नेशनल

1984 सिख दंगा: केंद्र सरकार ने SC को सौंपी SIT की रिपोर्ट, 199 मामलों की फाइल बंद

गोपाल कृष्ण, संवाददाता, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
130
| अगस्त 2 , 2017 , 19:51 IST | नयी दिल्ली

1984 सिख दंगा मामले में केंद्र सरकार ने एसआईटी की ओर से बंद किये हुए केस की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी है। रिपोर्ट में बताया गया कि अभी तक 199 मामलों में एसआईटी ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की है। दंगा पीड़ितों की ओर से वकील एचएस फुल्का ने कोर्ट को बताया कि 51 ऐसे दूसरे मामलों में भी एसआईटी ने जांच बन्द कर दी है और अभी सिर्फ 9 मामलों में जांच बाकी है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि 16 अगस्त को वो बताए कि क्या एसआईटी जिन मामलों को बंद कर चुकी है, उनकी फिर से समीक्षा के लिए क्या मॉनिटरिंग कमेटी बनाई जाए? 

Supreme_Court_India_CSR_SLSV

16 अगस्त को ही सुप्रीम कोर्ट कानपुर में 127 सिखों के कत्लेआम की एसआईटी जांच की अर्जी पर सुनवाई करेगा। ये आदेश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने दिया है। दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी के सदस्य गुरुदयाल सिंह कहलों ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर 1984 के दंगों की जांच एसआइटी से कराने की मांग की है ताकि दंगा पीडितों को जल्दी न्याय मिल सके। 

Riots

(फाइल फोटो)

पिछली सुनवाई ने दौरान कहा था कि 1984 के दंगों की जांच के लिए गठित केंद्र सरकार की एसआइटी ने कुल 293 मामलों की जांच परख की और उसमें से 199 को बंद करने का फैसला किया है। उन्होंने सरकार के हलफनामे का जिक्र करते हुए कहा था कि 35 में से 28 मामलों में प्रारंभिक जांच पूरी हो चुकी है जबकि बाकी बचे 7 पर अभी एसआइटी विचार कर रही है। एसआइटी रिपोर्ट के मुताबिक उसने 59 मामलों को आगे जांच के लिए छांटा था जिसमें से जांच करने के बाद 42 को बंद कर दिया है। चार मामलों में अदालत में आरोपपत्र दाखिल कर दिया गया है बाकी के 13 मामलों पर अभी एसआइटी विचार कर रही है। 

1984-scorched-town

(फाइल फोटो)

आपको बता दें कि एसआईटी का कार्यकाल 11 अगस्त तक है। 199 केसों की जांच बंद करने के बारे में उसने कहा था कि ये केस 33 साल पुराना है। इन केसों की जांच इसलिए बंद करनी पड़ी क्योंकि इन केसों के बारे में पता ही नहीं चल पाया। इससे पहले की सुनवाई में सरकार ने कोर्ट के आदेश पर 1984 के दंगों की एसआइटी द्वारा की जा रही जांच के बारे में कोर्ट में रिपोर्ट दाखिल की थी और उसमें केसों का ब्योरा दिया था।





कमेंट करें