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सावन का महीना शुरू, शिव मंदिरों में गूंज रहे हैं भोलेनाथ के जयकारे

श्वेता बाजपेई, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जुलाई 10 , 2017 , 15:33 IST | नई दिल्ली

सावन का पहला दिन और पहला सोमवार 10 जुलाई से शुरू हो गया है। अबकी सावन अद्भुत संयोग लेकर आया है क्योंकि इस बार के सावन में पांच सोमवार है। इसकी शुरुआत सोमवार से हुई है और समापन भी सोमवार को ही होगा। ये शुभ संयोग कई सालों में एक बार आता है। आज से कांवड़ यात्रा भी शुरू हो गई और देश भर के शिव मंदिरों में भोलेनाथ के जयकारे गूंज रहे हैं।

उज्जैन के महाकालेश्वर में सुबह चार बजे भस्म आरती हुई। मंदिर में सुबह से ही भक्तों का ताँता लगा हुआ है। भीड़ ऐसी कि महाकाल मंदिर से लेकर क्षिप्रा नदी के किनारे तक महाकाल के भक्त ही भक्त दिखाई दे रहे है । यह सावन का पहला सोमवार है, इसलिए सभी भक्त भोलेनाथ खुश करने में लगे हुए है । कोई भी भक्त इस खास मौके से पीछे नहीं रहना चाहता है।

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वाराणसी में बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए गंगा घाट से लेकर मंदिर तक भोले के भक्तों की भारी भीड़ दिखाई दी। प्रशासन ने भारी भीड़ को देखते हुए सावन के सोमवार पर नर्सरी से  इंटरमीडिएट तक के स्कूल बंद रखने के आदेश दिए हैं।

भोपाल के मंदिरों में भी सुबह से ही भक्तों का तांता लगना शुरू हो गया। भक्तों ने शिवलिंग पर जल और फूल चढ़ाकर पूजा  अर्चना की। 

वहीँ राजधानी लखनऊ के डालीगंज स्थित मनकामेश्वर मंदिर में सुबह से भगवान शिव के दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ लगी हुई है। इलाहाबाद में शिव के धाम पर जलाभिषेक के लिए जल भरने के ल‍िए सुमेर घाट पर काफी संख्या में कांवरिया पहुंचे है। कानपुर के परमट के आनंदेश्वर मन्दिर में शिव के दर्शन के ल‍िए लाखो की संख्या में श्रद्धालुओं ने स्नान किया।

इस बार का सावन कुछ ख़ास

हिंदू कैलेंडर के 12 माह में से सावन का महीना अपनी विशेष पहचान रखता है। इस दौरान व्रत, दान व पूजा-पाठ करना अति उत्तम माना जाता है व इससे कई गुणा फल भी प्राप्त होता है। इस बार पहला सोमवार सर्वार्थ सिद्धि योग में शुरू होगा और आखिरी सोमवार के सर्वार्थ सिद्धि योग में खत्म भी होगा। सर्वार्थ सिद्धि योग का समय़ बहुत ही शुभ माना जाता है। सर्वार्थ सिद्धि योग मतलब होता है अपने आप में सिद्ध। अगर आप इस दिन कोई पूजा या हवन-यज्ञ करेंगे तो आपको काफी फायदा मिलेगा।

किन किन बातों का रखे ध्यान ?

सावन के सोमवार के दिन में एक समय ही भोजन करना चाहिए। साथ ही भगवान भोलेनाथ के साथ पार्वती जी की पुष्प, धूप, दीप और जल से पूजा करनी चाहिए। इसके बाद भगवान शिव को तरह-तरह के नैवेद्य अर्पित करने चाहिए जैसे दूध, जल, कंद मूल आदि। सावन के हर सोमवार को भगवान शिव को जल अवश्य चढ़ाएं इससे भगवान शिव खुश होते है इसके साथ ही रात को जमीन पर सोएं। इस तरह से सावन के प्रथम सोमवार से शुरु करके कुल नौ या सोलह सोमवार इस व्रत का पालन करना चाहिए लेकिन अगर आप नौ या सोलह सोमवार व्रत नहीं रख पा रहे है तो सोमवार के पांच या चार सोमवार भी व्रत रखना काफी होगा ।


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