नेशनल

SC ने माना केजरीवाल को दिल्ली का बॉस लेकिन पूर्ण राज्य का दर्जा मिलना मुमकिन नहीं

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
1392
| जुलाई 4 , 2018 , 11:41 IST

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और एलजी के अधिकारों पर चल रही खीचतान के बीच आज सुप्रीम कोर्ट के 3 जजों ने शर्तों के साथ दिल्ली का बॉस दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को माना है। सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों ने अपनी टिप्पणी में कहा कि जनमत के साथ अगर सरकार का गठन हुआ है, तो उसका अपना महत्व है। जजों ने कहा कि एलजी को दिल्ली सरकार की सलाह से काम करना चाहिए।

इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलना मुमकिन नहीं है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने टिप्पणी करते हुए कहा कि उपराज्यपाल को दिल्ली सरकार के साथ मिलकर काम करना चाहिए। पुलिस, जमीन और पब्लिक ऑर्डर के अलावा दिल्ली विधानसभा कोई भी कानून बना सकती है।

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि लोकतंत्र में रियल पावर चुने हुए प्रतिनिधियों में होनी चाहिए। विधायिका के प्रति वो जवाबदेह हैं। लेकिन दिल्ली के स्पेशल स्टेटस को देखते हुए बैलेंस बनाना जरूरी है। मूल कारक ये है कि दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि LG मैकेनिकल तरीके से सारे मामलों को राष्ट्रपति को नहीं भेजेंगे। इससे पहले वो अपना दिमाग लगाएंगे। सरकार के प्रतिनिधियों को सम्मान दिया जाना चाहिए।

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि राज्य को बिना किसी दखल के कामकाज की आजादी हो। चीफ जस्टिस और दो अन्य जजों ने कहा कि दिल्ली सरकार को हर फैसला एलजी को बताना होगा। हालांकि, हर मामले में एलजी की सहमति जरूरी नहीं।

सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और अन्य दो जजों ने कहा कि एलजी को दिल्ली सरकार के साथ सौहार्दपूर्वक काम करना चाहिए। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा, हमने सभी पहलुओं - संविधान, 239एए की व्याख्या, मंत्रिपरिषद की शक्तियां आदि - पर गौर किया।
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा, हमने सभी पहलुओं - संविधान, 239एए की व्याख्या, मंत्रिपरिषद की शक्तियां आदि - पर गौर किया।

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा, संविधान का पालन सबका कर्तव्य है, सभी संवैधानिक फंक्शनरीज़ के बीच संवैधानिक भरोसा होना चाहिए, और सभी को संविधान की भावना के तहत काम करना चाहिए।

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा, संविधान के मुताबिक प्रशानिक फैसले भी सबका सामूहिक कर्तव्य, और सभी संवैधानिक पदाधिकारियों को संवैधानिक नैतिकता को बरकरार रखना चाहिए।

क्या है अनुच्छेद 239AA-:

दिल्ली केंद्र शासित प्रदेश

दिल्ली की अपनी विधानसभा, अपना मुख्यमंत्री

प्रशासक उपराज्यपाल होंगे

उपराज्यपाल राष्ट्रपति की ओर से काम करेंगे

विधानसभा के पास भूमि, लॉ एंड ऑर्डर, पुलिस अधिकार नहीं

सीएम, मंत्रिमंडल की मदद और सलाह से फ़ैसला करेंगे LG

कहीं ये नहीं लिखा कि LG सलाह मानने को बाध्य

असहमति पर मामला राष्ट्रपति के पास जाएगा

राष्ट्रपति का फ़ैसला बाध्यकारी होगा

पांच जजों की बेंच ने सुनाया फैसला-:

- चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा
- जस्टिस एक सीकरी
- जस्टिस एएम खानविलकर
- जस्टिस डीवाय चंद्रचूड़
- जस्टिस अशोक भूषण


कमेंट करें