ख़ास रिपोर्ट

सोचिये और रोकिये इस विस्फोट को! 2024 में हमारी आबादी चीन से ज्यादा होगी  

अमितेष युवराज सिंह, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जून 22 , 2017 , 17:12 IST | नयी दिल्ली

भारत के लिहाज से ये खबर अच्छी नहीं कही जाएगी। अपने पड़ोसी देश चीन से भले ही हम और मामलों में पीछे हों लेकिन जनसंख्या के मामले में हम जल्द ही उसे पछाड़ने वाले हैं। जनसंख्या में हम 2024 तक चीन से आगे निकल जाएंगे। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) का कहना है कि भारत की आबादी 2024 तक चीन से ज्यादा हो जाएगी। 2030 तक भारत की आबादी 1.5 अरब होने की संभावना है। यूएन ने ये दावा आर्थिक और सामाजिक मामलों के विभाग ने विश्व आबादी संभावना-2017 नामक रिपोर्ट में किया है।

यूएन की रिपोर्ट में कहा गया है कि फिलहाल चीन की आबादी 1.41 अरब है और भारत की 1.34 अरब है। विश्व की कुल आबादी में चीन की 19% और भारत की 18% की हिस्सेदारी है। इस आंकड़े को देखते हुए लगता है कि भारत 2024 तक चीन की आबादी को पार कर लेगा।

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संयुक्त राष्ट्र आधिकारिक अनुमान की यह 25वें दौर की समीक्षा रिपोर्ट है। 24वें दौर का अनुमान 2015 में जारी किया गया था जिसमें अनुमान लगाया गया था कि भारत की आबादी 2022 तक चीन को पार कर जाएगी।

भारत की आबादी 2030 तक 1.5 अरब और 2050 तक 1.66 अरब तक होने की संभावना है। चीन की आबादी 2030 तक स्थिर रहने का अनुमान है जिसके बाद इसमें धीमी गिरावट आ सकती है। भारत की आबादी में गिरावट 2050 के बाद होने की संभावना है।

सामूहिक रूप से 10  देशों की आबादी 2017 से 2050 के बीच बढ़ कर दुनिया की कुल आबादी की आधी से अधिक हो जाने की उम्मीद है। इन देशों में भारत, नाइजीरिया, कांगो, पाकिस्तान, इथोपिया, तंजानिया, अमेरिका, यूगांडा, इंडोनेशिया और मिस्र शामिल हैं। इन 10 देशों में नाइजीरिया की आबादी सबसे तेजी से बढ़ रही है। उसकी आबादी अमेरिका की आबादी को पार कर जाने का अनुमान है और 2050 से कुछ वर्ष पहले यह दुनिया की तीसरा सर्वाधिक आबादी वाला देश बन जाएगा।

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ये है हमारा हाल

-भारत के कुछ राज्यों की जनसंख्या कुछ देशों की जनसंख्या के बराबर है।

-महाराष्ट्र की जनसंख्या मैक्सिको के बराबर यानी 104 मिलियन है।

-वियतनाम की आबादी पश्चिम बंगाल के बराबर 85 मिलियन।

-झारखंड की आबादी युगांडा जितनी 29 मिलियन।

-ओडिशा की आबादी अर्जेंटीना के बराबर 39 मिलियन है।

-फिलहाल 50 प्रतिशत से ज़्यादा जनसंख्या 25 साल से कम उम्र के आयु वर्ग में आती है, जबकि 65 प्रतिशत 35 साल के कम उम्र के आयु वर्ग में है।

कौन है जिम्मेदार

अगर देश में शिशु मृत्यु दर का लक्ष्य पूरा होता तो 2010 में देश की जनसंख्या 1107 मिलियन होती है, जबकि वर्ष 2008 में ही हमारे देश की जनसंख्या इससे भी ज़्यादा 1149.3 मिलियन थी। राष्ट्रीय जनसंख्या नीति के तहत टोटल फर्टिलिटी रेट यानी एक महिला द्वारा पैदा किए गए बच्चों की संख्या 2 हो, लेकिन आंकड़ों को देखें तो देश की प्रगति के साथ यहां के लोगों का स्वास्थ्य के प्रति नजरिया कुछ नकारात्मक ही रहा है। अब भी देश के राज्यों के फर्टिलिटी रेट को देखकर कह सकते हैं कि निर्धारित किए गए लक्ष्य से हम अभी बहुत पीछे हैं।

इस आंकड़े को छूने के लिए तमिलनाडु को छोड़कर बाक़ी राज्यों को लंबा सफर तय करना पड़ेगा। उत्तर प्रदेश को अभी 18 वर्ष और लगेंगे। मध्य प्रदेश को 16 वर्ष, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड को 13 वर्ष, बिहार एवं राजस्थान को 12 वर्ष, असम और झारखंड को नौ से दस वर्ष लगेंगे। 2007-2008 की रिपोर्ट के मुताबिक़, देश के ग्रामीण इलाको में 40-45 आयु वर्ग की महिलाएं सबसे ज्यादा 6 और सबसे कम दो बच्चों को जन्म देती हैं। इस मामले में उत्तर प्रदेश सबसे आगे प्रति महिला 6 बच्चे हैं। बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड, राजस्थान में प्रति महिला पांच बच्चे और सबसे कम केरल में प्रति महिला दो बच्चे हैं।

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कितनी बोझ सह सकती है धरती

आज की तारीख में दुनिया की आबादी सात अरब से ज्यादा है। 2050 तक ये आंकड़ा करीब दस अरब और 22वीं सदी के आते आते धरती पर ग्यारह अरब लोगों के होने का अनुमान है। 2012 में संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया की 35 करोड़ महिलाएं अपना आखिरी बच्चा नहीं चाहती थीं। मगर उनके पास इतने अधिकार नहीं थे कि वो इसका फैसला ले सकें कि वो बच्चा पैदा करेंगी या नहीं। लेकिन अभी भी एक अहम सवाल है कि क्या धरती 11 अरब लोगों के बोझ को बर्दाश्त कर पाएगी। इस सवाल के कई जवाब हैं मसलन कुछ शोधकर्ताओं का कहना है कि धरती 11 अरब की आबादी के बोझ को बर्दाश्त करने में सक्षम है।  2012 में संयुक्त राष्ट्र के रिपोर्ट के मुताबिक हमारी धरती आठ अरब से लेकर 24 अरब लोगों के बोझ को बर्दाश्त कर सकती है।

 


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