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सहारा-बिरला डायरी को पुख़्ता सुबूत नहीं माना जा सकता- सुप्रीम कोर्ट

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जनवरी 11 , 2017 , 21:04 IST | नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक अहम फैसला सुनाते हुए उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें पीएम मोदी पर कॉरपोरेट से करोड़ों की घूस लेने का आरोप लगाया गया था।

 

इस मामले में कोर्ट से FIR दर्ज करने और कोर्ट की निगरानी में SIT से जांच की मांग को खारिज कर दिया गया।

इस याचिका में गुजरात के मुख्यमंत्री रहते वक्त नरेंद्र मोदी समेत कई राजनेताओं पर इस डायरी का हवाला देते हुए घूस लेने का आरोप लगाया गया था और कोर्ट से इसकी जांच के लिए आदेश देने का आग्रह किया गया था।

अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि महज डायरी और कागजातों में नाम लिखे होने के आधार पर जांच के आदेश नहीं दिए जा सकते। कोर्ट के मुताबिक याचिका में दिए गए तथ्य स्वीकारयोग्य नहीं हैं, इनको पुख्ता सुबूत के तौर पर नहीं गिना जा सकता।

 

इस तरह के पेश दस्तावेजों और सामग्री के आधार पर संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के खिलाफ जांच नहीं हो सकती।



अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने इसका विरोध करते हुए कहा कि डायरी में लिखी बात कोई सबूत नहीं होती और ये कोई संज्ञेयनीय अपराध नहीं है और इस तरह डायरी में लिखी बातों को साबित करने के लिए सबूत भी होने चाहिए। अगर इस याचिका पर जांच के आदेश दिए गए तो देश भर में ऐसे केसों की भरमार हो जाएगी।


इससे पहले आयकर विभाग के छापों से संबंधित दस्तावेज के आधार पर आदित्य बिरला और सहारा समूह की कंपनियों पर नरेंद्र मोदी समेत अन्य राजनेता को रिश्वत देने का आरोप लगाने वाले गैर सरकारी संगठन ने पिछले गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि अगर सुप्रीम कोर्ट इस मामले में जांच का आदेश नहीं देता है तो कोई दूसरी जांच न्यायसंगत नहीं होगी।

 

याचिकाकर्ता संगठन सीपीआईएल ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा था कि आयकर विभाग की अप्रैजल रिपोर्ट, डायरी और ई-मेल साफ-साफ इशारे करती है कि राजनेताओं को रिश्वत दी गई थी, लिहाजा सुप्रीम कोर्ट को जांच का आदेश देना चाहिए।