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वित्त मंत्री अरुण जेटली बोले, विकास चाहिए तो देनी पड़ेगी उसकी कीमत

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अक्टूबर 1 , 2017 , 16:11 IST | नई दिल्ली

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने विकास की मांग कर रहे लोगों को कहा कि जो लोग देश के विकास की मांग करते हैं, उन्हें इसकी कीमत भी चुकानी होगी। इसके साथ ही कहा कि विकास के लिए पैसों की जरूरत होती है, हालांकि इसे ईमानदारी से खर्च किया जाना चाहिए।

नैशनल अकैडमी ऑफ कस्टम्स एक्साइज ऐंड नारकोटिक्स के स्थापना दिवस और भारतीय राजस्व सेवा अधिकारियों (सी एंड सीई) के 67वें बैच के पासिंग आउट कार्यक्रम में बोलते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि 'रेवेन्यू गवर्नेंस की लाइफलाइन' है। इसके माध्यम से देश को विकासशील से विकसित राष्ट्र में बदला जा सकता है।

उन्होंने कहा कि ऐसे समाज में करदाता न होने की ज्यादा चिंता नहीं की जाती, वहां अब लोग धीरे-धीरे टैक्स देने के महत्व को समझ रहे हैं, जो कि समय के साथ आता है। इसी के चलते करों को एक कर दिया गया है। एक बार जब बदलाव स्थापित हो जाएंगा तो हमारे पास सुधार के लिए समय और जगह दोनो होगी।

जेटली ने कहा कि देश इस समय इनडायरेक्ट टैक्स की तरफ चल रहा है। कुछ वर्ग ही है जो डायरेक्ट टैक्स देते है जबकि इनयारेक्ट टैक्स हर एक के ऊपर एक बोझ है। यही कारण है कि हम अपनी वित्तीय नीतियों में कोशिश करते हैं कि बेसिक उत्पादों पर कम से कम टैक्स लगाए।

जेटली के मुताबिक, मौजूदा जीएसटी प्रणाली के कर स्लैब तभी घटाए जाएंगे, जब राजस्व निर्धारित सीमा से अधिक आएगा। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने एक जुलाई से देशभर में सभी अप्रत्यक्ष करों के स्थान पर एक नई कर प्रणाली जीएसटी लागू की है। 

मौजूदा समय में देश में कर के चार स्लैब यानी पांच प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत हैं। इसके साथ ही जीएसटी लागू होने के शुरुआती पांच वर्षो में राज्य सरकारों को होने वाले राजस्व घाटे की भरपाई के लिए कार, बोतलबंद पेय, तंबाकू उत्पाद जैसे लग्जरी सामानों पर अतिरिक्त कर का भी प्रावधान है। जीएसटी के तहत 81 फीसदी सामानों पर 18 फीसदी या इससे कम कर है और सिर्फ 19 फीसदी सामानों पर अधिकतम 28 फीसदी कर है।

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