अभी-अभी

धोनी की याचिका पर SC की टिप्पणी, अनजाने में धार्मिक भावनाएं आहत करना अपराध नहीं

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
220
| अप्रैल 22 , 2017 , 14:24 IST | नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने आईपीसी की धारा 295ए पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अनजाने में अगर किसी व्यक्ति से धर्म का अपमान होता है तो उस पर मुकदमा नहीं चलाया जाना चाहिए। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों वाली पीठ ने कहा कि अनजाने में, लापरवाही से, अनचाहे तरीके से या बिना किसी गलत इरादे से अगर धर्म का अपमान होता है या किसी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती है तो ये कानून की धारा 295ए के अंतर्गत नहीं आता।

Supreme_Court_India_CSR_SLSV

 

आईपीसी की धारा 295ए के अनुसार धार्मिक भावनाएं आहत करने पर कम से कम 3 साल की सजा का प्रावधान है।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के द्वारा उन लोगों की रक्षा होगी जिन्हें राजनीतिक लोगों द्वारा या फिर जानबूझकर निशाना बनाया जाता हैं।

Vishnu-Dhoni_DC_0_0_0_0_0_0_0_0_0_0_0_0_0

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की उस याचिका पर सुनवाई करते हुए ये फैसला सुनाया जिसमें धोनी पर धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप लगा था।

गौरतलब है कि साल 2013 में एक बिजनेस पत्रिका के कवर पेज पर धोनी को भगवान विष्णु के रूप में दिखाया गया था। जिसके बाद लोगों ने उनकी इस फोटो के जरिए भावनाएं आहत करने का आरोप लगाया था। जिसकी सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि हर किसी को धारा 295ए के तहत सजा नहीं दी जा सकती।

Ipc

इस धारा के अनुसार सिर्फ उन्हीं लोगों को सजा दी सकती है जो जानबूझकर किसी व्यक्ति विशेष की धार्मिक भावनाओं को आहत करते हैं।


कमेंट करें