से यहां महिलाओं के प्रवेश पर रोक है। मंदिर में महिलाओं के रोक के लिए कुछ धार्मिक कारण बताए जाते रहे हैं।


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