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ख़तरा: 2024 तक दुनिया की सबसे बड़ी आबादी बन सकता है भारत

कीर्ति सक्सेना, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जुलाई 11 , 2017 , 12:58 IST | नई दिल्ली

11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है। यूनाइटेड नेशन्स जनरल असेंबली ने 1989 में 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस घोषित किया था। इसका उद्देश्य वातावरण और विकास के संदर्भ में जनसंख्या से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता फैलाना था।

अनुमान के मुताबिक, भारत की जनसंख्या आज की तारीख (11 जुलाई, 2017) को करीब 1 अरब, 34 करोड़ हो चुकी है। ये आंकड़ा पूरी दुनिया की आबादी का 17.86% है। अभी दुनिया की आबादी करीब 7 अरब, 51 करोड़ है।

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ये बात तो आप यकीनन जानते ही होंगे कि आबादी के लिहाज से भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश माना जाता है। जनसंख्या के लिहाज पर पहले स्थान पर चीन है। विश्व की कुल आबादी में चीन की 19% और भारत की 18% की हिस्सेदारी है। इस आंकड़े को देखते हुए लगता है कि भारत 2024 तक चीन को पीछे छोड़ देगा। गौर करने वाली बात यह है कि यूरोप के सारे देशों की कुल आबादी करीब 73 करोड़ है, जो अकेले भारत की तुलना में काफी कम है।

वैसे अलग-अलग देशों के लिए जनसंख्या से जुड़ी अपनी समस्याएं हैं। जहां कुछ देश इस बात से परेशान हैं कि उनके देश में जनसंख्या दिन पर दिन कम होती जा रही है तो वहीं भारत अपनी निरंतर बढ़ती जनसंख्या को लेकर परेशान है।

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क्या आप जानते हैं?

संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने कुछ दिनों पहले यह दावा किया था कि भारत की आबादी 2024 तक चीन से ज्यादा हो जाएगी। वहीं 2030 तक भारत की आबादी 1.5 अरब होने की संभावना है। यूएन ने ये दावा आर्थिक और सामाजिक मामलों के विभाग ने विश्व आबादी संभावना-2017 नामक रिपोर्ट में किया है।

आपको जानकर हैरानी होगी कि हर सेकंड दुनियाभर में 4 बच्चों का जन्म होता है यानी 1 मिनट में 240 बच्चे। वहीं मृत्यु दर की बात करें तो 1 सेकंड में 1.8 यानी करीब 2 लोगों की मौत होती है। ऐसी उम्मीद की जा रही है कि साल 2050 आते-आते दुनियाभर की 70 प्रतिशत आबादी शहरों में रहने लगेगी।

जनसंख्या बढ़ने के फायदे और नुकसान:

फायदे

अगर किसी देश की जनसंख्या अधिक होती है तो वो जनसंख्या संसाधन के रूप में काम आ सकती है। कोई भी देश अपने मानव संसाधन का उपयोग अपनी तरक्की के लिए कर सकता है।

इसके साथ ही अधिक जनसंख्या होने से बाजार पर भी बड़ा असर पड़ता है। इससे दुनिया भर की कम्पनियां अपना पैसा उस देश में लगाने की इच्छुक रहती हैं। जिसकी वजह से युवाओं कि संख्या बढ़ने पर देश की प्रगति में मदद मिलती है।

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नुकसान

किसी देश की जनसंख्या अधिक होने से कृषि पर भार पड़ता है। इससे विकास से हटकर पूरा ध्यान लोगों का पेट भरने पर होता है।

इसके अलावा जीवनस्तर पर भी बहुत बुरा असर पड़ता है। लोगों को रोटी, कपड़ा और मकान जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए भी बहुत मशक्कत करनी पड़ती है। इसका उदाहरण भारत की गरीबी के रूप में साफ-साफ देखने को मिल जाता है। लोगों को रोजगार मिलने में भी बेहद परेशानी होती है।


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