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सिर्फ एक रात की रस्मी मुलाकात या इतिहास रचेंगे मोदी-ट्रंप, वार्ता के 11 अहम प्वाइंट

सतीश वर्मा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जून 26 , 2017 , 15:38 IST | वाशिंगटन

नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की पहली मुलाकात से अमेरिकी मीडिया को भी काफी उम्मीदें हैं। अमेरिकी मीडिया के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच कितना नजदीकी रिश्ता बनता है, ये देखना काफी दिलचस्प होगा। हालांकि, ट्रंप को लेकर कोई अनुमान नहीं लगाया जा सकता। कोई नहीं जानता कि वे क्या कह देंगे और कैसे रिएक्ट करेंगे।

बता दें कि व्हाइट हाउस में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भारतीय समयानुसार रात 1.20 बजे मिलेंगे। पीएम मोदी के सम्मान में व्हाइट हाउस में रात्रि भोज का भी आयोजन किया गया है। 

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अमेरिकी मीडिया की नजर में मोदी-ट्रंप मुलाकात

वॉशिंगटन पोस्ट ने लिखा है कि,

दोनों नेताओं के बीच कितना नजदीकी रिश्ता बनता है, ये देखना काफी दिलचस्प होगा। यह देखना होगा कि क्या मोदी-ट्रंप इतिहास रच देंगे या ये सिर्फ एक रात की मुलाकात वाली बात साबित होगी

मोदी-ट्रंप में कई चीजें कॉमन हैं। दोनों राष्ट्रवादिता की लहर के चलते सत्ता में आए हैं। दोनों ने इस्लामिक आतंकवाद को उखाड़ फेंकने का दावा किया है। दोनों ही चीन के खिलाफ खड़े नजर आते हैं। दोनों के हाथों में बड़ी इकोनॉमी के अलावा सुरक्षा और राजनयिक सहयोग की जिम्मेदारी है। सोशल मीडिया में भी दोनों छाए हुए हैं।

भारतीयों को कई उम्मीदें

न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है कि, मोदी की ट्रंप से मुलाकात से भारतीयों को काफी उम्मीदें हैं। ट्रंप इमिग्रेशन पर लगाम कसने की तैयारी में हैं। वहीं, भारत-चीन को ज्यादा सहूलियतें देने की बात कहकर अमेरिका पेरिस डील से बाहर आ चुका है। इस लिहाज से मोदी-ट्रंप की मुलाकात अहम हो सकती है

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अमेरिका में बसे NRI की राय

अमेरिका में 32 साल से रह रहे योगी पटेल ने बताया कि ट्रंप सही चीजें कर रहे हैं। वे अमेरिकी नागरिकों और अमेरिका के लिए सही फैसले ले रहे हैं। मैं भारत और अमेरिका दोनों का हूं। वहीं, अमेरिका में रह रहे वासुदेव पटेल का कहना है कि,

ट्रंप को लेकर कोई अनुमान नहीं लगाया जा सकता। कोई नहीं जानता कि वे क्या कहेंगे। मुलाकात के बाद वे ये भी कह सकते हैं कि मैंने तो ये कहा नहीं था। वे भारतीय राजनेताओं जैसे हैं

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30 लाख भारतीय अमेरिका में रहते हैं

प्यू रिसर्च सेंटर की एक रिपोर्ट के हवाले से लिखा कि करीब 30 लाख भारतीय, अमेरिका में रहते हैं। इसमें से 65% का झुकाव डेमोक्रेट्स की तरफ है। लेकिन पिछले साल हुए राष्ट्रपति चुनाल में भारतीयों के बीच ट्रंप लहर देखने को मिली। यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिलवेनिया में प्रोफेसर देवेश कपूर कहते हैं कि,

ज्यादातर इमिग्रेंट्स अपनी समस्याओं से जूझते रहते हैं। उन्हें ग्रीन कार्ड के लिए मशक्कत करनी पड़ती है। कई बार तो परिवार को वापस तक भेजना पड़ता है

इन 6 मुद्दों पर हो सकती है बात

1. दक्षिण एशियाई मुल्क और दुनिया में स्थायित्व और सुरक्षा को मजबूत करना।

2. इस्लामिक आतंकवाद

3. इकोनॉमिक ग्रोथ बढ़ाना

4. इंडियन आर्मी के आधुनिकीकरण के लिए आर्म्स डील

5. सिविल न्यूक्लियर डील

6. एच1बी वीजा

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न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप (NSG)

देश के न्यूक्लियर रिएक्टर्स के लिए यूरेनियम की सप्लाई के लिए भारत की न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप में एंट्री जरूरी है। ओबामा भारत का समर्थन करते रहे हैं। लेकिन ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिका की तरफ से कोई बड़ा बयान नहीं आया।

दक्षिण एशियाई नीति

साउथ एशिया को लेकर अमेरिका की पॉलिसी साफ नहीं है। चुनाव के दौरान ट्रंप ने पाकिस्तान को मदद नहीं करने की बात कही थी, लेकिन चुनाव जीतते ही पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से कह बैठे कि पाकिस्तान एक सुलझा हुआ देश है।

एच1बी वीजा

70% यह वीजा भारतीयों को ही मिलता है। इसके नियम सख्त हो चुके हैं। ट्रंप ने जब पाबंदी लगाई तो भारत की हैरानी लाजिमी थी।

भारतीयों पर हमले

ट्रंप जब चुनाव प्रचार कर रहे थे तब उन्होंने भारतीय मूल के लोगों को लुभाने के लिए उनकी तारीफ में कई बातें कहीं। लेकिन ट्रंप के आने के बाद से नस्लीय हमले भी बढ़ गए। भारतीय लोगों को सबसे ज्यादा और लगातार निशाना बनाया जाता रहा।

चीन

ट्रंप जब राष्ट्रपति बने तो भारत ने ओबामा की तरह उनसे भी यह उम्मीद थी कि वे चीन के मुद्दे पर भारत का हमेशा साथ देंगे लेकिन उत्तर कोरिया के लगातार मिसाइल टेस्ट के बाद उपजे तनाव के बीच चीन-अमेरिका ने एक-दूसरे के सपोर्ट में बयान दिए।

 


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