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'टू-प्लस-टू सिक्योरिटी' से भारत पर कोई आंख दिखाने की हिम्मत नहीं करेगा, जानें क्या है यह?

अमितेष युवराज सिंह, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| सितंबर 14 , 2017 , 13:27 IST | नयी दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिंज़ो आबे ने अहमदाबाद में बुलेट ट्रेन की नींव रख दी है। अब दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में दोस्ती दिखाने का वक्त है। इसमें सबसे खास है टू प्लस टू सिक्योरिटी। जापानी मीडिया के मुताबिक प्रधानमंत्री शिंजो आबे इस बात तो लेकर आश्वस्त हैं कि भारत से टू-प्लस-टू सिक्योरिटी पर मुहर लग जाएगी। जापान टाइम्स ने इस बात की पुष्टि की है कि शिंज़ो आबे मोदी के टू-प्लस-टू डायलॉग को लेकर सहमत हैं। 2014 में भी जापान ने इस तरह का प्रस्ताव रखा था लेकिन अमल में नहीं आ पाया था क्योंकि भारत चीन को नाराज़ नहीं करना चाहता था।

जापान टाइम्स ने आगे लिखा है कि हाल के दिनों में जापान, भारत और अमेरिका के बीच गहरे हुए सुरक्षा सहयोग के कारण जापान को लग रहा है कि अब इसे अमल में लाने का सही वक़्त है। अगस्त में भारत अमेरिका से टू-प्लस-टू डायलॉग पर सहमत हो गया था। अब जापान भी इसका हिस्सा बनेगा। इसके तहत हिन्द महासागर में नियमित रूप से भारतीय और अमेरिकी नेवी का वार्षिक मालबार नौसना अभ्यास होगा।

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क्या है टू-प्लस-टू सिक्योरिटी

टू-प्लस-टू सिक्योरिटी के तहत दो देशों के बीच जंग की स्थिति में एक-दूसरे की हर हालत में मदद करने का समझौता होता है। कोई तीसरा देश इनमें से किसी एक पर हमला करे तो दूसरा देश सैन्य मदद करेगा। इसमें एक-दूसरे की जमीन का इस्तेमाल भी दोनों देश कर सकेंगे। भारत का किसी देश के साथ ऐसा समझौता नहीं हुआ है।

आपको बता दें कि एशिया में तेजी से रफ्तार पकड़ती दौड़ में तरफ तो चीन बेल्ट और रोड प्रोजेक्ट से देशों को अपनी ओर मिलाने की कोशिश में लगा है, तो वहीं भारत और जापान भी इस दौड़ में पीछे रहने को तैयार नहीं दिखते। दोनों देशों का साझा "एशिया अफ़्रीका विकास गलियारा (एएजीसी) इस दिशा में एक बड़ा कदम है। 40 अरब डॉलर के इस प्रस्ताव में जापान 30 और भारत 10 अरब डॉलर का निवेश करेगा। इस कदम को चीन के बेल्ट और रोड प्रोजेक्ट के जवाब के रूप मे देखा जा रहा है।

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भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को लेकर खासा परेशान रहा है। अंतरराष्ट्रीय सोलर अलायन्स इसी चिंता और सोच का परिणाम है। भारत ने अमेरिका, फ़्रांस और रूस समेत तमाम देशों के साथ परमाणु ऊर्जा सहयोग पर काम करना शुरु कर दिया है। जापान ने अपनी परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर न करने वाले किसी देश के साथ असहयोग की अपनी कसम भी भारत के लिये तोड़ दी और दोनों देशों ने परमाणु ऊर्जा सहयोग पर साझा सहयोग का मसौदा भी मंजूर कर लिया है, जिसके भारत के लिये दूरगामी परिणाम होंगे।

भारत और जापान के बीच गहराते संबंधों को लेकर चीनी मीडिया भी हरकत में है। ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि भारतीय प्रधानमंत्री ने जापान के सामने एशिया अफ़्रीका ग्रोथ कॉरिडोर का प्रस्ताव रखा है। ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि दोनों देश वन बेल्ट वन रोड की काट ढूंढ रहे हैं।


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