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तिरंगा डिजाइन करने वाले पिंगली वेंकैया की कहानी..(जन्मदिन स्पेशल)

आरती यादव, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अगस्त 2 , 2017 , 12:13 IST | नई दिल्ली

देश की शान तिरंगे को सबसे पहले डिजाइन करने वाले पिंगली वेंकैया का जन्मदिन जन्म 2 अगस्त 1876 को आंध्र प्रदेश के मछलीपट्टनम के निकट भाटलापेन्नुमारु नामक स्थान पर हुआ था। पिंगली वेंकैया एक तेलगु ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखते थे। वेंकैया जी के पिता का नाम हनुमंतारायुडु और माता का नाम वेंकटरत्नम्मा था।

वैंकेया ने एक रेलवे गार्ड के रूप में और फिर बेल्लारी में एक सरकारी कर्मचारी के रूप में काम किया। वेंकैया कई विषयों के ज्ञाता थे, उन्हें भूविज्ञान और कृषि क्षेत्र से विशेष लगाव था। वह हीरे की खदानों के विशेषज्ञ थे। वेंकैया ने ब्रिटिश भारतीय सेना में भी सेवा की थी और दक्षिण अफ्रीका के एंग्लो-बोअर युद्ध में भाग लिया था। यहीं यह गांधी जी के संपर्क में आये और उनकी विचारधारा से बहुत प्रभावित हुए।

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पिंगली वेंकैया ने साल 1921 में 'तिरंगे' को डिजाइन किया था। पहले भारतीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अलग-अलग मौकों पर भिन्न-भिन्न झंडों का प्रयोग करते थे। 1921 में पिंगली वेंकैया ने अखिल भारतीय कांग्रेस कार्य समिति के बेजवाड़ा सत्र में महात्मा गांधी के सामने भारत के राष्ट्रीय ध्वज के तौर पर लाल और हरे रंग का झंडा प्रस्तुत किया।

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और गांधीवादी पिंगली वेंकैया ने लाल और हरे रंग को भारत के दो बड़े समुदायों हिन्दू और मुसलमान के प्रतीक के तौर पर इस्तेमाल किया था। गांधी जी के सुझाव पर उन्होंने इस झंडे में अन्य समुदायों की प्रतीक सफेद रंग की पट्टी और लाला हरदयाल के सुझाव पर विकास के प्रतीक चरखे को जगह दी। कांग्रेस ने इस तिरंगे ध्वज को अाधिकारिक तौर पर स्वीकार कर लिया। जल्द ही तिरंगा स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों में “स्वराज” ध्वज के रूप में लोकप्रिय हो गया। आगे चल कर लाल रंग की जगह केसरिया को जगह देते हुए 1931 में कांग्रेस ने तिरंगे को अपना आधिकारिक ध्वज बना लिया। कांग्रेस ने 26 जनवरी 1930 को ही भारत को पूर्ण स्वराज को घोषणा की थी।

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इस असाधारण योगदान के बावजूद 1963 में पिंगाली वेंकैया का बेहद गरीबी की हालत में विजयवाड़ा में एक झोपड़ी में देहावसान हुआ। समय के साथ समाज और काफी हद तक उनकी कांग्रेस पार्टी ने ही उनको भुला दिया। वर्षों बाद 2009 में उन पर एक डाक टिकट जारी हुआ।


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