नेशनल

टमाटर हुआ और लाल...कीमत पहुंची 100 के पार, जानिये क्यों बढ़े दाम

icon अमितेष युवराज सिंह | 0
1148
| जुलाई 4 , 2017 , 15:24 IST | नयी दिल्ली

आम आदमी जहां जीएसटी की जाल में उलझी है, वहीं महंगाई रूपी डायन ने जोरदार हमला किया है। दरअसल बात हो रही है टमाटर और शाक-सब्जियों की,जिनकी कीमतों में इज़ाफ़ा बदस्तूर जारी है। टमाटर ने तो खाने का ज़ायका ही बिगाड़ कर रख दिया है। राजधानी दिल्ली में टमाटर की कीमत 100 रुपए के ऊपर पहुंच गई है। टमाटर के दाम बढ़ने से सबसे ज़्यादा परेशान महिलाएं हैं, इससे आम लोगों का घरेलू बज़ट लड़खड़ाने लगा है।

    

सब्जियों की कीमत में भी लगी आग

अगर हरी सब्जियों की बात करें तो बाज़ार में कोई भी सब्जी 40 रुपए प्रति किलो से कम दाम में नहीं बिक रही है। फूलगोभी 60-70, बैगन 60 रूपए प्रति किलो से ऊपर पहुंच चुका है। अगर मटर की बात करें तो कीमत 120 रूपए प्रति किलो है। वहीं बीन्स, पत्तागोभी, शिमला और लौकी के दाम में भारी भी बढ़ोत्तरी देखी जा रही है।

टमाटर की कीमतों में क्यों लगी आग?

तात्कालिक कारण: टमाटर की आसमान छूती कीमतों के पीछे वैसे तो कई वज़ह है। लेकिन सबसे प्रमुख कारण है असामयिक बारिश। भारी बारिश की वजह से टमाटर उत्पादक राज्यों में 70 फीसदी से ज्यादा फसल बर्बाद हो चुके हैं।

टमाटर के दाम बढ़ने का दूसरा तात्कालिक कारण है कई राज्यों में पानी की किल्लत। दरअसल भारी बारिश के पहले कई राज्यों में सूखे की स्थिति पैदा हो गई थी, जिसके चलते भी टमाटर के साथ दूसरी सब्जियों को भारी नुकसान हुआ। पैदावार कम होने से आवक में 60 फीसदी से ज्यादा की कमी आई है।

दीर्घकालिक कारण: टमाटर के दाम में भारी बढ़ोतरी के पीछे जहां प्रकृति जिम्मेदार है, उससे कम जिम्मेदार सरकार नहीं है।

भंडारण का अभाव: दरअसल देश में सब्जियों और अन्नाज के भंडारण का भारी अभाव है। सरकार सब्जियों और अनाज के उचित भंडारण व्यवस्था करने में विफल रही है। भंडारण के पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के चलते किसानों के हजारों टन टमाटर, सब्जियां और अनाज बर्बाद हो जाते हैं। कुछ ही दिन पहले किसान 50 पैसे प्रति किलो टमाटर बेचने को मज़बूर थे, लेकिन वही टमाटर आज सौ रुपए के पार पहुंच चुका है।

दाम के पीछे बिचौलिए का खेल:भारतीय किसान की सबसे बड़ी बिडंबना रही है कि वो साहूकारों और बिचौलिए की जाल में जकड़े हुए हैं। दरअसल बिचौलिए फसलों के नुकसान होने का हवाला देकर भारी मात्रा में शाक-सब्जियों और अनाज का स्टॉक कर लेते हैं, फिर ऊंची कीमत पर बाज़ार में उसे खपाते हैं। टमाटर और सब्जियों के संदर्भ में भी ऐसा हो सकता है।      

भारतीय कृषि मॉनसून का जुआ: भारतीय कृषि पूरी तरह से मॉनसून पर आधारित है। जिस वर्ष अच्छी बारिश होती है उस साल फसलों की अच्छी उपज होती है। सिंचाई की उचित व्यवस्था नहीं होने के चलते पैदावार पर फर्क पड़ता है। आजादी के सात दशक बाद भी सरकार किसानों के लिए सिंचाई के साधन उपलब्ध कराने में विफल रही है। 

और कितना बढ़ेगा दाम? : जानकारों का कहना है कि टमाटर की नई फसल आने तक कीमत में गिरावट की उम्मीद कम है। नई फसल आने में अभी डेढ़ से दो महीने की देरी है, ऐसे में टमाटर के दाम और बढ़ सकते हैं। 

सरकार ने खड़े किए हाथ : टमाटर को लेकर सरकार ने भी हाथ खड़े कर लिए हैं। केंद्रीय खाद्य और उपभोक्ता मंत्री रामविलास पासवान ने टमाटर के दाम बढ़ने के पीछे बारिश को जिम्मेदार ठहराते हुए अपना पल्ला झाड़ लिया है।

ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर आम आदमी खाए तो क्या खाए? अगर गरीब आदमी कुछ दिन तक टमाटर खाना छोड़ दे तो भी चलेगा, लेकिन बाजार में तो सभी सब्जियों के भाव आसमान में है। 


author
अमितेष युवराज सिंह

लेखक न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर हैं

कमेंट करें