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त्रिपुरा में शरण लिए मिजोरम के 32000 'ब्रू' आदिवासियों को आधार कार्ड देगी सरकार

icon कुलदीप सिंह | 0
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| मई 13 , 2017 , 17:04 IST | त्रिपुरा

त्रिपुरा में सात शरणार्थी शिविरों में शरण लिए मिजोरम के जनजातीय समुदाय के 32,000 लोगों को त्रिपुरा सरकार आधार कार्ड जारी करेगी। एक अधिकारी ने शनिवार को बताया कि त्रिपुरा सरकार दो दशक से त्रिपुरा में रह रहे मिजोरम के इन नागरिकों को आधार कार्ड जारी करेगी। त्रिपुरा राहत एवं राजस्व विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि गृह मंत्रालय ने उनके विभाग को इन शरणार्थी जनजातीयों को आधार कार्ड जारी करने का निर्देश दिया है, ताकि उन्हें बिना किसी परेशानी के सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।

आधार कार्ड के लिए अगले सप्ताह से इन जनजातियों की तस्वीरें खींचने का काम शुरू होगा। कंचनपुर के उप-मंडलाधिकारी संतोष देब के मुताबिक,

"शराणार्थियों के स्कूल जाने वाले बच्चों को सबसे पहले आधार कार्ड प्रदान किए जाएंगे और उसके बाद वयस्क नागरिकों का आधार कार्ड बनेगा।"

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कंचनपुर और पणिसागर उप-मंडलाधिकारी कार्यालयों से आधार कार्ड जारी किए जाएंगे। मिजोरम में मूलवास को लेकर स्थानीय जनजातीय समुदायों में आपसी संघर्ष के कारण अक्टूबर, 1997 में मिजोरम के रियांग जनजातीय समुदाय के 32,900 लोगों ने मिजोरम से सटे उत्तरी त्रिपुरा के कंचनपुर और पणिसागर उप-मंडलों में अस्थायी शिविरों में शरण ली। ये खुद को स्थानीय भाषा में 'ब्रू' समुदाय का कहते हैं।

केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह सहित अब तक कई केंद्रीय नेता उत्तरी त्रिपुरा और मिजोरम के इन शिविरों का कई बार दौरा कर चुके हैं और मिजोरम सरकार तथा शरणार्थियों से गतिरोध खत्म करने का अनुरोध भी कर चुके हैं। इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय ने इन शरणार्थियों को मिजोरम में अपने मूलवास लौटने का बंदोबस्त करने के लिए गृह मंत्रालय और मिजोरम तथा त्रिपुरा सरकारों को मिलकर काम करने का निर्देश दिया था। शरणार्थियों के नेता ब्रूनो मशा ने आईएएनएस से कहा,

"हम मिजोरम अपने मूलवास लौटने के लिए तैयार हैं, लेकिन राज्य सरकार कृषि के लिए भूमि आवंटन जैसी हमारी मूल मांगें मानने को तैयार नहीं है।"

 

ब्रूनो ने कहा,

"गृह मंत्रालय और मिजोरम सरकार के अधिकारियों के बीच नई दिल्ली और त्रिपुरा के शरणार्थी शिविर में हुई कई बैठकों में हमने हर परिवार के लिए पांच हेक्टेयर कृषि भूमि की मांग रखी। हालांकि मिजोरम के अधिकारियों ने हमारी मांगें ठुकरा दीं। अगर हमारे पास जमीन ही नहीं होगी तो हम निर्वाह कैसे करेंगे?"

 

पिछले वर्ष मिजोरम के अधिकारियों की 30 सदस्यीय टीम ने मिजोरम के मूलवासी नागरिकों की सत्यता का पता लगाने के लिए शरणार्थी शिविरों का एक सर्वेक्षण किया था। शरणार्थी आदिवसियों को उनके मूलवास वापस भेजने की मिजोरम सरकार की कई कोशिशों के बावजूद आदिवासी भोजन और सुरक्षा से जुड़ी अपनी मांगें पूरी होने से पहले वापस जाने को तैयार नहीं हो रहे। शरणार्थियों के शीर्ष संगठन 'मिजोरम ब्रू डिस्प्लेस्ड पीपुल्स फोरम' (एमबीडीपीएफ) का कहना है कि उनकी तीन टीमें मिजोरम के तीन जिलों- मामिट, लुंगलेई और कोलासिब- का दौरा यह पता लगाने के लिए कह चुकी हैं कि वे वहां वापस बस सकते हैं या नहीं। मिजोरम के गृहमंत्री आर. लालजिरलियाना ने आइजोल में कहा है कि राज्य सरकार ब्रू जनजातियों के पुनर्वास से संबंधित एमबीडीपीएफ की मांगें नहीं मानेगी। उन्होंने कहा, "मिजोरम सरकार के लिए ब्रू शरणार्थी समुदाय के हर परिवार को पांच हेक्टेयर कृषि भूमि आवंटित करना संभव नहीं है। पुनर्वास पाने वाले परिवार को घर बनाने और कृषि करने के लिए भूमि आवंटन के संबंध में ग्राम परिषदों के दिशा-निर्देश का भी इंतजार करना होगा।"

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कुलदीप सिंह

लेखक न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में कार्यकारी संपादक हैं

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