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क्‍यों मनाते हैं व‍िश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य द‍िवस? जानें खुद को कैसे रखें बीमारियों से दूर

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अप्रैल 7 , 2018 , 11:56 IST

7 अप्रैल को वर्ल्ड हेल्थ डे मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का मकसद लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना है। 70 साल पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) की स्थापना की गयी थी। WHO का स्थापना दिवस विश्व में विश्व स्वास्थ्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। WHO ने ‘स्वास्थ्य सभी के लिए’ को मूलमंत्र बनाकर विश्व के हर देश में यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज को लागू करवाने की प्रक्रिया शुरू की है और विश्व स्वास्थ्य दिवस 2018 का यह थीम भी है।

यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज का उद्देश्य किसी देश के नागरिक को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना और आर्थिक मदद देना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2015 में ‘सस्टेंनबल डेवलपमेंट’ का लक्ष्य निर्धारित किया। जिसके तहत हर व्यक्ति को आर्थिक परेशानियों सामना किये बिना आवश्यक स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना लक्ष्य है।

हर साल विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य दिवस की एक थीम होती है। साल 2018 की थीम है Universal Health Coverage: Everyone, Everywhere। यानी कि वैश्‍विक स्‍वास्‍थ्‍य कवरेज: सभी के लिए, सभी जगह।

इसमें कोई दो राय नहीं है कि कई देशों में स्वास्थ्य सुविधा बहुत बेहतरीन है, लेकिन आज भी विश्व के कई ऐसे देश हैं, जहां लोगों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध नहीं है और वे इसके अभाव में जीते हैं। आज भी विश्व के 10 करोड़ लोग घोर गरीबी में जीते हैं और अपने स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं देते हैं। विश्व की जनसंख्या की लगभग 12 प्रतिशत आबादी अपने स्वास्थ्य पर मात्र 10 प्रतिशत ही खर्च करती हैं। ऐसे में स्वास्थ्य सुविधा सबके लिए सुलभ कराना एक चुनौती है।

विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य दिवस का इतिहास -

WHO ने अपने स्‍थापना दिवस यानी कि 7 अप्रैल 1950 से विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य दिवस मनाने की शुरुआत की थी। स्वास्थ्य के मुद्दों और समस्याओं के प्रति जागरुकता बढ़ाने के मकसद से WHO के नेतृत्‍व में हर साल दुनिया भर में कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इसके लिए एक खास विषय यानी कि थीम का चुनाव किया जाता है। साल 1995 में इसकी थीम थी वैश्विक पोलियो उन्मूलन। तब से अब तक इस घातक बीमारी से ज्यादातर देश मुक्त हो चुके हैं, जबकि बाकि देशों में जागरुकता का स्‍तर बड़ा है।

बीमारियों को कैसे रखें दूर -

आज के दौर में लाइफ फास्ट हो चुकी है। जीवन में गुणवत्ता की ओर बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि स्वास्थ्य से समझौता किया जाए। आप अपनी जिंदगी में व्यस्त रहते हैं, जीवन में सबकुछ सही चल रहा होता है। अचानक से एक ब्रेक लगता है और जिंदगी दवाओं की मोहताज हो जाती है। हमारा ध्यान इस ओर जाना चाहिए कि कैसे बीमारियों से दूर रहा जा सकता है।

हेक्टिक लाइफ से लें थोड़ा ब्रेक-

 इस बारे में डॉ. रिद्धी राठी सेठ कहती हैं, 'लाइफ हेक्टिक हो चुकी है। लोग 8-10 घंटों तक काम कर रहे हैं। वे डेस्क पर ही खाना और पीना पसंद करते हैं। इससे दांत, पीठ और कमर, मोटापा, डायबीटीज और दिल की बीमारियां हो जाती हैं। मेट्रो शहरों में स्ट्रेस लेवल हाई हो चुका है। लिहाजा सेहत बरकरार रखनी है तो डॉक्टर से रेग्युलर चेकअप करवाने के अलावा हर घंटे फल और पानी का सेवन करें। काम से थोड़ा ब्रेक लें। ब्रीदिंग एक्सर्साइज करें और मसल्स को स्ट्रेच करें।'

उम्र के अनुसार अपना ख्याल रखें -

डॉ संदीप गर्ग कहते हैं कि प्रिवेंटिव केयर का सीधा मतलब यह है कि आप खुद को स्वस्थ रखने के प्रति सचेत रहें। अपनी हेल्थ पर ध्यान दें। इस दिशा में आपकी पहल का फायदा आपको ही मिलना है। वह कहते हैं कि बीमारियां अनंत हैं। उम्र बढ़ने के साथ ही शरीर कमजोर होने लगता है लेकिन जब शरीर और उम्र के अनुसार आप अपना ख्याल रखते हैं तो अधिक समय तक स्वस्थ रह पाते हैं।

योग और एक्सर्साइज करें -

आज के दौर में घरेलू नुस्खों पर भी जोर दिया जाने लगा है। ये चीजें आपको मौसम के हिसाब से स्वस्थ रखने में मददगार साबित होती हैं। इसके अलावा स्वस्थ रहना है तो नियमित रूप से योग, एक्सर्साइज, वॉकिंग और जॉगिंग करें। इससे स्ट्रेस कम होता है। इसके अलावा हेल्दी डायट लें, अपने खाने में ताजी सब्जियों और फाइबर युक्त भोजन को शामिल करें। साथ ही मौसमी फलों का सेवन जरूर करें।

खुद को और परिवार को रखें स्वस्थ -

आपको बता दें कि 1950 में पहली बार विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाया गया था, तब से लेकर अब तक यह सिलसिला जारी है। बात जब इतने बड़े प्लेटफॉर्म पर स्वस्थ रहने की होती है, तो हमारी जिम्मेदारी और जवाबदेही होती है कि हम भी इस दिशा में पहल करें और खुद को और परिवार को स्वस्थ रखें। यह सच है कि आप जानकारी को विस्तार देकर रोगों से बचाव की ओर कदम बढ़ा सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि लाइफ में प्रिवेंटिव अप्रोच को अपनाएं और अपने फिटनेस लेवल को मेंटेन रखें।

जानें क्या है उम्र के लिए सही-

10 साल की उम्र -

10 की उम्र से बच्चों की डाइट में प्रोटीन से भरपूर चीजें जैसे- फूट्स, नट्स, आलू, हरी बीन्स, ब्रोकोली, फूलगोभी, शिमला मिर्च, गाजर, बाजरा और राजमा शामिल करें। इसके अलावा उन्हें दही, पनीर, अंडा, मास-मछली आदि का सेवन भी जरूर कराएं।

20 साल की उम्र-

20 साल की उम्र में हड्डियां और मांसपेशियां तेजी से बढ़ती और बनती हैं। इसलिए इस उम्र में आपको प्रोटीन युक्त खाना, कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट, नट्स, सीड्स, कैल्शियम और आयरन से भरपूर भोजन करना चाहिए। इसके अलावा इस उम्र में हैल्दी रहने और हॉर्मोन्स बैलेंस करने वाले फूड्स जैसे- ब्लूबेरी, दही, अखरोट, ओटमील आदि का सेवन भी जरूर करें।

30 साल की उम्र-

इस उम्र में शरीर में बहुत से बदलाव होते हैं, जिसके कारण आपको अपनी डाइट बैलेंस रखनी चाहिए। इसलिए इस उम्र में शरीर को फिट और स्वस्थ रखने के लिए जैतून का तेल, नारियल, अंडा, बेरीज, हरी पत्तेदार सब्जियां और फ्रूट्स का सेवन करें। 30 की उम्र में आपको एंटीऑक्सीडेंट्स, फॉलिक एसिड, लो-फैट डेयरी प्रोडक्ट्स और विटामिन ई से भरपूर फूड्स भी खाने चाहिए।

40 साल की उम्र-

40 की उम्र में बीमारियां लगने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। ऐसे में आपको अधिक से अधिक पत्तागोभी, फूलगोभी, ब्रोकली, लहसुन, प्याज, हल्दी और जैतून के तेल का सेवन करना चाहिए।

50 साल की उम्र-

इस उम्र में खुद को स्वस्थ रखने के लिए ऐसे आहार लें, जिसमें पर्याप्त मात्रा में जिंक, प्रोटीन और विटमिन बी मौजूद हो। इसके अलावा हल्दी, अंडा, तुलसी, नट्स और प्लांट बेस्ड फूड आइटम्स का सेवन भी करें।

60 और उसके बाद ऐसे रहें सेहतमंद-

60 की उम्र में हर व्यक्ति की मासंपेशियां कमजोर होने लग जाती है। ऐसे में आपको प्रोटीन युक्त आहार जैसे अंडे, बींस, टोफू, नट्स, दूध और डेयरी उत्पादों का अधिक से अधिक सेवन करना चाहिए। आप अपने डॉक्टर से सप्लीमेंट्स लेने के बारे में भी पूछ सकते हैं। इसके अलावा फिट रहने के लिए स्ट्रेंथ बिल्डिंग व्यायाम भी आपके लिए काफी फायदेमंद होते हैं।


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