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दावोस में मोदी का डंका, बोले- 21वीं सदी में विकास ने कुछ सवाल भी खड़े किए हैं

सतीश वर्मा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जनवरी 23 , 2018 , 16:52 IST

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम-2018 (WEF) में मंगलवार को नरेंद्र मोदी ने इनॉगरल स्पीच दी। मोदी ने WEF के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन प्रो. क्लॉज श्वाब से मुलाकात की। मोदी ने कहा कि उन्होंने फोरम का बहुत अच्छे से तैयार किया है। 1997 में भारत के प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा दावोस समिट में आए थे। तब भारत की जीडीपी करीब 400 बिलियन डॉलर थी, जो अब 6 गुना तक ज्यादा हो गई है।

मोदी फोरम में अब तक का सबसे बड़ा भारतीय दल ले गए हैं। इसमें 6 कैबिनेट मंत्री, 2 सीएम, 100 सीईओ समेत 130 लोग शामिल हैं। भारत की ओर से 21 साल बाद कोई प्रधानमंत्री इस फोरम में शामिल हो रहा है।

WEF का मकसद दुनिया के हालात सुधारना

मोदी ने कहा, "मैं प्रो. श्वाब को वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम को सशक्त और व्यापक मंच बनाने पर साधुवाद देता हूं। उनके विजन में महत्वाकांक्षी एजेंडा है, जिसका मकसद दुनिया के हालात सुधारना है। उन्होंने इस एजेंडा को राजनीतिक और आर्थिक विजन से जोड़ा है। उन्होंने कहा कि हमारे गर्मजोशी भरे स्वागत-सत्कार के लिए स्विटजरलैंड की सरकार और नागरिकों के लिए अपनी कृतज्ञता व्यक्त करना चाहता हूं।

दुनिया काफी बदल चुकी है

मोदी ने कहा, "आज 21 साल बाद टेक्नोलॉजी और डिजिटल एज की उपलब्धियां देखें तो 1997 वाला विषय सदियों पुराने युग की चर्चा लगती है। आज नेटवर्क सोसाइटी ही नहीं, बल्कि बिग डेटा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में जी रहे हैं।'

हैरी पॉटर का भी मोदी ने लिया नाम

उन्होंने कहा कि 1997 में यूरो प्रचलित नहीं था, एशियन फाइनेंशियल क्राइसिस का पता नहीं था और न ही ब्रेग्जिट के आसार थे। तब बहुत कम लोगों ने ओसामा बिन लादेन के बारे में सुना था और हैरी पॉटर का नाम भी अंजाना था। तब शतरंज के खिलाड़ियों को कम्प्यूटर से हारने का गंभीर खतरा भी नहीं था। तब साइबर स्पेस में गूगल का अवतरण नहीं हुआ था। 1997 में आप इंटरनेट पर अमेजन शब्द ढूंढते तो आपको नदियां और घने जंगलों के बारे में सूचना मिलती।''
उस जमाने में ट्वीट करना चिड़ियों का काम था, मनुष्य का नहीं था। वो पिछली शताब्दी थी। आज दो दशकों के बाद हमारा विश्व और हमारा समाज जटिल नेटवर्क का हिस्सा है। आज भी दावोस अपने समय से आगे हैं। ''

शक्ति का संतुलन बदल रहा है

मोदी ने कहा, "आज दरारों से भरे विश्व में साझा भविष्य का निर्माण विषय है। आर्थिक क्षमता और राजनीतिक शक्ति का संतुलन बदल रहा है। इससे विश्व के स्वरूप में दूरगामी परिवर्तनों की छवि दिखाई दे रही है। विश्व के सामने शांति, स्थिरता,सुरक्षा जैसे विषयों को लेकर नई और गंभीर चुनौतियां हम अनुभव कर रहे हैं। टेक्नोलॉजी ड्रिवन ट्रांसफर्मेशन हमारे रहने और काम करने के व्यवहार और बातचीत और अंतरराष्ट्रीय समूहों को टेक्नोलॉजी की दुनिया ने प्रभावित कर दिया है।''

टेक्नोलॉजी को जोड़ने, मोड़ने और तोड़ने का उदाहरण सोशल मीडिया में मिलता है। डाटा बहुत बड़ी संपदा है। डेटा से सबसे बड़े अवसर मिल रहे हैं और सबसे बड़ी चुनौतियां भी। डाटा के पहाड़ बन रहे हैं और उन पर नियंत्रण की होड़ लगी है। ऐसा माना जा रहा है कि जो डाटा पर नियंत्रण रखेगा, वही भविष्य पर नियंत्रण करेगा।''

अब मानवता के लिए खतरा भी है

मोदी ने कहा, "विज्ञान तकनीक और आर्थिक प्रगति के नए आयामों में मानव को नए रास्ते दिखाने की क्षमता है। इन परिवर्तनों से ऐसी दरारें भी पैदा हुई हैं, जो दर्दभरी चोटें भी पहुंचा सकती हैं। ये ऐसी दरारें पैदा कर रहे हैं, जिन्होंने पूरी मानवता के लिए शांति और समृद्धि के रास्ते को दुर्गम और दुसाध्य बना दिया है।

ये डिवाइस, ये बैरियर्स विकास के अभाव, गरीबी, बेरोजगारी, अवसरों के अभाव और प्राकृतिक और तकनीकी संसाधनों पर आधिपत्य की हैं। इस परिवेश में हमारे सामने कई महत्वपूर्ण सवाल हैं, जो मानवता के भविष्य और भावी पीढ़ियों की विरासत के लिए समुचित जवाब मांगते हैं।

क्या हमारी विश्व व्यवस्था इन दरारों को और दूरियों को बढ़ावा तो नहीं दे रही हैं। ये कौन सी शक्तियां हैं, जो सामंजस्य के ऊपर अलगाव को तरजीह देती है, जो सहयोग के ऊपर संघर्ष को हावी करती हैं।

हमारे पास कौन से साधन हैं, रास्ते हैं, जिनके जरिए हम इन दरारों और दूरियों को मिटाकर एक सुहाने और साझा भविष्य के सपने को साकार कर सकते हैं। भारत, भारतीयता और भारतीय विरासत का प्रतिनिधि होने के नाते मेरे लिए इस फोरम का विषय जितना समकालीन है, उतना ही समयातीत भी है।

समयातीत इसलिए, क्योंकि भारत में अनादि काल से हम मानव मात्र को जोड़ने में विश्वास करते आए हैं, उसे तोड़ने और बांटने में नहीं।''

पूरी दुनिया एक परिवार है

मोदी ने कहा, "हजारों साल पहले संस्कृत भाषा में लिखे गए ग्रंथों में भारतीय चिंतकों ने जो लिखा है, वो है वसुधैव कुटुंबकम यानी पूरी दुनिया एक परिवार है। हम सब एक परिवार की तरह बंधे हुए हैं। हमारी नियतियों में एक साझा सूत्र हमें जोड़ता है।''

ये धारणा निश्चित तौर पर आज दरारों और दूरियों को मिटाने के लिए और ज्यादा सार्थक और रेलेवेंट है। लेकिन, आज एक गंभीर बात ये है कि इस काल की विकट चुनौतियों से निपटने के लिए हमारे बीच सहमति का अभाव है।'' - "परिवार में भी जहां सौहार्द होता है, तो कुछ ना कुछ मनमुटाव और मतभेद भी होते रहते हैं। लेकिन, परिवार का प्राण और प्रेरणा यही भावना होती है कि जब साझा चुनौतियां सामने आएं तो सब लोग एकजुट होकर उनका सामना करते हैं और एकजुट होकर उलब्धियों और आनंद के हिस्सेदार बनते हैं।

चिंता का विषय है कि हमारे विभाजन और दरारों ने इन चुुनौतियों के खिलाफ मानव जाति के संघर्ष को कठिन बना दिया है। जिन चुनौतियों की तरफ मैं इशारा कर रहा हूं, उनकी संख्या भी बहुत है और विस्तार भी बहुत व्यापक है।''

 


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