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बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाएंगे नीतीश? पीएम मोदी ने की दोस्ती की पहल

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जनवरी 1 , 1970 , 05:30 IST | पटना

बिहार के कार्यवाहक सीएम नीतीश कुमार के इस्तीफे के ऐलान के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर उन्हें भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में जुड़ने के लिए बधाई दी है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री ने नीतीश की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाया है। ऐसे में बिहार में बीजेपी-जेडीयू की नई सरकार बनने के संकेत मिलने शुरू हो गए हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट कर कहा,

भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में जुड़ने के लिए नीतीश कुमार जी को बहुत-बहुत बधाई। सवा सौ करोड़ नागरिक ईमानदारी का स्वागत और समर्थन कर रहे हैं।

दूसरे ट्वीट में पीएम ने लिखा,

देश के, विशेष रूप से बिहार के उज्जवल भविष्य के लिए राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर भ्रष्टाचार के खिलाफ एक होकर लड़ना, आज देश और समय की मांग है।

इसके पहले नीतीश कुमार ने इस्तीफे से बाद मीडिया से बातचीत में बीजेपी से समर्थन लेने पर कोई सीधा जवाब नहीं दिया था। उन्होंने कहा कि जो भी बिहार के हित में होगा, वह करेंगे। ऐसे में यह माना जा रहा है कि अब नीतीश बीजेपी के समर्थन से बिहार में सरकार बना सकते हैं। प्रधानमंत्री ने अपनी ओर से पहल कर नीतीश को खुला ऑफर दिया है।

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सीटों के आंकड़ों की बात करें तो 243 सदस्यीय विधानसभा में सबसे ज्यादा 80 सीटें लालू यादव की पार्टी आरजेडी के पास है। नीतीश की पार्टी जेडीयू के पास फिलहाल 71 सीटें हैं, जबकि महागठबंधन में तीसरी सहयोगी पार्टी रही कांग्रेस के पास 27 सीटें हैं। वहीं, मुख्य विपक्षी दल बीजेपी के पास 53 सीटें हैं और उसकी सहयोगी पार्टी एलजेपी और आरएलएसपी के दो-दो विधायक हैं। जीतनराम मांझी की पार्टी 'हम' का एक विधायक है और भाकपा माले के खाते में तीन सीटें हैं, जबकि 4 निर्दलीय विधायक हैं। सीटों के इन आंकड़ों के आधार पर बिहार विधानसभा में ये संभावनाएं आकार ले सकती हैं:

बीजेपी के समर्थन से सरकार 

बिहार में सत्ता हासिल करने का जादुई आंकड़ा 122 है। जेडीयू के पास 71 सीटें हैं और बीजेपी की 53 सीटें मिला ली जाएं तो 124 सीटें हो जाती हैं। इससे सरकार को बहुमत मिल जाएगा। वहीं, बीजेपी की सहयोगी एलजेपी, आरएलएसपी और 'हम' जैसी पार्टियों की सीटों को मिला लें तो यह आंकड़ा 129 सीटों का होता है। यानी बीजेपी के साथ मिलकर नीतीश कुमार आसानी से सरकार चला सकते हैं। 

राष्ट्रपति शासन की संभावना

नीतीश कुमार ने इस्तीफा देकर 'सुशासन बाबू' की अपनी छवि को मजबूत करते हुए बड़ा दांव खेला है। ऐसे में यह भी संभावना जताई जा रही है कि वह अपने दम पर चुनाव में जाने का फैसला लें और बिहार में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरें। यदि नीतीश इस राह पर चलते हैं तो राज्य में चुनाव होने तक राष्ट्रपति शासन भी लागू हो सकता है। 

टूट सकती है नीतीश की पार्टी

नीतीश की पार्टी जेडीयू के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव हमेशा से बीजेपी विरोधी गठबंधन के हामी रहे हैं। लालू प्रसाद यादव की पार्टी जेडीयू के पास सबसे ज्यादा 80 विधायक हैं। ऐसे में इस बात की भी संभावना है कि जेडीयू के ही कुछ विधायक टूटकर लालू के साथ चले जाएं। इस तरह लालू की पार्टी जेडीयू के बागियों, कांग्रेस के 27, सीपीआई-एमएल के 4 और 4 निर्दलीय विधायकों के साथ मिलकर सरकार बनाने का प्रयास कर सकती है।

 


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