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स्कूलों में योग जरूरी करने की याचिका खारिज, कोर्ट ने कहा-इसे थोपा नहीं जा सकता

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अगस्त 8 , 2017 , 14:31 IST | नयी दिल्ली

सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि योग किसी पर थोपा नहीं जा सकता। न्यायमूर्ति मदन बी. लोकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अदालत इस पर कोई फैसला नहीं कर सकती कि स्कूलों में क्या सिखाया जाना चाहिए। अदालत ने कहा कि इस मामले में सरकार ही फैसला ले सकती है।

अदालत ने स्कूलों में कक्षा एक से आठ तक के छात्रों के लिए योग अनिवार्य करने का निर्देश देने की मांग संबंधी याचिकाएं खारिज करते हुए यह कहा। अदालत का यह फैसला एक वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय और दिल्ली भाजपा प्रवक्ता और वकील जे.सी. सेठ की दो याचिकाओं पर आया है।

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अदालत ने कहा, ‘‘स्कूलों में क्या पढ़ाया जाना चाहिए यह मौलिक अधिकार नहीं है।’’ उपाध्याय ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय, एनसीईआरटी, एनसीटीई और सीबीएसई को यह निर्देश देने की मांग की थी कि वे ‘‘जीवन, शिक्षा और समानता जैसे विभिन्न मौलिक अधिकारों की भावना को ध्यान में रखते हुए पहली से आठवीं कक्षा के छात्रों के लिए ‘योग और स्वास्थ्य शिक्षा’ की मानक किताबें उपलब्ध कराए।’’ सुप्रीम कोर्ट ने गत वर्ष 29 नवंबर को केंद्र से कहा था कि वह याचिका को एक अभिवेदन की तरह ले और इस पर फैसला करे।

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याचिका में कहा गया था, ‘‘राज्य का यह कर्तव्य है कि वह सभी नागरिकों खासतौर से बच्चों और किशोरों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराए। कल्याणकारी राज्य में यह राज्य का कर्तव्य होता है कि वह अच्छे स्वास्थ्य के अनुकूल परिस्थितियों को बनाए रखना सुनिश्चित करें।’’ इसमें कहा गया था कि सभी बच्चों को ‘योग और स्वास्थ्य शिक्षा’ दिए बिना या योग का प्रचार-प्रसार करने के लिए ‘राष्ट्रीय योग नीति’ तय किए बिना स्वास्थ्य के अधिकार को सुरक्षित नहीं किया जा सकता।


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