ख़ास रिपोर्ट

वाल्‍मीकि जयंती आज, जानिए कैसे बने महर्षि (ख़ास रिपोर्ट)

ललिता सेन, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अक्टूबर 5 , 2017 , 12:19 IST | नई दिल्ली

गुरुवार को देश भर में धूमधाम से वाल्‍मीकि जयंती मनाई जा रही है। इस अवसर पर जगह-जगह जुलूस और झांकियां निकालने की तैयारी है। लोगों में जबरदस्‍त उत्‍साह देखने को मिल रहा है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाल्मीकि जयंती के अवसर पर देशवासियों को बधाई दी है। पीएम ने संस्कृत के महान कवि महर्षि वाल्मीकि की जयंती पर ट्वीट किया, "वाल्मीकि जयंती की बधाई। एक महान ऋषि और महान साहित्यकार। उनके आदर्श सभी पीढ़ियों का मार्गदर्शन करते हैं।"

बता दें कि, ऋषि वाल्मीकि महाकाव्य रामायण के रचयिता के रूप में विख्यात हैं। उनके द्वारा लिखी गई रामायण में 24,000 श्लोकऔर उत्तर कांड समेत सात कांड हैं।

Valmiki

महर्षि वाल्मीकि ने अपनी विख्यात रचना महाग्रंथ रामायण के सहारे प्रेम, तप, त्याग इत्यादि दर्शाते हुए हर मनुष्य को सद्भावना के पथ पर चलने के लिए मार्गदर्शन दिया है। इसलिए उनका ये दिन एक पर्व के रुप में मनाया जाता है।

जानिए कैसे बनें 'महर्षि' वाल्मीकि

एक पौराणिक कथा के अनुसार वाल्मीकि महर्षि बनने से पूर्व उनका नाम रत्नाकर था।, जो अपने परिवार के पालन-पोषण के लिए लूटपाट किया करते थे। एक समय रत्नाकर की मुलाकात नारद मुनि से हुई। रत्नाकर ने उन्हें भी लूटने का प्रयास किया तो नारद मुनि ने उनसे पूछा कि आप ये काम क्यों करते हैं। रत्नाकर ने उत्तर दिया कि परिवार के पालन-पोषण के लिए वह ऐसा करते हैं। नारद मुनि ने रत्नाकर से कहा कि वो जो जिस परिवार के लिए अपराध कर रहे है और क्या वो उनके पापों का फल भोगने मे उनकी साझीदार होगा?

असमंजस में पड़े रत्नाकर ने नारद मुनि को पास ही किसी पेड़ से बांधा और अपने घर उस प्रश्न का उत्तर जानने हेतु पहुंच गए। उन्हें जानकर बहुत ही निराशा हुई कि उनके परिवार का एक भी सदस्य उनके इस पाप का फल भोगने में साझीदार बनने को तैयार नहीं था। वह वापस लौटकर नारद के चरणों में गिर पड़े और उनसे ज्ञान देने के लिए कहा। नारद मुनि ने उन्हें राम नाम जपने की सलाह दी और राम-राम जपते-जपते यही रत्नाकर आगे चलकर महर्षि वाल्मीकि के रूप में विख्यात हुए।


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