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चीन के ‘OBOR’ समिट में शामिल नहीं होगा भारत, US ने जताई सहमति

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मई 13 , 2017 , 16:35 IST | बीजिंग

पूरी दुनिया में अपनी आर्थिक ताकत का सिक्का जमाने के लिए चीन 'वन बेल्ट, वन रोड' की जोरदार पैरवी कर रहा है। इसी कवायद में रविवार से बीजिंग में एक बड़ा आर्थिक सम्मेलन होने जा रहा है। लेकिन भारत ने इस सम्मेलन में कोई प्रतिनिधि नहीं भेजने का फैसला किया है।

क्यों है भारत को ऐतराज

चीन का दावा है कि 'वन बेल्ट, वन रोड' परियोजना (OBOR) सभी भागीदार देशों के लिए फायदे का सौदा है। लेकिन नई दिल्ली के रणनीतिकार ड्रैगन के इरादों को शक की नजर से देखते रहे हैं। भारत का सबसे बड़ा ऐतराज पाकिस्तान को चीन से जोड़ने वाले चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) को लेकर है। ये कॉरिडोर पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर के गिलगित-बाल्टिस्तान इलाके से गुजरेगा। भारत इसे अपनी स्वायत्ता का हनन का मानता है।

पेइचिंग में 14 और 15 मई को होने वाली 'वन बेल्ट वन रोड' (OBOR) फोरम में अब अमेरिका भी शामिल होगा। अमेरिका ने अचानक यूटर्न लेते हुए चीन के 'वन बेल्ट, वन रोड' फोरम में शामिल होने का फैसला किया है। अमेरिका का यह कदम भारत पर काफी दबाव डालने वाला है क्योंकि अभी तक भारत ने चीन के 'वन बेल्ट, वन रोड' समिट में अपना प्रतिनिधि भेजने पर कोई निर्णय नहीं लिया है।

OBOR के लिए 14 और 15 मई को शिखर सम्मेलन

चीन, ओबोर (वन बेल्ट वन रूट) परियोजना को सफल बनाने के लिए 14 और 15 मई को शिखर सम्मेलन आयोजत कर रहा है। इस सम्मेलन में 29 देशों के राष्ट्राध्यक्ष, 70 इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन्स के चीफ और करीब 1200 प्रतिनिधिमंडल हिस्सा ले रहे हैं।

इसे न्यू सिल्क रूट परियोजना के नाम से भी जाना जा रहा है। चीन का दावा है कि इस प्रोजेक्ट से जुड़ने वाले 65 देशों में इससे बड़े पैमाने पर निवेश और विकास होगा

भारत ने जताई बेरुखी

चीन-पाक इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) को लेकर भारत पहले ही आपत्ति दर्ज करवा चुका है। यह कॉरिडोर गिलगित-बॉल्टिस्तान से गुजरता है, जिस पर भारत अपना दावा जताता रहा है। ओबोर प्रोजेक्ट के तहत यह कॉरिडोर अहम हो जाएगा। ओबोर प्रोजेक्ट में 6 दूसरे कॉरिडोर भी बनाने का प्लान है।

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इसके चलते भारत, चीन के ओबोर फोरम में सहयोग नहीं कर रहा है। संभावना है कि भारत केवल एक जूनियर लेवल प्रतिनिधि मंडल को ही सम्मेलन में भेजेगा। वहीं चीन भारत को जोड़ने के लिए पूरी कोशिश कर रहा है। 

वन बेल्ट वन रोड के लिए अमेरिका की हां

चीन के सबसे बड़े प्रतिद्वंदी अमेरिका ने ओबोर में हिस्सा लेने पर सहमति जता दी है। इसे अमेरिका-चीन के बीच हुए करार का राजनीतिक फैसला माना जा रहा है। इससे पहले अमेरिका ने इस प्रोजेक्ट में खास रुचि नहीं जताई थी।

ट्रंप के सीनियर एडवाइजर मैथ्यू पॉटिंगर की लीडरशिप में एक ग्रुप समिट में हिस्सा लेगा। अमेरिका का दावा है कि उसके इस संगठन में रहने से प्लान में पारदर्शिता आएगी।

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