बिज़नेस

नोटबंदी ने भारत की GDP पर नकारात्मक असर डाला: US मैग्जीन की रिपोर्ट

सतीश वर्मा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
118
| जून 17 , 2017 , 15:20 IST | न्यूयार्क

अमेरिका की एक टॉप मैगजीन का दावा है कि नरेंद्र मोदी का नोटबंदी का फैसला हाल की आर्थिक इतिहास में देश को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाला प्रयोग साबित हुआ। नोटबंदी के चलते भारत की कैश आधारित इकोनॉमी में एक ठहराव-सा आ गया। बता दें कि मोदी ने 8 नवंबर को 500-1000 के पुराने नोट बंद कर दिए थे।

Fa 1

'फॉरेन अफेयर्स' मैग्जीन ने नोटबंदी को माना नुकसानदेह

फॉरेन अफेयर्स' मैगजीन के ताजा इश्यू में राइटर जेम्स क्रेबट्री ने लिखा है कि,

डिमॉनेटाइजेशन ने साबित कर दिया कि वह सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाला एक्सपेरिमेंट था। अब मोदी प्रशासन को अपनी गलतियों से सीख लेनी चाहिए

क्रेबट्री सिंगापुर में ली कुआन यू स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी में सीनियर रिसर्च फेलो हैं। वे भारत में नोटबंदी की काफी आलोचना करते रहे हैं।

Demon 1

 

क्रेबट्री लिखते हैं कि,

मोदी की आर्थिक उपलब्धियां तो सही हैं, लेकिन उनके ग्रोथ लाने वाले रिफॉर्म्स ने लोगों को एक तरह से निराश किया

नोटबंदी ने जीडीपी पर नकारात्मक असर डाला

उन्होंने कहा कि नोटबंदी के लिए सरकार ने जितने बड़े स्तर पर काम किया, उसने अर्थव्यवस्था पर उतना असर नहीं डाला। हालांकि, ये फैसला काफी पॉपुलर हुआ। मोदी के इस फैसले ने जीडीपी पर ज्यादा असर नहीं डाला। अगर वे 2019 के चुनावों को देख रहे हैं, तो इसके लिए उन्हें पिछले कदम से सीखने में मुश्किल नहीं आएगी।

Gdp

क्रेबटी ने और क्या लिखा

सच तो ये है कि शॉर्ट टर्म ग्रोथ के लिहाज से नोटबंदी खराब रही। पिछले हफ्ते भारत ने 2017 के पहले क्वार्टर की जीडीपी के आंकड़े जारी किए। ये वही वक्त है जब नोटबंदी का सबसे ज्यादा असर पड़ा। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि नोटबंदी के चलते लाखों भारतीयों को 500-1000 रुपए के नोट बदलने के लिए बैंक की लाइन में लगना पड़ा।

4 घंटे में 15 लाख करोड़ की करंसी बाहर

8 नवंबर को मोदी ने रात 8 बजे राष्ट्र के नाम संबोधन में 500 और 1000 रुपए के नोट आधी रात से बंद करने का एलान किया। यानी महज 4 घंटे में देश की इकोनॉमी से 15 लाख करोड़ रुपए की करंसी बाहर हो गई।

Demon 2

 

 

 


कमेंट करें