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बेबाक बातें, मस्ती भरे सुर तभी तो आप हैं संगीत की 'आशा' (आशा भोसले जन्मदिन विशेष)

आरती यादव, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| सितंबर 8 , 2017 , 08:55 IST | मुंबई

आशा भोसले को हिंदी सिनेमा में किसी पहचान की जरूरत नहीं है। वह खुद संगीत प्रेमियों के लिए एक प्रेरणा और मिसाल हैं। वह फिल्म इंडस्ट्री में आशा ताई के नाम से भी जानी जाती हैं। उनकी विशेषता है कि उन्होंने शास्त्रीय संगीत, गजल और पॉप संगीत हर क्षेत्र में अपनी आवाज़ का जादू बिखेरा है उन्होंने अब तक के अपने फ़िल्मी सफर में 16000 गानों में अपनी आवाज दी है। वह सिर्फ हिंदी में नहीं बल्कि मराठी, बंगाली, गुजराती, पंजाबी, तमिल, मलयालम, अंग्रेजी और रूसी भाषायोँ में गाने गाती हैं। 

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पृष्ठभूमि 

आशा भोसले का जन्म 8 सितंबर 1933 को  महाराष्ट्र के ‘सांगली’ में हुआ था। इनके पिता दीनानाथ मंगेशकर प्रसिद्ध गायक एवं नायक थे। उनके पिता ने बेहद छोटी उम्र से ही दोनों बहनों को संगीत की तालीम देना शुरू कर दिया था। जब आशा ताई महज 9 वर्ष की थी, तभी उनके पिता की मृत्यु हो गयी। पिता की मृत्यु के बाद उनका पूरा परिवार मुंबई आकर रहने लगा। उनकी एक बड़ी बहन हैं लता मंगेशकर जो हिंदी सिनेमा में स्वर कोकिला के नाम से जानी जाती हैं। पिता की मृत्यु के बाद दोनों बहनों के कंधो पर परिवार का बोझ आ गया। जिस कारण उनकी बड़ी बहन लता जी ने गाना और फिल्मों मे अभिनय शुरू कर दिया।

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निजी जीवन और एवं विवाह

आशा भोसले की पहली शादी 16 वर्ष की उम्र में उनसे बड़े गणपत राव भोसले से हुई। उनकी यह शादी परिवार की इच्छा के विरुद्ध हुई थी, जिस कारण अपने घर भी छोड़ना पड़ा था। आशा जी का यह विवाह बेहद बुरी तरह असफल साबित हुआ था। शादी टूटने के बाद वह अपने बच्चों के साथ अपने घर आ गयी। आशा जी ने दूसरी शादी राहुल देव बर्मन से की। यह विवाह आशा जी ने राहुल देव बर्मन के अंतिम सांसो तक सफलतापूर्वक निभाया। आशा जी की पहली शादी से उन्हें तीन बच्चे हैं। दो बेटे और एक बेटी।

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आशा भोसले और लता मंगेशकर

बचपन के दिनों में आशा आशा भोसले अपनी बहन लता के बेहद करीब थीं, लेकिन जब उन्होंने लता के निजी सचिव गणपतराव भोसले के साथ भागकर शादी की, तो लता उनकी इस कदम से बेहद नाराज हो गई और उन्होंने कई सालों तक उनसे बातचीत बंद कर दी। आशा को अपने करियर की शुरुआत में काफी स्ट्रगल करना पड़ा। उस जमाने में गीता दत्त, शमशाद बेगम और लता मंगेशकर का खूब नाम हुआ करता था। जब ये तीनों कोई गाना छोड़ देते तो वो आशा आशा भोंसले को दिया जाता था। इसी के चलते अफवाह थी कि आशा ताई, लता जी को अपना कॉम्पटीटर मानने लगी थीं लेकिन आशा भोंसले ने अपनी अलग पहचान बनाईं। सालों के बाद दोनों बहनें एक साथ मंच पर नजर आईं थीं।

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करियर

आशा भोसले ने अपने करियर की शुरुआत में उन्हें बेहद कड़ा संघर्ष करना पड़ा,उन्होंने अपने शुरूआती करियर में बी-सी ग्रेड की फिल्मों के लिए पार्श्व गायकी की। आशा भोंसले ने अपना पहला गीत वर्ष 1948 में सावन आया फिल्म चुनरिया में गाया।

आशा भोसले जी के गायिकी के कैरियर मे चार फिल्मे मिल का पत्थर, साबित हुई- नया दौड (1957), तीसरी मंजिल (1966), उमरॉव जान (1981) और रंगीला (1995)। नया दौर (1957):- आशा भोसले जी की पहली बड़ी सफल फिल्म बी. आर. चोपड़ा की ‘नया दौर’(1957) थी। मो. रफी के साथ गाए उनके गीत यथा ‘माँग के हाथ तुम्हारा....’, ‘साथी हाथ बढ़ाना...’ और ‘उड़े जब जब जुल्फे तेरी...’ शाहिर लुधियानवी के द्वारा लिखित और ओ. पी. नैयर द्वरा संगीतबद्ध ने उन्हें एक खास पहचान दी। 

आशा जी ने ओ.पी. नैयर के साथ पहले भी काम किया था पर यह पहली फिल्म थी जिसके सारे गीत आशा जी प्रमुख अभिनेत्री के लिए गाई थी। प्रोड्यूसर बी. आर. चोपडा ने नया दौर में उनकी प्रतिभा की पहचान कर आने वाली बाद की फिल्मों मे पुन: मौका दिया। उनमे प्रमुख फिल्म- वक्त, गुमराह, हमराज, आदमी और इंसान और धुंध आदि है। तिसरी मंजिल (1966):- आशा भोसले ने राहुल देव वर्मन की ‘तीसरी मंजिल’(1966) से काफी प्रसिद्ध हुई। जब पहले उन्होने गाने की धुन सुनी तो गीत ‘आजा आजा...’ इस गीत को गाने से इनकार कर दिया था, जो वेस्टर्न डांस नम्बर पर आधारित थी। तब आर. डी. वर्मन ने संगीत को बदलने का प्रस्ताव आशा जी को दिया किंतु आशा जी ने यह चैलेंज स्वीकार करते हुए गीत गाए। 10 दिन के अभ्यास के बाद जब अंतिम तौर पर यह खास गीत आशा जी ने गाए तो खुशी के कायल आर. डी. वर्मन ने 100 रूपये के नोट आशा जी के हाथ मे रख दिए। आजा आजा.... और इस फिल्म के अन्य गीत – ओ हसीना जुल्फो वाली... और ओ मेरे सोना रे.... ये सभी गीत रफी जी के साथ तहलका मचा दिया।  

फिल्म के नायक शम्मी कपूर ने एक बार कहा था “यदि मेरे पास मो. रफी इस फिल्म के गीतो को गाने के लिए नही होते तो मै आशा भोसले को यह कार्य देता”। उमराव जान (1981):- रेखा अभिनित ‘उमराव जान’(1981) आशा जी ने गज़ल गाया यथा- दिल चीज क्या है।..., इन आँखों की मस्ती के..., ये क्या जगह है दोस्तों... और जुस्त जु जिसकी थी।..। इन गज़लों के संगीतकार खय्याम थे जिन्होने आशा जी से सफलतापूर्वक गज़लो को गाने के लिए स्वरों के उतार चढाव को समझाया। आशा जी स्वयं आश्चर्यचकित थी कि वह इन गज़लो को सफलतापूर्वक गाई है। इन गज़लों ने आशा जी को प्रथम राष्ट्रीय पुरस्कार दिलाया और उनकी बहुमुखी प्रतिभा साबित हुई। रंगीला (1995):- सन 1995 मे 62 वर्षीय आशा जी ने युवा अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर के लिए फिल्म रंगीला में गाई। इन्होने फिर अपने चाहनेवालों को आश्चर्यचकित कर दिया। सुपर हिट गीत यथा- तन्हा तन्हा... और रंगीला रे... गीत ए. आर. रहमान के संगीत निर्देशन मे गाई जो काफी प्रसिद्ध हुआ। बाद मे कई अन्य गीतों को ए. आर. रहमान के निर्देशन में गाई। तन्हा तन्हा... गीत काफी प्रसिद्ध हुआ और आज भी लोग गुनगुनाते है।

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पुरस्कार

आशा भोसले ने 18 नॉमिनेशन में से 7 फिल्म फेयर अवार्ड जीते है। उन्होंने अपने पहले 2 अवार्ड 1967 और 1968 में जीते है। 1979 में अवार्ड जितने के बाद आशाजी ने कहा की उनका नाम लता मगेशकर के नॉमिनेशन के बाद उनका नाम नॉमिनेट ना करे। इसके बाद भी आशाजी ने कई अवार्ड जीते है। 1996 में आशाजी ने रंगीला अवार्ड जीता।


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