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Alert: जीका वायरस ने दी भारत में दस्तक, WHO ने अहमदाबाद में की 3 मामलों की पुष्टि

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मई 27 , 2017 , 20:20 IST | नई दिल्ली

दुनिया के कई हिस्सों में तबाही मचाने के बाद जीका वायरस ने भारत में भी दस्तक दे दी है। इस खतरनाक वायरस की मौजूदगी के शुरूआती प्रमाण गुजरात के अहमदाबाद में मिले हैं। जहां तीन लोगों के जीका वायरस से प्रभावित होने की पुष्टि WHO ने भी कर दी है।

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अहमदाबाद में जीका वायरस के होने की पहली खबर जनवरी में सामने आई थी, जो अबतक 3 लोगों तक पहुंच चुका है। जनवरी माह में जीका ने अपना पहला शिकार एक गर्भवती महिला को बनाया। जीका वायरस से प्रभावित सभी तीनों लोग अहमदाबाद के बापूनगर इलाके के हैं। डब्ल्यूएचओ की साइट के मुताबिक देश के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने गुजरात में अहमदाबाद के बापूनगर इलाके में जीका वायरस के तीन मामले पाए हैं। अहमदाबाद के बीजे मेडिकल कॉलेज में आरटी-पीसीआर टेस्ट के माध्यम से जीका वायरस के मामलों की पुष्टि की गई है।

 

पूरी दुनिया में खौफ फैलाने वाली बीमारी जीका अब भारत में भी पैर पसारने लगी है । कुछ दिन पहले ही एक रिपोर्ट में ये बात सामने आई थी कि भारत समेत दक्षिण एशियाई देश इबोला और जीका जैसी बीमारियों के लिए काफी संवेदनशील हैं। इन देशों में ऐसी बीमारी से लड़ने के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था अपर्याप्त है।

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रिपोर्ट में कहा गया था कि भारत समेत दक्षिण एशियाई देशों में जीका और इबोला जैसी बीमारियों से लड़ने के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं अपर्याप्त हैं। ये क्षेत्र पहले से ही एचआईवी, मलेरिया, डेंगू जैसी बीमारियों की मार झेल रहे हैं। ऐसे में अगर इबोला जैसी खतरनाक बीमारी इन देशों में फैलती है तो वो महामारी का रूप ले सकती है।

 

ब्रिटिश मेडिकल जर्नल बीएमजे में प्रकाशित दक्षिण एशिया में स्वास्थ्य पर 12 विश्लेषणों के संग्रह में कहा गया था-

1960 के दशक में कई दक्षिण एशियाई देशों में डेंगू के संक्रमण के छिटपुट मामले देखे गए, लेकिन नियमित महामारी 1990 के दशक की शुरूआत में भारत और श्रीलंका में देखी गई। भारत और श्रीलंका में 40 वर्ष की आयु तक 90 से 95 फीसदी वयस्क डेंगू के विषाणु से प्रभावित हो चुके होते हैं जबकि 41 फीसदी चिकनगुनिया से संक्रमित हो चुके हैं।

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भारतीय एक्सपर्ट ने भी माना है कि ईबोला और जीका संक्रमण का जलवायु से कोई लेना-देना नहीं है। ये वायरस भारतीय जलवायु में भी उतनी ही तेजी से फैल सकता है, जितनी तेजी से दूसरे देशों की जलवायु में। ये संक्रमण की बीमारी है। ये मरीज या उसके शरीर से बाहर निकलने वाले पदार्थों जैसे खून, लार, मल-मूत्र आदि के संपर्क में आने पर ही यह वायरस फैलता है।


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