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सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर मामले पर सुनवाई टली, 5 दिसंबर को अगली सुनवाई

गोपाल कृष्ण, संवाददाता, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अगस्त 11 , 2017 , 17:41 IST | नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले की सुनवाई 5 दिसंबर तक के लिए टाल दी है। जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने सभी पक्षकारों को सम्बंधित दस्तावेज के अनुवाद के लिए 3 महीने का समय दिया है। कोर्ट ने केस से संबंधित 9000 पेज के फैसले ओर 9000 से ज्यादा पेज के दस्तावेजों का अंग्रेजी में अनुवाद 12 सप्ताह के भीतर करने के लिए कहा है। ये दस्तावेज 8 भाषाओं (हिंदी, उर्दू, फ़ारसी, पंजाबी, संस्कृत इत्यादि )में हैं। कोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि अनुवाद के लिए कोई तारीख आगे नहीं बढ़ाई जाएगी। यूपी सरकार हाई कोर्ट में हिंदी में रखी गई दलीलों का अनुवाद करेगी। कोर्ट ने कहा कि मुख्य पक्षों को सुनने के बाद सुब्रमण्यम स्वामी की अर्जी पर सुनवाई होगी। स्वामी ने पूजा के अधिकार का हवाला देकर याचिका दायर की है।

बता दें कि इस मामले से जुड़े पक्षकारों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी है। सात वर्ष बाद सुप्रीम कोर्ट इस मामले में सुनवाई हुई। मालूम हो कि पिछले दिनों बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष इस मामले का उल्लेख करते हुए जल्द सुनवाई की गुहार लगाई थी। जिस पर चीफ जस्टिस ने कहा था कि वह जल्द ही इस निर्णय लेंगे। जुलाई के पहले हफ्ते में सुप्रीम कोर्ट ने स्वामी को भी इस मामले में पक्षकार बनने की इजाजत दे दी है। स्वामी ने यह भी कहा था कि हाई कोर्ट के फैसले को लेकर दायर मुख्य अपील पिछले सात वर्षों से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है लिहाजा इस पर तत्काल सुनवाई होनी चाहिए। स्वामी ने इस मामले में याचिका दायर कर उस जगह पर पूजा करने की इजाजत देने केलिए गुहार की है।

गौरतलब है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने वर्ष 2010 में विवादित स्थल के 2.77 एकड़ क्षेत्र को सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लल्ला के बीच बराबर-बराबर हिस्से में विभाजित करने का आदेश दिया था।

Babri

बता दें कि, कुछ महीने पहले सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को अदालत से बाहर समाधान निकालने की संभावना तलाशने के लिए कहा था। इसे लेकर पक्षकारों की ओर से प्रयास किए गए लेकिन समाधान नहीं निकल सका। लिहाजा सुप्रीम कोर्ट को मैरिट के आधार पर इस विवाद का निपटारा करना पड़ रहा है। अयोध्या विवाद मामले में शिया वक़्फ़ बोर्ड ने 1946 के निचली अदालत के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। जिसमें कोर्ट ने 1946 में शिया वक़्फ़ बोर्ड के उस दावे को खारिज कर दिया था जिसमें उन्होंने कहा था कि बाबरी मस्ज़िद को बाबर ने नहीं बल्कि मीर बकी ने बनवाया था। इस मामले के 71 सालों के बाद अब शिया वक़्फ़ बोर्ड ने उस फैसले को चुनौती दी है। इस दौरान शिया वक़्फ़ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में पहली बार स्वीकार किया कि राम मंदिर को तोड़कर बाबरी मस्जिद का निर्माण किया गया था। साथ ही ये मस्जिद बाबर ने नहीं मीर बकी ने बनवाई थी। शिया वक्फ बोर्ड ने यह भी कहा कि इस जमीन को लेकर सुन्नी वक्फ बोर्ड 1945 में ही केस हार गया था और तब से राम जन्मभूमि पर चल रहे केस में मुसलमानों का पक्ष सुन्नी वक्फ बोर्ड ही रख रहा है।


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