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बाल गंगाघर तिलक को हिन्दू राष्ट्रवाद का पिता क्यों कहा जाता है? (पुण्यतिथि विशेष)

आरती यादव, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अगस्त 1 , 2017 , 14:08 IST | नई दिल्ली

भारत की गुलामी के दौरान अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले लोकमान्य तिलक ने देश को स्वतंत्र कराने में अपना सारा जीवन व्यतीत कर दिया। स्वराज का नारा बुलंद कर कई पीढ़ियों को प्रेरित कर उनके आदर्श बनने वाले बाल गंगाधर तिलक की 1 अगस्त को पुण्यतिथि है। भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के पहले लोकप्रिय नेता हुए बाल गंगाधर तिलक को ब्रिटिश औपनिवेशिक प्राधिकारी भारतीय अशान्ति के पिता कहते थे।

दरअसल, उन्हें लोकमान्य का आदरणीय शीर्षक प्राप्त हुआ था, जिसका मतलब हैं लोगों द्वारा स्वीकृत और तो और बाल गंगाधर तिलक को हिन्दू राष्ट्रवाद का पिता भी कहा जाता है। इन्होंने मराठी भाषा में 'स्वराज्य हा माझा जन्मसिद्ध हक्क आहे आणि तो मी मिळवणारच' में नारा दिया यानी की 'स्वराज यह मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है' और मैं इसे लेकर ही रहूँगा हालांकि इसके लिए उन्होंने जिंदगीभर संघर्ष किया।

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अपनी कलम से अंग्रेजी हुकूमत की जड़ें हिलाने वाले लोकमान्य तिलक का जन्म 23 जुलाई 1856 को ब्रिटिश भारत में महाराष्ट्र स्थित रत्नागिरी जिले के एक गांव चिखली में हुआ था। तिलक ने कुछ समय तक स्कूल और कॉलेज में गणित के शिक्षक के रुप में कार्य किया। दरअसल, तिलक अंग्रेजी शिक्षा के घोर आलोचक थे और मानते थे कि ये भाषा भारतीय सभ्यता के प्रति अनादर सिखाती है। इतना ही नहीं पत्रकारिता में अपनी छाप छोड़ने वाले तिलक ने मराठी में 'मराठा दर्पण' और 'केसरी' नाम से दो दैनिक अखबार शुरू किए, जिसे लोगों ने खासा पसंद किया।

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बता दें कि तिलक अखबार में अंग्रेजी शासन द्वारा ढ़ाए जा रहे जुल्म का और भारतीय संस्कृति के प्रति हीन भावना की खूब आलोचना करते थे। इतना ही नहीं बल्कि उन्हें अपने लेखों की वजह से कई बार जेल भी जाना पड़ा। भारत के नागरिकों को जागरुक करने के लिए शिक्षा केंद्रों की स्थापना की, हालात सुधारने के लिए पत्रिकाएं प्रकाशित की आदि ऐसे काम किए जिसकी वजह से समाज में सुधार आए।

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बाल गंगाधर तिलक के अनमोल वचन जो प्रेरणा के स्त्रोत बने:

- आपके विचार सही, लक्ष्य ईमानदार और प्रयास संवैधानिक हों तो मुझे पूर्ण विश्वास है कि, आपकी सफलता निश्चित है।

- ईश्वर की यही इच्छा हो सकती है कि मैं जिस उद्देश्य का प्रतिनिधित्व करता हूँ वो मेरे आजादी में रहने से ज्यादा मेरी पीड़ा में अधिक समृद्धि हो।

- एक अच्छे अखबार के शब्द अपने आप बोल देते हैं।

- जीवन एक ताश के खेल की तरह है, सही पत्तों का चयन हमारे हाथ में नहीं है, लेकिन हमारी सफलता निर्धारित करने वाले पत्ते खेलना हाथ में है।

- यह सच है कि बारिश की कमी के कारण अकाल पड़ता है, लेकिन यह भी सच है कि भारत के लोगों में इस बुराई से लड़ने के ताकत नहीं है।


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