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ट्रंप ने 1100 करोड़ की मिसाइलें दागीं, खत्म हुआ सीरिया का केमिकल हथियारों का जखीरा!

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अप्रैल 15 , 2018 , 10:12 IST

सीरिया के केमिकल हथियारों के ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए अमेरिकी हमले के बाद राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने मिशन को कामयाब बताया है। बेशक अमेरिका ने यह हमला ब्रिटेन और फ्रांस के साथ मिलकर अंजाम दिया मगर बताया जाता है कि सबसे बड़ा खर्च अमेरिका ने किया है। अनुमान है कि एक झटके में उसने करीब 1100 करोड़ रुपये खर्च कर दिए। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक शनिवार तड़के अमेरिका ने सीरिया पर 120 मिसाइलें दागीं। बताया जा रहा है कि ये सभी टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें थीं। इकॉनमिस्ट डॉट कॉम के मुताबिक एक अमेरिकी टॉमहॉक क्रूज मिसाइल की कीमत करीब साढ़े 9 करोड़ रुपये है। इस लिहाज से अमेरिका ने मौजूदा कार्रवाई में करीब 1100 करोड़ रुपये की मिसाइलें दागीं। इससे पहले पिछले साल सीरिया में अमेरिका ने 59 टोमहॉक मिसाइलें दागी थीं। अमेरिका ने हमले में B-1 बॉम्बर्स, टॉरनैडो जेट्स और युद्धपोत का इस्तेमाल किया। वहीं ब्रिटेन ने चार टॉरनैडो विमानों का इस्तेमाल किया।

केमिकल हथियार खत्म?

शनिवार तड़के हुए हमले के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जिस कामयाबी का दावा अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन कर रहे हैं, वह वाकई में हासिल हुई है/ रॉयटर्स ने एक अधिकारी के हवाले से बताया है कि सीरियाई सरकार ने सैन्य ठिकानों को हमले से पहले ही खाली करा लिया था। इस अधिकारी के मुताबिक हमारे पास रूस की ओर से हमले की जानकारी पहले ही मिली थी। वहीं रूस के रक्षा मंत्रालय ने भी कहा है कि सीरियाई सेना ने दशकों पुरानी मशीनों की मदद से अमेरिकी के नेतृत्व वाले मिसाइल हमले को नाकाम किया है। ब्रिटेन स्थित निगरानी समूह सीरियन ऑब्ज़र्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स ने कहा है कि सीरियाई सेना के रक्षा तंत्र ने अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस की 65 से ज्यादा मिसाइलों को रोका है।

सीरिया पर US का अटैक, जानें क्या है पूरा विवाद

सीरिया में सात सालों से जंग चल रही है और इस दौरान कई बार केमिकल अटैक होने की बात सामने आई। अमेरिका कहता रहा है कि असद सरकार अपने ही लोगों पर यानी विद्रोहियों के कब्जे वाले इलाकों में केमिकल अटैक करवा रही है। साल 2013 में 21 अगस्त को घोटा में सीरिया की सरकार पर रासायनिक हमला करने का आरोप लगा। यहां मरने वालों की तादाद 281 से 1,729 के बीच मानी जाती है। लेकिन तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बाराक ओबामा ने सीरिया पर जवाबी कार्रवाई नहीं की। सीरिया 2013 में यूएन प्रस्ताव के जरिए अपने केमिकल हथियारों को नष्ट करने को सहमत हुआ था, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। फिर साल 2017 में 4 अप्रैल को भी खान शायखून इलाके में केमिकल अटैक हुआ जिसमें जहरीली गैस छोड़ी गई और 74 आम नागरिक मारे गए और 500 से ज्यादा जख्मी हुए। इसके बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने 7 अप्रैल को उस ठिकाने पर हवाई हमला किया जिसे केमिकल हथियारों का स्रोत माना जा रहा था। इसके बाद 2018 में 7 अप्रैल को डूमा में केमिकल अटैक हुआ जिसमें 70 से ज्यादा मौतें हुईं जिसके बाद ट्रंप ने ताजा हमला बोला है।

क्या था निशाने पर?

अमेरिका के मुताबिक, हमले में सीरिया के तीन रासायनिक हथियारों के भंडारगृहों को निशाना बनाया गया। पहला, दमिश्क के पास वैज्ञानिक शोध अनुसंधान इकाई जहां हथियारों का उत्पादन होता है। दूसरा, होम्स के पास रासायनिक हथियार भंडारण इकाई और होम्स के अहम सैन्य ठिकाने, जहां रासायनिक हथियारों से जुड़ी सामग्री रखी जाती है।


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