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महिलाओं में तेज़ी से बढ़ रही है यूरिन इन्फेक्शन की समस्या, इन तरीकों से पाएं तुरंत निजात

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अप्रैल 7 , 2018 , 18:12 IST

महिलाओं में होने वाली बीमारियों में इन दिनों यूरिन इंफेक्शन की समस्या तेजी से बढ़ रही है। इसका प्रमुख कारण स्वच्छता न बरतना है।आमतौर पर यह यूरिनरी कॉर्ड में होने वाला एक संक्रमण है, जिसे यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) भी कहा जाता है। 

एक रिपोर्ट के मुताबिक करीब 40 प्रतिशत महिलाएं जीवन में कभी न कभी UTI से ग्रसित होती हैं।

यूरिन इंफेक्शन के लक्षण-

- पेशाब के दौरान दर्द या जलन होना।
- यूरिन पास होने में ज्यादा समय लगना।
- बार-बार पेशाब आना।
- पेशाब से बदबू आना।
- पेट के निचले हिस्से में दर्द होना।
- हल्का बुखार होना।
- कभी-कभी पेशाब के साथ खून आना।
- यूरिन कारंग पीला होना

कुछ सावधानियां बरतकर आप इसके संक्रमण से बच सकते हैं-

1. पेशाब आने पर रोके नहीं-

कभी भी तेज आई पेशाब को रोके नहीं, जब भी पेशाब लगे तुरंत जाएं वरना यूटीआई होने का खतरा बढ़ जाएगा।

2. ढेर सारा पानी पिएं -

इस बीमारी से बचने के लिये खूब ज्‍यादा पानी पिएं। हर एक घंटे में पेशाब लगनी जरुरी होती है इसलिये आपको लगभग 8-10 ग्‍लास पानी तो रोज पीना चाहिये।

3. संभोग के बाद हमेशा पेशाब करें-

संभोग के बाद हमेशा पेशाब करें और योनि को साफ करें। इससे ट्रैक में अगर कोई बैक्‍‍टीरिया होगा भी, तो वह साफ जो जाएगा। शारीरिक संबन्‍ध बनाने के बाद ज्यादातर महिलाओं को मूत्र मार्ग में संक्रमण की शिकायत हो जाती है, जो कि खुद उनके ही पार्टनर दृारा ट्रांसमिट होती है। पुरुषों में शुक्राणु (वीर्य) और मूत्र एक ही मार्ग के माध्‍यम दृारा निकलते हैं, जिससे मूत्र संक्रमण सेक्‍स दृारा आसानी से महिला साथी के जननांग में चला जाता है।

4. पब्लिक टॉयलेट का यूज़ कम से कम करें-

जितना हो सके पब्‍लिक कमोड का प्रयोग न करें तो बेहतर होगा। या फिर अच्‍छा होगा कि सबसे पहले फ्लश चला लें और फिर उसके दो मिनट बाद ही बैठें। वरना संक्रमण होने का खतरा दोगुना बढ़ जाता है। अपना टॉयलेट हमेशा साफ रखें। यह पूरी तरह से संक्रमण से भरे हुए होते हैं। पबलिक टॉयलेट में जहां बैक्‍टीरिया अपना घर बनाते हैं वह हैं, टॉयलेट सीट, फ्लश लीवर, नल आदि... टॉयलेट का प्रयोग करने के बाद तुरंत ही अपने हाथों को साबुन से धोना चाहिये।

5. कॉटन की ही अंडरवियर पहने-

यूटीआई फैलाने वाले बैक्‍टीरिया हमेशा गर्म और गीले स्‍थान पर ही फैलते हैं। वो अंडरवेयर जो सिंथेटिक की बनी हुई होती है वह गुप्‍तांगो तक हवा को पास होने से रोकती है। हमेशा कॉटन फैब्रिक से ही बनी अंडरवेयर पहने, जिससे त्‍वचा हमेशा ड्राय बनी रहे औ बैक्‍टीरियल फॉर्मेशन न हो। रोज नहाना और पर्सनल हाइजीन रखने से आप इस बीमारी से दूर रहेंगी। अपनी अंडरवेयर को दिन में कम से कम 1 बार जरुर चेंज करें। और कभी भी टाइट अंडरवेयर ना पहने।

6. पाइनएप्‍पल खाइये-

ताजे पाइनएप्‍पल में एक खास एंजाइम होते हैं जो यूटीआई के लिये एक उपचार हैं। इसे ठीक करने के लिये आपको एक कटोरा पाइनएप्‍पल भर कर खाना होगा। इसे दिन में दो बार खाएं, आपका संक्रमण ठीक हो जाएगा।

7.सफाई पर ध्यान दें-

गर्भावस्था के दौरान सफाई का विशेष ध्यान रखें। यूटीआई होने पर मरीज को पेशाब में रुकावट, गुप्तांग में लाल चकत्ते पड़ना, जलन और पेशाब में ब्लड पास होने की दिक्कत हो सकती है। इसका ठीक से इलाज न होने पर संक्रमण किडनी तक पहुंच सकता है। इससे शरीर में खून की कमी हो सकती है। किडनी में एरिथ्रोपीटिन नामक हॉर्मोन होता है जिससे बोनमैरो के जरिए रेड ब्लड सेल बनती है। किडनी में इंफेक्शन होने से हॉर्मोन का असर कम होने लगता है, जिससे शरीर में हीमोग्लोबिन घट जाता है।

8. खानपान में सावधानी बरतें-

 खानपान की स्वच्छता का ध्यान रखना भी जरूरी है। गंदी जगह पर बनाया गया खाना खाने से भी यह परेशानी हो सकती है। खाने का संक्रमण खून में मिल जाता है जिससे यूरिनरी कॉर्ड संक्रमण हो सकता है। UTI की समस्या सफाई न रखने के कारण ज्यादा होती है। इसलिए संक्रमण से बचने के लिए शरीर की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। अपना टॉइलट हमेशा साफ-सुथरा रखें।

क्‍या ना करें-

आपको जितना हो सके उतना चॉकलेट, कैफीन और कार्ब का सेवन करने से बचें। यह 3 चीजें आपके मूत्राशय की लाइनिंग को नुकसान पहुंचा सकती हैं और बैक्‍टीरिया के लिये आराम से घर बना सकती हैं।


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