ख़ास रिपोर्ट

बाल दिवस विशेष: चाचा नेहरू के बारे में जानिए ये अनसुनी बातें

श्वेता बाजपेई, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
315
| नवंबर 13 , 2017 , 19:57 IST | नई दिल्ली

देशभर में आज प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की जयंती मनाई जा रही है।पंडित जवाहर लाल की जंयती को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है। पंडित नेहरू भारत की आजादी के बाद पहले प्रधानमंत्री बने। भारत में इनके जन्मदिन को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है।

इस दिन बच्चों के अधिकार, देखभाल और शिक्षा के बारे में लोगों को जागरुक किया जाता है। भारत के अलावा बाल दिवस दुनिया भर में अलग अलग तारीखों पर मनाया जाता है। कहा जाता है कि पंडित नेहरू बच्चों से बेहद प्यार करते थे इसलिए उनके जन्मदिन को बाल दिवस के रूप में चुना गया।

जवाहरलाल नेहरू का जन्म 14 नवंबर 1889 को भारत के इलाहाबाद में हुआ। उनके पिता, मोतीलाल नेहरू एक धनी बैरिस्टर, जो कश्मीरी पंडित समुदाय से थे। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के दो बार अध्यक्ष चुने गए। उनकी माता स्वरूपरानी थुस्सू जो लाहौर में बसे एक सुपरिचित कश्मीरी ब्राह्मण परिवार से थी। भारत के पहले प्रधानमंत्री और छोटे बच्चों में चाचा के नाम से मशहूर पंडित जवाहर लाल नेहरू सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। नेहरू को भोपाल शहर से बेहद लगाव था। मध्यप्रदेश और पंडित नेहरू का नाता गहरा था। इस प्रदेश का नामकरण खुद नेहरू ने किया था। साथ ही उस दौर के नेता शंकरदयाल शर्मा नेहरू के नजदीकी थे, ऐसे में नेहरू अक्सर भोपाल आते-जाते रहते थे।

इंग्लैंड से पूरी की पढ़ाई-

नेहरू की शुरुआती शिक्षा घर में ही हुई है। उन्हें घर में ही अंग्रेजी, हिंदी और संस्कृत पढ़ाई जाती थी। इसके बाद वो आगे की पढ़ाई के लिए हैरो और फिर ट्रिनिटि कॉलेज, लंदन चले गए। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से उन्होंने लॉ में डिग्री ली और देश में आकर वकालत शुरू की।

भारत लौटने के चार वर्ष बाद मार्च 1916 में नेहरू का विवाह कमला कौल के साथ हुआ, जो दिल्ली में बसे कश्मीरी परिवार की थीं। उनकी अकेली संतान इंदिरा प्रियदर्शिनी का जन्म 1917 में हुआ; बाद में वह, विवाहोपरांत नाम 'इंदिरा गांधी', भारत की प्रधानमंत्री बनीं। तथा एक पुत्र प्राप्त हुआ, जिसकी शीघ्र ही मृत्यु हो गयी थी। 1912 ई. में वे बैरिस्टर बने और उसी वर्ष भारत लौटकर उन्होंने इलाहाबाद में वकालत प्रारम्भ की। वकालत में उनकी विशेष रुचि न थी और शीघ्र ही वे भारतीय राजनीति में भाग लेने लगे। 1912 ई. में उन्होंने बाँकीपुर (बिहार) में होने वाले भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया।

Family-Photograph-of-Jawaharlal-Nehru-with-Wife-Kamala-and-Daughter-Indira-1930s-207x300

गांधी की सोच से प्रभावित थे नेहरू-

1916 में उन्होंने कमला कौल से शादी की। शादी के अगले ही साल उनके घर में इंदिरा प्रियादर्शनी ने जन्म लिया जो आने वाले सालों में देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। एक वकील के तौर पर नेहरू का कार्यकाल काफी छोटा रहा। वो अंग्रेजों के खिलाफ महात्मा गांधी की सोच से काफी प्रभावित थे।

उनके जन्मदिन के मौके पर हम आपको बताने जा रहे हैं जवाहरलाल नेहरू से जुड़े ऐसे फैक्ट्स, जो बहुत कम लोग जानते हैं....

1.18 बार किया था भोपाल का दौरा-

जब वो पीएम थे तब उन्होंने करीब 18 बार भोपाल का दौरा किया था।नेहरू जब भी भोपाल के दौरे पर होते तो वो किसी सरकरी आवास में नहीं बल्कि भोपाल नवाब के चिकलोद स्थित कोठी पर रुकते थे। ये वही कोठी है जिसपर पटौदी खानदान कई सालो से केस लड़ रहा है। ये जगह भोपाल से करीब 30 किलोमीटर दूर है।भोपाल के दौरे पर नेहरू जब भी आते वो प्रोटोकॉल तोड़कर अकेले उस कोठी में रहना पंसद करते थे। दरअसल इस कोठी की खास बात थ कि ये शहर से दूर और शांत जगह पर थी साथ ही जंगलो के बीच में होने के कारण यहां का नजारा अलग होता था इसलिए नेहरु यहीं रूकते थे।

2.नहीं झुके हमारा तिरंगा-

तिरंगे को लेकर नेहरू ने दिसंबर 1929 लाहौर अधिवेशन में यादगार भाषण दिया।नेहरू ने अपने संदेश में कहा, 'एक बार फिर आपको याद रखना है कि अब यह झंडा फहरा दिया गया है। जब तक एक भी हिंदुस्तानी मर्द, औरत, बच्चा जिंदा है, यह तिरंगा झुकना नहीं चाहिए।'

3. आजादी आधी रात को:

14 अगस्त की रात 11 बजे से ही आजादी समारोह शुरू हो गया था। समारोह के मुख्य वक्ताओं में से एक हमारे पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू थे। नेहरू ने कहा, 'मध्य रात्रि की इस बेला में जब पूरी दुनिया नींद की आगोश में सो रही है, हिंदुस्तान एक नई जिंदगी और आजादी के वातावरण में अपनी आंख खोल रहा है। यह एक ऐसा पल है जो इतिहास में बहुत ही कम दिखता है, जब हम पुराने युग से नए युग में प्रवेश करते हैं और जब एक युग खत्म होता है और जब एक देश की बहुत दिनों से दबाई गई आत्मा अचानक अपनी अभिव्यक्ति पा लेती है।' नेहरू ने यह भाषण इंग्लिश में दिया था लेकिन इसके बावजूद भी बहुत से इंग्लिश न जानने वालों की आंखें नम हो गईं थीं।

4. संसद बहस के दौरान नेहरू का गुस्सा:

हिंदुस्तानी को राष्ट्रीय भाषा का दर्जा देने के बड़े पक्षधर आरवी धूलेकर ने 10 दिसंबर 1946 को संसद की कार्यवाही के दौरान कहा कि जो लोग हिंदुस्तानी नहीं समझते उन्हें सदन में रहने का कोई हक नहीं है और ऐसे लोग अगर सदन में मौजूद हैं तो वो सदस्य बनने के काबिल नहीं हैं। वो यहां से चले जाएं। इस बात पर सदन में हंगामा शुरू हो गया। हंगामा बढ़ता देख नेहरू ने मंच पर जाकर सदस्यों से कहा, 'ये कोई झांसी की जनसभा नहीं है कि आप उठे और भाइयों बहनों कहते हुए ऊंची आवाज में अपना ज्ञान देना शुरू कर दें।'

5.नेहरूजी के कपड़े धुलने जाते थे लंदन-

जवाहरलाल नेहरू के पिता मोतीलाल नेहरू इलाहाबाद के बड़े वकील थे। नेहरूजी को बचपन से ही शानदार बीता है। कहा तो ये भी जाता है कि मोतीलाल नेहरू और जवाहरलाल नेहरू के कपड़े लंदन में धुलने जाते थे।

6.अपने नाई के लिए लंदन से लाए घड़ी-

जवाहरलाल नेहरू को एक बार लंदन जाने वाले थे। उनका नाई हमेशा लेट हो जाया करता था। नेहरूजी के पूछने पर नाई ने कहा- 'मेरे पास घड़ी नहीं है, जिसके कारण वो हमेशा लेट हो जाया करते हैं।' जिसके बाद वो लंदन से नई घड़ी लाए थे।

7.सिगरेट हुई खत्म तो विमान से लाई गई -

जवाहरलाल नेहरू को सिगरेट पीने का बहुत शौक था। वो हर जगह सिगरेट पीते भी नजर आते थे। एक वक्त की बात है जब नेहरूजी भोपाल पहुंचे तो वहां उनकी 555 ब्रांड की सिगरेट खत्म हो गई। वहां कहीं भी उनकी सिगरेट नहीं मिली। जिसके बाद विशेष विमान में इंदौर से सिगरेट लाई गई।

8.नेहरूजी के कहने पर टाटा ने बनाया था लैक्मे ब्यूटी प्रोडक्ट-

लैक्मे ब्यूटी प्रोडक्ट देश का जाना माना नाम है। लेकिन, इसके बनने के पीछे की कहानी थोड़ी दिलचस्प है। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू इस बात को लेकर चिंति‍त थे कि भारतीय महि‍लाएं ब्‍यूटी प्रोडक्‍ट्स पर बड़े पैमाने पर वि‍देशी मुद्रा खर्च कर रही हैं। जिसको देखते हुए नेहरू ने जेआरडी टाटा ने ब्यूटी प्रोडक्ट बनाने का निवेदन किया। जिसके बाद लैक्मे मार्केट में आया।

9.जब पहली बार विदेश से आई नेहरूजी के लिए कार-

नेहरूजी को कार से घूमने का काफी शौक था। मोतीलाल नेहरू भी ये बात अच्छे से जानते थे। मोतीलाल नेहरू ने बेटे के लिए विदेशी कार मंगवाई थी। आपको बता दें, इलाहाबाद की सड़कों पर आने वाली यह पहली कार थी।

10.नेहरू का 95 मिनट का भाषण-

1952 में भारत में पहला चुनाव हुआ था। इस चुनाव में नेहरू ने दिल्ली में एक जनसभा के बीच करीब 95 मिनट लंबा भाषण दिया। नेहरू के इस भाषण के उस अंश को लोगों ने काफी पसंद किया, जिसमें नेहरू ने कहा, 'अगर कोई आदमी किसी दूसरे आदमी पर धर्म की वजह से हाथ उठाता है तो मैं सरकार का मुखिया होने के नाते, जिंदगी की आखिरी सांस तक उससे लड़ता रहूंगा।'

11.तिरंगा फहराने वाले पहले शख्स-

जवाहर लाल नेहरू लाल किले पर तिरंगा फहराने वाले पहले शख्स थे। उनका लालन पालन गांव में ही हुआ, शुरू से इंग्लिश स्कूल में पढ़ाई की। वे हिंदी सीखने के लिए गांव में घुमते थे और लोगों के बीच में बैठकर हिंदी का ज्ञान लेते थे।नेहरू जी के कपड़े लंदन में धुलने के लिए जाते थे। उनके नाम पर जवाहरलाल नहेरू विश्वविद्यायल भी है ।

12. चार बार हुआ जानलेवा हमला -

जवाहरलाल नेहरू पर 4 बार जानलेवा हमला हुआ था। पहली बार 1947 में बंटवारे के दौरान उन पर हमला किया गया था। इसके बाद 1955 में महाराष्ट्र में चाकू से उन पर हमला किया गया था। वही 1956 में बम से रेल की पटरी उड़ने की कोशिश भी नाकामयाब रही।

 


कमेंट करें