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सिलीगुड़ी में छठ पूजा पर पाबंदी लगाने पर विवाद, लोगों ने कहा रोक-टोक हटाओ

अर्चित गुप्ता | 0
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| अक्टूबर 11 , 2017 , 20:55 IST | सिलीगुड़ी

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश पर दार्जिलिंग की जिला अधिकारी ने सिलीगुड़ी में छठ पूजा को लेकर जो गाइड लाइन जारी की है, उसको लेकर यहां के हिंदीभाषी समाज ने सवाल उठाया है। इन लोगों का कहना है कि आखिरकार छठपूजा को लेकर ही इतनी पाबंदी क्यों लगायी जा रही है? साल भर किसी न किसी त्योहार का आयोजन होते रहता है। महानंदा नदी में हमेशा ही मूर्तियां विसर्जित की जाती हैं, तब किसी तरह की कोई पाबंदी नहीं लगती और अब छठपूजा के ठीक पहले दार्जिलिंग जिला प्रशासन ने कई प्रकार की पाबंदियों का एलान कर दिया है, जो सही नहीं है।

हिंदी भाषी नवजागृति परिषद (सिलीगुड़ी) ने मांग की है कि महानंदा नदी को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (राष्ट्रीय हरित न्यायालय) के निर्देशों के आलोक में दार्जिलिंग जिला प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों के चलते छठ पूजा आयोजन के समक्ष जो जटिलता उत्पन्न हुई है उसे शासन-प्रशासन दूर करे। इसे लेकर परिषद की ओर से मंगलवार को सिलीगुड़ी जर्नलिस्ट्स क्लब में संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें परिषद के अध्यक्ष संतोष कुमार तिवारी ने कहा कि महानंदा नदी को प्रदूषण मुक्त रख कर इसके सरंक्षण हेतु नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश व दार्जिलिंग जिला प्रशासन के दिशा-निर्देश का हम हार्दिक स्वागत करते हैं।

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उन्होंने कहा कि नदियों के संरक्षण की दिशा में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशों को मानना हम सभी के लिए अनिवार्य है। मगर, इस बाबत शासन-प्रशासन से मेरा यह सवाल है कि इस छठ पूजा के उपलक्ष्य में महानंदा नदी की चिंता कर रहे शासन-प्रशासन को साल भर महानंदा की परवाह क्यों नहीं रहती? उसे लावारिस क्यों छोड़े रखा जाता है?। देखा जाए तो छठ पूजा ही है जिस दौरान महानंदा की सफाई भी हो जाती है वरना साल भर कोई महानंदा की ओर झांकने वाला तक नहीं होता।

उल्लेखनीय है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (राष्ट्रीय हरित न्यायालय) के निर्देशों के आलोक में दार्जिलिंग की जिलाधिकारी जयशी दासगुप्ता ने बीते शुक्रवार को ही कुछ दिशा-निर्देश जारी किए थे। उसके तहत महानंदा नदी पर बांस आदि का कोई अस्थायी पुल नहीं बनाया जा सकेगा। नदी में किसी भी तरह बालू की बोरियां डाल कर नदी के प्रवाह को अवरुद्ध नहीं किया जा सकेगा। नदी किनारे से नदी में अधिकतम तीन फूट तक ही जा कर कोई पूजा की जा सकेगी।

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पूजा में उपयोग की गई कोई भी सामग्री नदी में नहीं फेंकी जा सकेगी। इसका उल्लंघन करने वालों के लिए तीन साल कारावास व 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माना का प्रावधान है। जिलाधिकारी की ओर से यह भी निर्देश जारी किया गया है कि पूजा उत्सवों के दौरान डीजे, साउंड बॉक्स, माईक आदि के साउंड के उपयोग में भी ध्वनि स्तर 60 डेसिबल से अधिक कदापि न हो। पटाखे छोड़ने में भी इस पहलू पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

अधिक आवाज पटाखे छोड़ कर व माइक बजा कर लोगों को परेशान नहीं किया जा सकता। इन निर्देशों पर विभिन्न छठ पूजा आयोजकों ने भी आपत्ति जताई है। वहीं, जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन ने कहा है कि छठ पूजा आयोजक इस बात का ध्यान रखें कि छठ पूजा आयोजन में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशों का कोई उल्लंघन न होने पाए। इसके दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


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