विज्ञान/टेक्नोलॉजी

दुनिया की सबसे बड़ी लिथियम बैटरी बनाएगी 'टेस्ला', 3000 घरों में होगी पावर सप्लाई

कीर्ति सक्सेना, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 1
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| जुलाई 8 , 2017 , 16:54 IST | सिडनी

अमेरिका की कार निर्माता और क्लीन एनर्जी की दिग्गज कंपनी टेस्ला, फ्रांस की ऊर्जा सेवा कंपनी नियोइन की भागीदारी से दक्षिण ऑस्ट्रेलिया के लिए दुनिया की सबसे बड़े लिथियम आयन बैटरी बनाएगी। यह बैटरी बिजली की भारी किल्लत झेलने वाले साउथ ऑस्ट्रेलिया के लिए बैकअप का काम करेंगी। इस बात की पुष्टि टेस्ला के सीईओ इलोन मस्क ने शुक्रवार को दी।

ख़बरों के मुताबिक, यह बैटरी नियोइन के हार्न्‍सडेट वाइंड फार्म से प्राप्त ऊर्जा को स्टोर करेगी। यह 100 मेगावॉट क्षमता वाली बैटरी नवीनीकृत ऊर्जा से 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराएगी, और अपातकाल के दौरान बैकअप की सुविधा भी देगी।

हालांकि यह कॉन्ट्रैक्ट टेस्ला के लिए बहुत बड़ी चुनौती साबित होने वाला है। इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत टेस्ला को 100 दिन के भीतर 100 मेगावॉट की बैटरियां बनाकर देनी होगी। इस तरह के प्रॉजेक्ट को पूरा करने में अमूमन 6 महीने का वक्त लगता है लेकिन टेस्ला का कहना है कि वह इसे 3 महीने में ही पूरा करके दे देगी। टेस्ला के इसी आत्मविश्वास के कारण ही उसे अन्य कंपनियों पर तरजीह भी दी गई है।

टेस्ला के सीईओ एलन मस्क ने कहा,

क्या कोई और यह काम कर पाएगा? अगर कोई ऐसी बैटरियां बना भी दे तो क्या वे काम करेंगी? हम ऐसी बैटरियां बनाकर देने जा रहे हैं।' इस बैटरी को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह 3000 घरों को बिजली दे सकती है।

मस्क ने यह भी बताया कि ,

अगर इस कॉन्ट्रैक्ट को पूरा कर पाने में सफल नहीं होते हैं तो उसे 50 मिलियन डॉलर का नुकसान होगा क्योंकि इस स्थिति मे टेस्ला को ये बैटरियां फ्री में देनी पड़ेंगी।

Elon-musk

प्रदूषण से परेशान साउथ ऑस्ट्रेलिया बीते कुछ समय से अपने कोल प्लांट्स को बंद करना चाहता है। इसलिए वह अपना फोकस सोलर और विंड एनर्जी पर रखना चाहता है। टेस्ला इन बैटरियों को भी एक विंड एनर्जी प्लांट पर ही बनाएगा। साउथ ऑस्ट्रेलिया की सबसे बड़ी समस्या बारिश होने या हवा न चलने के समय के लिए एनर्जी बचा कर रखना है। वहां बैकअप एनर्जी रखने की जगह न होने के कारण ज्यादा मात्रा में एनर्जी प्रॉडक्शन भी व्यर्थ जा सकता है।


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