ख़ास रिपोर्ट

CBI के इस कड़क अधिकारी से लालू को लगता है डर!

सतीश वर्मा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जुलाई 7 , 2017 , 20:41 IST | नई दिल्ली

सीबीआई के एडिशनल डायरेक्टर राकेश अस्थाना एक बार फिर लालू प्रसाद यादव के लिए मुसीबत बन कर आए हैं। राकेश अस्थाना के बारे में आप भले ज्यादा जानकारी नहीं रखते हों लेकिन लालू प्रसाद यादव और उनके समर्थकों के बीच अस्थाना काफी मशहूर हैं। राकेश अस्थाना इससे पहले भी देश में चर्चित चारा घोटाले की प्रारंभिक जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। राकेश अस्थाना के सीबीआई में रहते ही लालू प्रसाद यादव पर चारा घोटाले में शिकंजा कसा गया था।

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राकेश अस्थाना ने लालू यादव ने चर्चित चारा घोटाले की जांच शुरू की थी

वही राकेश अस्थाना एक बार फिर लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के लिए मुसीबत बन कर आए हैं। इस बार लालू की मुसीबत पहले की तुलना में ज्यादा बड़ी नजर आ रही है। राकेश अस्थाना के हाथ एक बार फिर लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की बेनामी संपत्ति और साल 2006 में लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहते रेलवे के दो होटलों की नीलामी में गड़बड़ी की जांच की जिम्मेदारी है।

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राकेश अस्थाना लालू यादव के लिए अनजान नाम नहीं है

लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के 12 ठिकाने पर सीबीआई की रेड की मॉनिटरिंग राकेश अस्थाना ही कर रहे है। बता दें कि लालू यादव के 1995 में मुख्यमंत्री बनने के बाद सीबीआई चारा घोटाले की जांच शुरू कर चुकी थी। राकेश अस्थाना धनबाद में थे और जांच उनके हवाले थी। तब झारखंड अलग राज्य नहीं था। अस्थाना चाहे लालू प्रसाद यादव से कितनी भी इज्जत से पेश आए हों लेकिन ये भी सच है लालू प्रसाद को चारा घोटाले में जेल का मुंह तो देखना ही पड़ा। चारा घोटाले से बिहार की राजनीति हमेशा के लिए बदल गई।

कौन हैं राकेश अस्थाना

अस्थाना 1984 के बैच के गुजरात कैडर के अफसर हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विश्वासपात्र माने जाते हैं। वाजपेयी सरकार आने के बाद अस्थाना गुजरात कैडर वापस चले गए और मनमोहन सिंह सरकार आने के बाद लालू यादव को लगा की अस्थाना रूपी बेताल का पीछा उनसे छूटा। लेकिन होनी को तो कुछ और ही मंजूर था। रेलमंत्री रहने के दौरान सूरत के पास एक रेल दुर्घटना हुई, लालू यादव बतौर मंत्री स्पॉट पर मुआयना करने पहुंचे। लालू को इस बात का अंदाजा नहीं था कि अस्थाना वहां पुलिस कमिश्नर थे।

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अचानक अस्थाना को देखकर लालू यादव का पारा चढ़ गया, वे चिल्लाने लगे। इसी बीच कुछ नवयुवकों ने बर्फ के पत्थर जैसे टुकड़े लालू पर फेंके। जाहिर है बर्फ को तो पिघलना ही था। सबूत बचने की तो कोई संभावना थी ही नहीं। लालू घबरा गए और घटनास्थल से भागे। दिल्ली लौट कर उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी उनकी हत्या कराना चाहते हैं।

यूपीए सरकार में लालू ने हरसंभव कोशिश की जिससे वे चारा केस से बरी हो जाएं लेकिन ऐसा हुआ नहीं। कई सालों का वनवास काटने के बाद पिछले चुनावों में लालू प्रसाद यादव का समय बहुरा ही था कि अस्थाना फिर हाजिर हो गए। चारा घोटाले की जांच अभी चल रही है और ऊपर से इस बीच मोदी की सरकार आ गई है। अस्थाना दिल्ली में अतिरिक्त निदेशक के पद पर काबिज हो गए। मोदी से नजदीकियों की वजह से सीबीआई में उनकी खासी धाक है ही।

अस्थाना के ऊपर कई राजनेताओं के जांच की जिम्मेदारी है

राकेश अस्थाना के जिम्मे कई राजनेताओं की जांच की जिम्मेदारी है. मसलन मुलायम सिंह यादव, मायावती, ममता बनर्जी और अब लालू प्रसाद यादव और उनके पत्नी और बेटे. गुजरात कैडर के आईपीएस अधिकारी राकेश अस्थाना के पास इस समय सीबीआई के कई केस हैं, जिसमें से अगस्टा वेस्टलैंड डील और विजय माल्या केस भी मुख्यरूप से शामिल है।

 

 

 


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