विज्ञान/टेक्नोलॉजी

देश के इस शहर में रोबोट बना ट्रैफिक पुलिस, देखिये कैसे

तूबा महर, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जून 21 , 2017 , 18:32 IST | इंदौर

भारत में पहली बार अब ट्रैफिक की कमान पुलिस नहीं रोबोट संभालेगा। जी हां,मध्यप्रदेश ने तरक्की के रास्ते में एक अहम कदम उठाया है। दरअसल बात हो रही है एक Hi-Tech रोबोट की जो इंदौर के मालवी नगर चौराहे पर पूरी ट्रैफिक व्यवस्था संभाल रहा था। जिसने भी यह नजारा देखा, वहीं पर गाड़ी रोककर देखता रहा। वीडियो में देखें किस तरह काम करता है ये ट्रैफिक रोबोट।

यह अजूबा एक निजी इंजीनियरिंग कॉलेज ने डेढ़ साल की मेहनत के बाद तैयार किया है। डीएसपी (यातायात) प्रदीप सिंह चौहान ने बताया कि हमने इसका नाम ट्रैफिक रोबोट सिस्टम रखा है। हालांकि अभी इसका ट्रायल चल रहा है। इंदौर पुलिस के मुताबिक रोबोट के ट्रैफिक नियंत्रण का पहला ट्रायल सफल रहा। 

इसकी खूबियों की बात

1.यह रोबोट सौर ऊर्जा से चलता है। इसकी ऊंचाई 14 फीट है। जो ना सिर्फ ट्रैफिक लाइट की जानकारी देता है, बल्कि ये रोबोट चारों तरफ घूमकर ट्रैफिक को भी नियंत्रित करता है। 

2.रोबोट को एक बार सेट कर देने के बाद इसकी देख-रेख की जरूरत नहीं होती है। यह ट्रैफिक अपने हिसाब से मैनेज कर लेता है।

3.इसमें टाइमर और लाइट सिस्टम के साथ कैमरे भी लगे हैं, जिन्हें आरएलवीडी (रेड लाइट वायलेशन डिटेक्शन सिस्टम) से अटैच किया जा सकेगा।

4.लालबत्ती में सिग्नल पार करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ चालानी कार्रवाई की जा सकेगी। 

5.इस ट्रैफिक रोबोट की लागत करीब 30 लाख आई है।

6.यह रोबोट 500 किलो लोहे से बना है और इसका ऊपरी हिस्सा घूमता रहता है।

7.यह टाइमर और कैमरों से लैस है और इसकी भुजाएं यातायात खुलने के हिसाब से एडजस्ट हो सकता है।

8.इसे वाई-फाई से जोड़कर कैमरों का व्यू लैपटॉप, टैबलेट और आरएलवीडी सिस्टम से देखना संभव है।

9.एक बार इंस्टॉल करने के बाद इसे हटाना भी संभव है।

10.अभी यह 12 वॉट के बिजली कनेक्शन से चलता है और भविष्य में इसे सोलर सिस्टम से अपडेट कर दिया जाएगा।

Robot

पेटेंट के लिए किया आवेदन

रोबोट बनाने वाले राहुल तिवारी ने बताया कि अभी तक भारत में ऐसा कोई रोबोट नहीं बनाया गया है, इसलिए उन्होंने इसके पेटेंट के लिए आवेदन किया है। सब ठीक रहा तो वह कुछ और रोबोट तैयार करके पुलिस को देंगे।

बता दें कि इससे पहले रोबोट द्वारा ट्रैफिक संभालने का काम अफ्रीका में हो चुका है। अफ्रीका के बाद भारत के इंदौर शहर में यह पहला प्रयोग किया जा रहा है। 

टैग्स: Traffic control|E challan

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